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डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के

भीमराव ‘जीवन’
बैतूल (मध्य प्रदेश)
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डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के,
जिह्वा सके न खोल।
हिटलर-सा हो गया घमंडी,
दिल्ली का सेंगोल।।

लगते हैं अब बागवान के,
कातिल क्रूर इरादे।।
मसल रहे हैं जब उपवन की,
कलियाँ हिंसक प्यादे।।
न्याय-देव को अब सत्ता की,
बीन करे कंट्रोल।।

जाल बनाने लगे हुए सब,
मंचासीन जुलाहे।।
भेड़ों को अब नित अफीम ही,
चरा रहे चरवाहे।
पत्रकारिता नैतिकता का,
पहन न पाई खोल।।

बटन दबाकर हुई अँगुलियाँ,
खुद की ही हत्यारी।
चोर उच्चकों के हाथों दी,
घर की चौकीदारी।।
कल की चिंता में ‘जीवन’ का,
बिगड़ गया भूगोल।।

परिचय :- भीमराव ‘जीवन’
निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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