कलम तोड़ना
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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कलम तोड़ना हो सके, जब सच का आवेग।
सच्चा ही तो दे सके, दुनिया को शुभ नेग।।
कलम तोड़ना नित फले, जो जग को सौगात।
जिससे शोभित दिन सदा, और दिव्य हो रात।।
कलम तोड़ना हो सुखद, मंगलकारी गीत।
आओ! हम गतिमय रहें, बनें धर्म के मीत।।
कलम तोड़ना हित रचे, नष्ट करे जो पाप।
ताक़त इतनी शब्द में, कौन सकेगा माप।।
कलम तोड़ना कर्म है, पावन एक विधान।
जो अँधियारा दूर कर, लाये नवल विहान।।
कलम तोड़ना साधना, जिसकी हो जयकार।
जिससे हो हर स्वप्न नित, जीवन में साकार।।
कलम तोड़ना चेतना, जग का सुंदर रूप।
जिससे कागज़ को मिले, सतत् निष्कलुष धूप।।
कलम तोड़ना लेख को, देते हैं अमरत्व।
पत्रकार कवि-लेखनी, रखे अगर सत्-तत्व।।
परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) ...








