कविता
सांसो की ङोर
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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दीये की टिमटिमाती लौ
पवन से पुछती है
क्या तुम मुझे बुझाने आई हो।
पवन बोली अरे नहीं
तुम, तुम तो अंघकार को
चिरने की शक्ति रखती हो
और जब अग्नीदेव तुम्हारे साथ है
तुम्हे कौन बुझा सकता है।
तुम भटके पथिक को पथ दिखा...
छंद
आया फागुन झूम के
धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू
बालोद (छत्तीसगढ़)
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(उल्लाला छंद)
रंगों की बौछार है, खुशियों का त्यौहार है।
पिचकारी भर रंग की, होली है आनंद की।
नीला पीला लाल है, हरा गुलाबी गाल है।
आया फागुन झ...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल
शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
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सनातनी गज़ल
कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता।
तो दुनिया में कोई हमारा न होता।
जो पकड़ा न होता मेरा हाथ तुमने,
तो ग़म की नदी का किनारा न होता।
न होते लता, पुष्प, पर्वत ये झरने।
तो जग में ये अन...
जन्मदिवस
आनंद में डूबती उतरती अविस्मरणीय यात्रा
शकुन्तला दुबे
देवास (मध्य प्रदेश)
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प्रातः पांच पैंतालीस पर सुखद सुरक्षित यात्रा की कामना के साथ दीप प्रज्ज्वलित किया तब कल्पना भी नहीं थी कि अनुपम नैसर्गिक सौंदर्य हमारी बाट जोह रहा है। हमारे स्वागत के लिए बादल हल्की फूहा...
