ईश्वर की ही खोज है : किन्नर
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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स्त्री और पुरुष
अल्हड़ता और पौरुष
उभय पक्ष का अपभ्रंश
सांसारिक नियमों से
प्रताड़ित पक्ष है : ये किन्नर
आवेग में आक्रोश
करुणा में क्रोध
मातृत्व और पितृत्व से मर्माहत
संतानोत्पत्ति से असक्षम
शिशु प्रेम को लालायित
निसंतान इंसान होते हैं किन्नर
उत्पीड़न आहत नारी मन सा
हतोत्साहित असहाय पुरुष सा
दिशाहीन, परिणाम रहित
उन्मादित मन सा
इश्रुहीन बिलखते दीन मन सा
तन भी भूखा, भूखे मन सा
भीषण भावों के उतार चढाव में
शीत युद्ध मर्यादा से लड़ता
नज़र नज़र से तिरोहित
अपनी लक्ष्मण रेखा में
सिमटे रहते ये किन्नर
स्पंदन रहित संवेदना का मारा
विधी की कृपाहीन कृपा का मारा
ममता से दूर माँ का नयनतारा
कब वीर्यवान पिता ने स्वीकारा
किस्मत कोसता का रब का मारा
ईश्वर की ही खोज है ये बेचारा
स्वयं मन को समझाता
स...





















