कविता
पिता का फर्ज
प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी'
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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पिता हूँ, पिता का दर्द जानता हूँ !
गम छिपाकर मुसकुराने का मर्म जानता हूँ..!!
छाले हो पांव में कोई गम नहीं !
कंधे पर बैठाकर दुनिया घुमाना जानता हूँ..!!
ना दे कोई मुझे नसीहत जीने का !
अच्छी ज...
छंद
कहें सुधीर कविराय …
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
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रोला छंद
श्रम साधक मजदूर, रात दिन मेहनत करता।
कब कहता मजबूर, रोज रोटी को खटता।।
कहें मित्र यमराज, यही है इनका सावन।
नहीं मानते हार, भाव रखते मन ...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
जीवन में इतना सीखा
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार म.प्र.
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जीवन में इतना सीखा।
सच को सच कहना सीखा।
फूलों से रिश्ता जोड़ा,
काँटों से बचना सीखा।
थी जितनी कुव्वत अपनी,
दम उतना भरना सीखा।
छोड़ बदी के बहकावे,
नेकी पर चलना सीखा।
मन ने जो अहसास दिया,
तन ने वो सहना सीखा...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
