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प्यास का रेगिस्तान

इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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नलों में पानी नहीं,
धूप का कोई सानी नहीं।
गंदा ही पानी सही,
मगर पीने को पानी नहीं।

झुलस रही है धरती सारी,
जैसे तपती कोई भट्टी हो,
कंठ सूखकर काँटा हुआ,
चाहे गूँजती कोई पुकार खट्टी हो।

बूंद-बूंद को तरसती आँखें,
बादल अब मिलते नहीं,
पत्थर दिल है ये मौसम भी,
ज़ख्म यहाँ अब सिलते नहीं।

सूख गए हैं ताल-तलैया,
सूख गई है मन की आशा,
घड़े पड़े हैं औंधे मुँह,
मौन खड़ी है सबकी प्यासा।

अमृत सा वो शीतल जल,
अब केवल इक कहानी है,
मृगतृष्णा की राहों में,
बस यादों का ही पानी है।

नलों में पानी नहीं,
धूप का कोई सानी नहीं।
गंदा ही पानी सही,
मगर पीने को पानी नहीं।

परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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