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कविता

अंतर्मन का द्वंद्व

अंतर्मन का द्वंद्व

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* सबसे भयंकर युद्ध सीमाओं पर नहीं लड़े जाते वे मन के भीतर होते हैं जहाँ कोई तालियाँ नहीं बजाता। यहाँ दुश्मन यादें बनकर आता है, कभी डर बनकर वार करता है कभी उम्मीद बनकर उठाता है और कभी तोड़कर छ...

छंद

सरस्वती वन्दना : पञ्चचामर छ्न्द

सरस्वती वन्दना : पञ्चचामर छ्न्द

डॉ. भावना सावलिया हरमडिया, राजकोट (गुजरात) ******************** पञ्चचामर छ्न्द तुम्हें करूँ प्रणाम आठ याम मैं सुहासिनी। लुभा रहा स्वरूप दिव्य आपका सुभाषिनी। विमोहिनी सुतान छेड़ दो कि जो सुधा बने। नया-भावयुक्त गी...

उपन्यास

उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१

उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१

विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. ****************** उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।' 'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...

ग़ज़ल

कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल

कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** सनातनी गज़ल कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता। तो दुनिया में कोई हमारा न होता। जो पकड़ा न होता मेरा हाथ तुमने, तो ग़म की नदी का किनारा न होता। न होते लता, पुष्प, पर्वत ये झरने। तो जग में ये अन...

जन्मदिवस

आनंद में डूबती उतरती अविस्मरणीय यात्रा

आनंद में डूबती उतरती अविस्मरणीय यात्रा

शकुन्तला दुबे देवास (मध्य प्रदेश) ******************** प्रातः पांच पैंतालीस पर सुखद सुरक्षित यात्रा की कामना के साथ दीप प्रज्ज्वलित किया तब कल्पना भी नहीं थी कि अनुपम नैसर्गिक सौंदर्य हमारी बाट जोह रहा है। हमारे स्वागत के लिए बादल हल्की फूहा...