
डॉ. प्रीति प्रवीण खरे
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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आगे बढ़ता चढ़ता सूरज,
नभ पर चलता गाता सूरज।
आगे बढ़ता चढ़ता सूरज।।ख़ुशियों के तुम दीप जलाओ,
बाग़ों-बाग़ों फूल खिलाओ।
मन में हो जब घोर निराशा,
आशाओं का उगता सूरज।
आगे बढ़ता चढ़ता सूरज।।बरगद पीपल छाँव लुटाए,
नदिया अपना राग सुनाए।
हँसते-हँसते जंगल बोला,
गीत सुनानें आता सूरज।
आगे बढ़ता चढ़ता सूरज।।जब शाम ढले घर आँगन में,
तब जुगनू निकले सावन में।
बदली पे जब मस्ती छाई,
आँख मिचौली करता सूरज।
आगे बढ़ता चढ़ता सूरज।।नभ पर चलता गाता सूरज।
आगे बढ़ता चढ़ता सूरज।।
परिचय :- डॉ. प्रीति प्रवीण खरे
निवासी : कोटरा सुल्तानाबाद रोड भोपाल (मध्य प्रदेश)
लेखन विधाएँ : गीत, ग़ज़ल, कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक एवं बाल साहित्य।
प्रकाशन : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का निरन्तर प्रकाशन।
प्रकाशित कृति : अब तक दस पुस्तकें प्रकाशित।
आकाशवाणी : १९८९ से युववाणी सजीव प्रसारण कार्यक्रम में कंपीयर के रूप में कार्य,एवं वार्ताकार। दूरदर्शन मध्यप्रदेश की सन १९९२ से उद्घोषिका (वार्ताकार डी.डी. मध्यप्रदेश), डी.डी.मध्यप्रदेश हेतु शिक्षाप्रद शॉर्ट फ़िल्मों, क्षणिकाओं का निर्माण एवं प्रसारण। काव्य कृति “निंदिया को पंख लगे” के लिए मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा जहूर बक्श पुरस्कार-२०१७ सहित कई पुरस्कार प्राप्त।
सृजनात्मकार्य : रिसोर्स पर्सन के रूप में हिंदी भाषा के प्रति बच्चों को प्रोत्साहित करने हेतु विधालयों एवं महाविघालयों में कार्यशाला, नाटक/नुक्कड़ नाटकों का लेखन तथा नाटकों में गीत लेखन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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