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गीत

हिरणी के इस चंचल मन को
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हिरणी के इस चंचल मन को

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हिरणी के इस चंचल मन को हवा वसंती महकाती। खिलता हरसिंगार चमन में, हम गाते गीत प्रभाती।। सौरभ सरिता उर में बहती, खिलती आशा की कलियाँ। पिया कहे सिंगार सलौना, चाहत में डूबी अँखियाँ।। यादें लेतीं हैं अँगड़ाईं, मुस्कानें सब मदमाती। प्रणय वल्लरी झूम रही है, अंग-अंग यौवन छाया। सजा कुंतलों पर गजरा है, देख मदन भी बौराया।। प्रेम तूलिका लिखती पाती, भेद खोलकर हर्षाती। प्रीति हमारी यह मधुमासी, प्रिय मधुर मुलाकातें हैं।। संबंधों के गठबंधन में, भ्रमरों की बारातें हैं।। मधुरस छलके तृषित अधर से, धड़कन -धड़कन इतराती। प्रियतम तेरी बनी मेनका, आशाएँ आलिंगन की। मन राधा बन बैठा व्याकुल, राह तके अनुमोदन की।। लगती आग मिलन की ऐसी, प्रेम क्षितिज में इठलाती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...
राम जन्म के आनंद में
गीत

राम जन्म के आनंद में

महेश बड़सरे राजपूत इंद्र इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आया है आया है राम जन्म उत्सव २... दिखलाया है दिखलाया है सनातनी वैभव 2... राम जन्म के आनंद में, रंग-रंग के फूल खिले। छोटा-बड़ा नही है कोई, एक दूजे से गले मिले।। उत्साह और उल्लास भरा, भाव सभी में छाया है.... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... बाल वृद्ध और बहनें करते, रामचरित का पारायन। गली मोहल्ले गूंजे जयकारे, राम नाम का हो गुंजन।। प्यारा नाम रामचन्द्र का, सकल विश्व को भाया है..... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... जब थे राघव प्रकट हुए, अवध बन गया साकेत धाम। देवी देवता आ प्रगटे थे, अदृश्य रूप में करने प्रणाम।। देख हरी को शिशु रूप में, बैकुंठ लोक मुसकाया है..... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... भोगवाद की चकाचौंध में, मत फंसना ओ मतवालों। रखना है आदर्श राम का, ओ संस्कृति के रखवालो...
संकल्पों की फुलवारी
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संकल्पों की फुलवारी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कुलवंती दयमंती है वह घर की लक्ष्मी हर नारी। तीनों लोकों में यश उसका सारा जग है बलिहारी।। उर विशाल माँ दुर्गा जैसा, जगजननी कहलाती है। जन्मे गर्भ से देवता हैं, धरती स्वर्ग बनाती है।। साहस करुणा की हे देवी, अभिनंदन है अवतारी। आशा है विश्वास वही है, दिव्य शक्ति है कल्याणी। जगत् को संजीवनी देती, मधुरस पूरित है वाणी।। सब रूपों में पूजित नारी, देखो सब पर है भारी। अपना धर्म निभाती हँसकर, पीर जगत् की हरती है। कर्म करे श्रद्धा से अपना, धरा उर्वरा करती है।। चहुँदिशि जय-जयकार उसी की, संकल्पों की फुलवारी। कीर्तिमान नित नूतन रचती, ध्वजा प्रगति की फहराती। करती है उत्थान देश का, अंतरिक्ष तक वह जाती।। त्यागी लक्ष्मी स्वाभिमानिनी, दुर्गावती कहाँ हारी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" न...
रामजन्म भयो अवध में
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रामजन्म भयो अवध में

आशा जाकड़ 'आस' इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** चैत्र मास शुक्ल पक्ष शुभ नवमी आई, मध्यान बारह बजे शुभ समाचार लाई। अवनि से अंबर तक खूब ‌पुष्प है बरसाई। रामजन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। रानी कौशल्या गोदी में ललनवा सुलाएं राजा दशरथ सिरहाने खड़े मंद मुस्काए कैकेई और सुमित्रा उनको दे रहे बधाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छांई।। सखियांँ आवें, ताली बजा मंगलाचार गावें ढोलक बजाकर, हर्षित बधाई गीत गावें। नृप दशरथ बाँट रहे थाल भर-भर मिठाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। समाचार सुन वशिष्ठ जी राजमहल आए राम की जन्म-कुंडली सबको सुनवाएं। हर्षित राजा वशिष्ठजी के चरणन पुजाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। अयोध्या में सर्वत्र ढोल-ताशे बज रहे, घर-घर ढोलक, झांझ-मजीरे बज रहे। राजमहल द्वारे बज रही तुरई-शहनाई। राम जन्म भयो अवध खुशियांँ छाई।। बंदनवार सज रहे, मं...
आज क्यों
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आज क्यों

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** बात पर, आज क्यों, बंधु देखो अड़े। दुश्मनी, है बढ़ी, प्राण लेने खड़े।। है चकित, यह धरा, शांत आकाश है। रो रहे, खग सभी, हो रहा नाश है।। वीर जो, थे बहुत, पार्थ साथी थके। मित्र के, सारथी, क्रुद्ध होके रुके।। स्वार्थ में, क्रूर हो, वीर योद्धा लड़े। नित्य बम, फेंकते, दुष्ट शैतान हैं। ताकतें, चीख कर, ले रहीं जान हैं।। लक्ष्य है जीत का, बंध सब टूटते। उर चुभे, शूल हैं, बंधु हैं छूटते।। आज तो, शर्म से, वीर सारे गड़े। है नियति, यह निठुर, पार्थ भी जानते। भाग्य में, जो लिखा, वो हुआ मानते।। धर्म ही, कर्म है, युद्ध पर काल है। कौरवों, पाँडवों, का बुरा हाल है।। मर रहे, युद्ध में, आज छोटे बड़े। शक्ति पर, गर्व है, युद्ध थोपा नया। नाश है, त्रास दें, मूढ़ भूले दया।। रोक दो, युद्ध को, श्याम आधार हो। हो विजय...
इस चंचल मन को
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इस चंचल मन को

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हिरणी के इस चंचल मन को हवा वसंती महकाती। खिलता हरसिंगार चमन में, हम गाते गीत प्रभाती।। सौरभ सरिता उर में बहती, खिलती आशा की कलियाँ। पिया कहे सिंगार सलौना, चाहत में डूबी अँखियाँ।। यादें लेतीं हैं अँगड़ाईं, मुस्कानें सब मदमाती। प्रणय वल्लरी झूम रही है, अंग-अंग यौवन छाया। सजा कुंतलों पर गजरा है, देख मदन भी बौराया।। प्रेम तूलिका लिखती पाती, भेद खोलकर हर्षाती। प्रीति हमारी यह मधुमासी, प्रिय मधुर मुलाकातें हैं।। संबंधों के गठबंधन में, भ्रमरों की बारातें हैं।। मधुरस छलके तृषित अधर से, धड़कन -धड़कन इतराती। प्रियतम तेरी बनी मेनका, आशाएँ आलिंगन की। मन राधा बन बैठा व्याकुल, राह तके अनुमोदन की।। लगती आग मिलन की ऐसी, प्रेम क्षितिज में इठलाती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...
अंतिम तुमको मेरी पुकार
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अंतिम तुमको मेरी पुकार

राम राज सिंह उन्नाव (उत्तर प्रदेश) ******************** प्रणय-गीत अंतिम तुमको मेरी पुकार।। नवल विटप जो पीट हो रहा उसके तुम हो प्राण। नयन मेघ से आज करा दो अमिय प्रेम रस पान। प्रकृति सजाती निज आँगन में नित नूतन उद्यान। मेरे मन मधुवन में गुंजित किन्तु विरह का गान। आज विदाई की बेला है, द्वार खड़े है मेरे कहार।। अंतिम तुमको मेरी पुकार।।१।। प्रतिदिन पथ में पुष्प बिछाता साथ मधुर मुस्कान। औचक ही मै खिल जाता हूँ तुम्हे निकट ही जान। किन्तु मिलन वह एकाकी बस क्षण भर का अवधान। फिर उसी वेदना के क्रंदन का होता नित्य वितान। सुखद प्रणय की अभिलाषा में, जीवन रण न मै जाऊ हार। अंतिम तुमको मेरी पुकार ।।२।। मन में है छवि बसी तुम्हारी और तुम्हारा ध्यान। कभी तो होगा दुःख रजनी का मंगल एक विहान। स्वाति बूँद बिनु सीप सम अधर-कमल, मुख म्लान। आकर जीवन सुधा पिला दो बन वियोग वरदान। प्...
हे राम धरा पर आ जाओ
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हे राम धरा पर आ जाओ

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हे राम धरा पर आ जाओ, प्रभु फिरती अकुलाई। खोई है मानवता जग ने, कली कली मुरझाई।। ‌ दानवता प्रभु खूब बढ़ी है, रक्षक बनकर आओ। संस्कार सब भूल गये हैं, आकर नाथ सिखाओ।। समरसता का पाठ पढ़ा दो, दूर करो कठिनाई। भ्रष्टाचारी पनप रहे हैं, भ्रष्टाचार मिटा दो। भय से हीन जगत् हो सारा, अत्याचार हटा दो।। अंत करो मन के रावण का, हर उसकी परछाई। राह प्रगति की खोलो सारी, हो संस्कृति संस्थापक। पोषित कर दो धर्म सनातन, प्रभु हो शांति उपासक।। राम-राज्य फिर से आ जाए, सुरभित हो अँगनाई। रघुकुल रीति निभाने वाले, प्रभु हो अन्तर्यामी। तकती राह अहल्या फिर से, दे दो दर्शन स्वामी।। कलियुग के सब कलुष दूर हों, मुक्तिधाम रघुराई । विनती करते रघुकुल भूषण, शरणागत आते हैं। वंदन अभिनंदन हैं प्रभुजी, रामचरित गाते हैं...
मॉं अम्बे गीत
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मॉं अम्बे गीत

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना। बुद्धि करदो विशद मॉं करें वंदना। नित नवल छंद कविता करें सर्जना। शीश रख दो वरद हस्त मॉं शारदे, छंद - निर्झर बहा दो करें याचना।। मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना। जाह्नवी कर्म यमुना बहे संग में। मानसी शारदा संगमी अंग में।। तीर्थ संगम बना दें सफल शारदे, भाव से भारती माॅं करूॅं साधना।। मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना।। आप से ही चले मातु संसार यह। है दुखी ये हिया मॉं करो प्यार है।। आप जननी जगत की हरो कष्ट सब, टूट जाऊॅं नहीं बाॅंह को थामना। मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना।। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी ...
प्रेम-कुमुदिनी
गीत

प्रेम-कुमुदिनी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** आग लगी तन मन में प्रियतम, व्याकुल उर मधुमास में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। कली-कली मदमाती साजन, गंधिल भी हर डाल है। सम्मोहित करता वसंत है, आह्लादित सुर ताल है।। बहे प्रेम की मधुशाला तन, पिया मिलन की आस में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। कंपित होते अधर हमारे, विरहाकुल हर रात है। नैन -प्रतीक्षा करते साजन, स्वप्न जगे क्या बात है।। बौराती है प्रेम- कुमुदिनी, सखियों के परिहास में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। कुंतल की वेणी मुरझाई, चन्द्र वदन भी पीत है। खोया रंग कपोलों ने भी, रूठा दर्पण मीत है।। खड़ी द्वार बस अगवानी को, आने के विश्वास में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। नैनों से निर्झर झरते हैं, चुप पायल झंकार भ...
नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी
गीत

नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। श्याम हमसे करों ना बरजोरी, बरसाने की हम राधा गोरी। ग्वाल बाल सॅंग मारग में ठाढ़ो, भर पिचकारी तन-मन पें मारो, हाथ पकड़ मोरी वैंया मरोड़ी चुनरी कन्हैया ने फा डारी। नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। आओ सखी मिल श्याम को घेरें, आज पकड़ लै फिर न छोड़ें, मल- मल रंग अबीर लगावें, आज निकालें जाकी रंग दारी। नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। आज न में तोकूं छोड़ुंगी, प्रेम रंग से खूब रंगुंगी। छलिया तेरे संग चलुंगी, तेरी अदाओं पे बलिहारी, नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य...
दर्शन को अँखियाँ प्यासी
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दर्शन को अँखियाँ प्यासी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** दर्शन को अँखियाँ प्यासी हैं, उर बसे मनमीत। चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।। मुझको नहीं दिन-रात चैना, है किशन संताप। चहुँओर दिखता है अँधेरा, हाथ थामो आप।। नित आचरण हो शुद्ध मेरा, दो प्रभु वरदान। कर क्षम्य सब अपराध मेरे, रख प्रभो कुछ ध्यान।। मीरा बनी भटकी किशन मैं, गा रही प्रभु गीत। चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।। पलकें बिछायें राह देखूँ, अब समझ लो पीर। सागर बिना प्यासी नदी मैं, अब नहीं है धीर।। चितचोर हो समझो प्रभो अब, श्याम हो आधार। मनमोहना दो मोक्ष मुझको, थाम लो पतवार।। जीवन सँवारों नाथ मेरा, भक्त की हो जीत। चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।। छोड़ मोह-माया सब आयी, बस तुम्हीं से आस। हूँ मूढ़मति पर दास तेरी, हो तुम्हीं विश्वास।। मिथ्या जगत कान्हा शरण लो, हो ...
भाई दूज
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भाई दूज

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कहे बहिन की प्रीति सदा ही, भइया रीति चलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। बहिना का है प्रेम निराला, पावन जैसे गंगा धारा। रक्षक भाई है बहना का, नित दूजे पर तन-मन वारा।। जुग-जुग जिए बहिन का भाई, यह आशीष दिलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। भाई दूज का पर्व है प्यारा, खुशी हजारों लेकर आता। मंगल पावन तिलक लगाती, बहिना को त्योहार सुहाता।। प्रेम सदा छलकाता भाई, अद्भुत ज्योति जलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। जुग-जुग जिए बहिन का भाई, प्रभु से वर ये माँगे बहिना। सुख समृद्धि सदा घर आये, झोली खुशियों से प्रभु भरना।। कृष्ण सुभद्रा सी है जोड़ी, नेहिल अमिय पिलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। ...
जीवन का अभिशाप
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जीवन का अभिशाप

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** और रहा कितने दिन बाकी, राजन् पश्चाताप। हारा गणित हमारा लेकिन, जुमले सका न माप।। मुरझाई गमलों में सारी, रोपित आशाएँ। नागफनी-सी हुई पल्लवित, निंदित भाषाएँ।। तहज़ीबों की इस बस्ती में, पसरा है संताप।। सपने देखे उड़ने के जिस, उड़न-खटोले से। आडंबर का जिन्न बड़ा हो, निकला झोले से।। कुटिल नीति के कोड़े मारे, ये दिल्ली की खाप।। जकड़े हम बाजारवाद के, खूनी पंजों में। फँसे हुए हैं वोट बैंक के, बने शिकंजों में।। रखा हुआ है गिरवी अपना, अनुवांशिक आलाप।। उलझ गया सब ताना-बाना, भ्रमित नीतियों में। हिंसकपन बो रही व्यवस्था, राग-रीतियों में।। सूत्रधार ही लगता है अब, 'जीवन' का अभिशाप।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...
होली मा रंग लो
गीत

होली मा रंग लो

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी गीत) उलझन मन ला दहन करें बर, बैठक रखही आज। काम क्रोध बैठक मा जरही, बरही खस्सू खाज।। दया क्षमा मन नियाय करही, बस्ती भर सकलाय। प्रेम प्रसादी सब ला मिलगे , रंग गुलाल उड़ाय।। अइसन बात धरव श्रोता जन, बदलव अब सब ढंग। असली रंग रंँगाहूँ सब झन, निकल जाय ये जंग।। कामी क्रोधी राजा जरगे, नइ बाँचिस हे राज। प्रहलाद पुत्र कैसे बचगे, सोचव सब झन आज।। काबर सच्चा भक्ति रिहिस हे, भगवन के अवतार । भजन भाव ला हिय मा धरथे, होथे जिनगी पार।। असली बचथे नकली जरथे, जलके होथे राख। पापी गगरी मा विष घुलथे, इही चुकाथे साख।। अत्याचारी भ्रष्टाचारी, भगवन करथे नाश। दू दिन के जिनगी सँगवारी, महको उपवन काश।। इही आय मधुबन वृंदावन, गीत भजन गा फाग। अहंकार के माथा फोड़व, रखव प्रेम अनुराग।। परिचय :- धर्मेन्द्र क...
नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे
गीत

नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे

डॉ. भावना सावलिया हरमडिया, राजकोट (गुजरात) ******************** नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे। सबके तन-मन अति पुलकित हैं, झूम रहे सारे। रंग श्याम का चढ़ जाता है, होता उजियारा। जीवन में बहने लगती है, दिव्य अमृत धारा। माधव-राधा के दर्शन ये, जीवन को तारे। नंदलाल से होली खेलें, ग्वाल-बाल प्यारे। बाल-वृद्ध सब होली खेलें, राधा सखियों से, प्रीत भरी पिचकारी मारे, मोहन अँखियों से, होली का हुड़दंग मचा है, ज्यों द्वारे द्वारे। नंदलाल से होली खेलें, ग्वाल-बाल प्यारे। श्याम रंग की पिचकारी से, राधा शरमाईं, भीग गई चोली, चूनर सब, सखियाँ हरषाईं। मुरलीधर का प्रेम पड़ गया, राधा को भारे नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे। गोपी-ग्वाले मिलकर खेलें, गोकुल में होली, राधा गोरी वो मतवाली, खेले हमजोली, मटक रहे राधा मोहन के, नयना कजरारे। नंदलाल से होली खेलें ग्वाल-बाल प्यारे। गि...
कर रहे गुंजन भ्रमर हैं
गीत

कर रहे गुंजन भ्रमर हैं

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन। प्रेम से सुरभित जगत है, गीत गुपचुप गा रहा मन।। तन बँधा है मन सजन भी, प्रीत का बंधन निराला। देख नभ डोले धरा भी। नेह का ओढ़े दुशाला।। बह रही कलकल नदी भी, प्रीत सागर से सुहावन। कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन।। भावना का है समर्पण, नित नया उल्लास भी है। आस है अभिसार की तो, मन जगा विश्वास भी है।। सीप सा मोती बसा हिय, है खनक अब नित्य कंगन। कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन।। काँपता है गात मेरा, मोहती तेरी छुअन भी। काम रति संसर्ग है ये , है प्रणय का मधु मिलन भी।। सैकड़ों सपने सजा कर, आ गयी है आज दुल्हन। कर रहे गुंजन भ्रमर हैं, आ गया मधुमास साजन।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति...
शिवशक्ति
गीत

शिवशक्ति

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी। शरण में तुम्हारे सभी जीवधारी।। मिटा दो सभी कष्ट महका दो बगिया। त्रिशूलं कराग्रे त्रयी तापहारी।। महाकाल उज्जैन में तुम विराजे। लिए हाथ डमरू गले सर्प साजे। कहे सब सदा काल भी तुमसे हारे। चढ़े अंग में भस्म तड़के तुम्हारे। वरे वाम अंगे प्रिये गौर माता। गुणातीत गणनाथ हे निर्विकारी। शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।। किया देव दानव जलधि का बिलोना। तभी जहर का कुंभ निकला कहोना। लगे देव दानव सभी फड़फड़ाने। पिया था हलाहल सभी को बचाने। नमन नीलकंठे जटा गंगधारी। निराकार निर्गुण तपस्वी अकारी। शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।। बहुत कष्ट संसार में तेरे देखा। तड़पते हृदय का कभी लेना लेखा। रहे खुश हमेशा चुभें दिल में भाले। दिखाऍं हृदय के बता किसको छाले। करों पार भव से ये नैया...
वंदे मातरम्
गीत

वंदे मातरम्

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** वंदे मातरम् आज कह दो शान से है जान वंदे मातरम् देश के हर लक्ष्य का संधान वंदे मातरम् देश की मिट्टी है चंदन शीश तुम धारो इसे हमसे जो करवा दे सब बलिदान वंदे मातरम चीर दो दुश्मन को और ग़द्दार को तुम दो सज़ा आज कर दो जंग का ऐलान वंदे मातरम् बाल गंगाधर तिलक का स्वप्न है साकार सब अब हमारे देश का अभिमान वंदेमातरम् याद कर लो तुम शहीदों ने किया उत्सर्ग जो अपनी आज़ादी की है पहचान वंदे मातरम् आप फहराएँ तिरंगा पर्व में गणतंत्र के आइए मिल कर करें जयगान वन्देमातरम् विश्व नतमस्तक हुआ सम्मुख हमारे देश के दे रहा है शक्ति हमको गान वंदेमातरम् परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भ...
हिंदी हिंद की शान रे
गीत

हिंदी हिंद की शान रे

विवेक नीमा देवास (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना हिंदी हिंद की शान रे।। मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … भारत के जन-जन में हिंदी टैगोर के जन गण में हिंदी मीरा के भजनों में हिंदी कबीरा के दोहों में हिंदी मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … पूरब से पश्चिम तक हिंदी उत्तर से दक्षिण तक हिंदी गीत में हिंदी प्रीत में हिंदी रिश्तो के संगीत में हिंदी मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … मंदिर के भजनों में हिंदी वेद और पुराण में हिंदी भगवत गीता के ज्ञान में हिंदी कला और विज्ञान में हिंदी मुझ में हिंदी, तुझ में हिंदी हिंदी हिंद की शान रे … फिर क्यों रहे पराई हिंदी? क्यों दी हमने बुलाई हिंदी क्या प्रश्न नहीं ये अडिग खड़ा है ? ...
दिल्ली कारोबारी
गीत

दिल्ली कारोबारी

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** नफ़ा देखकर सौदा करती, दिल्ली कारोबारी। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी।। आसमान में धूल धुएँ ने, चहुँदिक पैर पसारे। अर्थ समझने में शब्दों के, चश्में भी सब हारे।। लालच के सिर चढ़ कर बैठी, फिर से नई उधारी।। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी आजादी के अमृत काल में, छल ने किए धिंगाने। छीन निवाले हाथों से फिर, पकड़ा दिए फुटाने।। ली समेट फिर बहुरे बल की, हरी-भरी फुलवारी।। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी।। प्यास हुई बेकाबू, जल के, झरने सूखे सारे। आश्वासन की ड्योढ़ी से हम, आस लगाकर हारे।। ज्ञान कोठरी पर ताले जड़, छलता रहा लबारी।। दस हजार में बिका आज फिर, अपना चमन बिहारी।। आँतों की हड़ताल हुई ज्यों, दौड़े भूखे बंदे। बीज बताकर छलनाओं ने, रोप दिए थे फंदे।। देख छटपटाते जीवन को, खुश...
भोर सुहानी
गीत

भोर सुहानी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भोर सुहानी आ गयी, पंछी करते शोर। कैसी अनुपम छवि प्रकृति, मनवा भाव विभोर।। बूँद ओस की गिर रही, शीतल बहे समीर। भोर सदा देखो हरे, अँधियारे की पीर।। आभा लाया है नई, सुंदर नवल प्रभात। सुखदायक यह भोर है, बीती काली रात।। जीवन सारा खिल उठा, महक रहा हर अंग। कान्हा की बंशी बजे, नाचें राधा संग।। जपो नाम भगवान का, बेडा होगा पार। पूरे होंगे स्वप्न सब, खुशियाँ मिले अपार।। स्वागत करिए भोर का, लेकर नव विश्वास। चमकी किरणें हैं धरा, कर लो योगाभ्यास।। वंदन करिये भोर का, ईश नवाओ शीश। मात-पिता चरनन रहो, नाम जपो जगदीश।। ताल देख पंकज खिले, फूल महकते बाग। भोर सुनाता आज है, नव जीवन का राग।। मानव करता कर्म है, भोर मचाता शोर। निकले तम को चीरती, किरणें ये चहुँओर।। जागा नव उल्लास है, आया नया उमंग। गोरी न...
क़ीमत यहाँ इंसान की
गीत

क़ीमत यहाँ इंसान की

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की बढ़ रही है रोज़ ही, आफ़त यहाँ इंसान की न सत्य है, न नीति है, बस झूठ का बाज़ार है न रीति है, न प्रीति है, बस मौत का व्यापार है श्मशान में भी लूट है, दुर्गति यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की।। बिक रहीं नकली दवाएँ, ऑक्सीजन रो रही इंसानियत कलपे यहाँ, करुणा मनुज की सो रही ज़िन्दगी दुख-दर्द में, शामत यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की।। लाश के ठेके यहाँ हैं, मँहगा है अब तो कफ़न चार काँधे भी नहीं हैं, रिश्ते-नाते हैं दफ़न साँस है व्यापार में पीड़ित यहाँ इंसान की। गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान की।। एक इंसाँ दूसरे का, चूसता अब ख़ून है भावनाएँ बिक रही हैं, हर तरफ तो सून है बच सकेगी कैसे अब, इज्जत यहाँ इ...
प्रति गीत (पैरोडी)
गीत, हास्य

प्रति गीत (पैरोडी)

गिरेन्द्रसिंह भदौरिया "प्राण" इन्दौर (मध्य प्रदेश)  ******************** क्या देश है देशी कुत्तों का? गलियों में गुत्थमगुत्थों का। इस देश का यारों क्या कहना, अब देश में कुत्ते ही रहना।। यहाँ चौड़ी छाती कुत्तों की, हर गली भौंकते धुत्तों की। यह डॉग लवर का है गहना, कुत्ते को कुत्ता मत कहना।। यहाँ होती भौं-भौं गलियों में, होती भिड़न्त रँगरलियों में। जो तुम्हें यहाँ पर रहना है, हर हरकत इनकी सहना है।। आ रहे विदेशी नित कुत्ते, रुक नहीं रहे ये भरभुत्ते। ढोंगिया रोंहगिया झबरीले, कुछ कबरीले कुछ गबरीले।। कहीं जर्मन है कहीं डाबर है, लगता कुत्तों का ही घर है। न्यायालय का यह आडर है, देखो इनमें क्या पॉवर है।। गलियों में नहीं मिलेंगे अब, एसी दिन-रात चलेंगे अब। भोजन पायेंगे सरकारी, बन गए अचानक अधिकारी। बन रहे शैल्टर होम यहांँ, कुत्तों की है हर कौम यहाँ। बेशक गउएंँ काटी ज...
बारूदी बस्ती
गीत

बारूदी बस्ती

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** अरमानों की मौन अर्थियाँ, रोज निकलती हैं। इस बारूदी बस्ती में अब, श्वासें डरती हैं।। हिंसा ने खुशियों को खाई, जब त्योहारों की। अलगू जुम्मन बातें करते, बस हथियारों की।। समरसता से डरी पुस्तकें, आहें भरती हैं।। क्षुद्र स्वार्थ में इस माली ने, पूँजी कुछ जोड़ी। हरे-भरे सम्पन्न बाग की, मेड़ें सब तोड़ी।। कलियाँ बासंती मौसम को, देख सिहरती हैं।। डरी अल्पनाएँ आँगन से, अब मुँह मोड़ रही। हँसिया लेकर बगिया विष की, फसलें गोड़ रही।। गर्वित-गढ़ में न्याय-कुर्सियाँ, पल-पल मरती हैं।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...