कविता
विरह की व्यथा
भारमल गर्ग "विलक्षण"
जालोर (राजस्थान)
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प्राण-पखेरू उड़ गया डाली से,
छूट गया संग, रह गई काली से।
चाँदनी रातें अब सूली बनीं,
तारों भरी छत पलकों पर ढली।
हवा के झोंके सिसकियाँ लिए,
दीवारों से टकराकर रुली।
बिना बादल बरसा करती आँखें,
नींद रूठी ...
छंद
जोगिरा छंद (कबीर छंद)
शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
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जोगिरा छंद (कबीर छंद)
पवन फागुनी बहे सुहानी, मन में भरे उमंग।
झूम रही खिल के तरुणाई, घुली हवा में भंग।।
जोगीरा सररर रा जोगीरा सररर रा....
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल
शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
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सनातनी गज़ल
कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता।
तो दुनिया में कोई हमारा न होता।
जो पकड़ा न होता मेरा हाथ तुमने,
तो ग़म की नदी का किनारा न होता।
न होते लता, पुष्प, पर्वत ये झरने।
तो जग में ये अन...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
