कविता
बेटिया
किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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बेटिया तो मां-बाप की
परछाई होती है,
हर वक्त वो उनके
साथ रहती है।
कहीं कष्ट ना आये
वह हरदम ध्यान रखती है।
ठंड गर्मी हो या बारिश
समय का ध्यान रखती है,
समय पर खा लेना पापा
वह हरदम ख्याल रखती है...
छंद
ममता की वो खान है
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
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कुण्डलिया छंद
ममता की वो खान है, मानें हम संताप।
अपने निज व्यवहार से, करते हम सब पाप।।
करते हम सब पाप, सभी हम जो हैं भरते।
उसकी पीड़ा आज, देख क्...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
बढ़ी है नफ़रत
निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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वज़्न- १२१२ २१२१ २१
बढ़ी है नफ़रत बढ़ें हैं शूल।
खिला है जब से विषैला फूल।।
ये ख़त्म कैसे हुआ है अम्न।
कहाॅं पे हमसे हुई है भूल।।
धुऑं बचा है बची है राख।
बची न बस्ती बची है धूल।।
गधे ह...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
