कविता
बचकर रहना कुटिल मुस्कानों से
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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नफ़रतों के इस अंधे दौर में
यदि कोई मोहब्बत लुटा जाए,
तो उसे सिर माथे बिठाइए,
दुआओं में उम्र उसकी बढ़ा जाए।
ये यूँ ही नहीं उतरती धरती पर,
ये कुदरत की कोई सौगात है,
जहां हर ओर धुआँ ही धुआँ,
वहीं ...
छंद
पद का मद
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
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सरसी (कबीर) छंद
पद के मद में चूर हुआ जो, उससे रहिए दूर।
भूल गया वो कल तक क्या था, आज हुआ मगरूर।।
खुद को खुदा समझ बैठा है, हुआ बहुत अभिमान।
तनि...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
पता बताना भूल गए
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार म.प्र.
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पता अपना बताना भूल गए।
हमें रस्ता दिखाना भूल गए।
किसी के साथ थोड़ी दूर जाकर,
हमारे साथ आना भूल गए।
हमारे सामने होकर गए पर,
नज़र हमसे मिलाना भूल गए।
जताए तो बहुत रिश्ते पुराने,
मगर उनको निभाना भूल गए।
कठिन...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
