थोथे सारे वादे निकले …
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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थोथे सारे वादे निकले,
सच्चाई के लाले।
आँखों बँधी लोभ की पट्टी,
होते नित घोटाले।।
उबड़-खाबड़ सड़क कोसती,
व्यस्त सभी चौराहे।
डामरीकरण का नाटक बस,
होता जब जी चाहे।।
मन में क्षोभ हज़ारों लेकिन,
ख़ुद ही दुश्मन पाले।
टौल-टैक्स भारी ले-लेकर
भरते रोज़ ख़ज़ाने।
सड़क सुधरती कागज़ पर ही,
काम सभी मनमाने।।
सच्चाई पर मौन भीष्म बन,
काम करें सब काले।
दुर्घटनाएँ होतीं प्रतिदिन,
रोतीं हैं माताएँ।
थोड़े दिन आन्दोलन होते,
चक्रव्यूह रचनाएँ।।
अन्धी नगरी चौपट राजा,
बुनता रहता जाले।
औरँगज़ेबी आदेशों से,
दिल पर चले कुल्हाड़ी।
गहरी चोट कुशासन देता,
उलट-पुलट हर गाड़ी।।
बस नीलामी आदर्शों की
करते टोपी वाले।
परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सु...








