काना
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रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद"
(बहुत साल पहले की घटना पर आधारित)
इंदौर। कालानी नगर से चंदन नगर होते हुए फूटी कोठी, हवा बंगला, केट, राजेन्द्र नगर के लिए रास्ते निकलते है। बहुत दिनों पहले हमें अक्सर ये जानकारियां मिलती रहती कि अमुक बुजुर्ग ने दर्दनाक हादसे के बाद दिव्यांग हो जाने पर भी भीख मांगने की बजाय कमाई करके पेट भरने को महत्व दिया।
मातेश्वरी देवी ने तूफान में घरपरिवार उजड़ जाने के बाद भी हिम्मत नही हारी, वो आज भी जिंदा है और दान-धर्म करके अपना जीवन यापन कर रही है। धन बहुत है पर परिवार में सिर्फ और सिर्फ वो अकेली है।
सुरेश बंजरिया की लघु फ़िल्म-"सच्ची सहायता शनि साधक की" में एक दिव्यांग ने आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया। नेवरी गांव में तो जैसे महिला पर पहाड़ टूट पड़ा। पूरे परिवार को आसमानी बिजली ने लील लिया। ऐसी ही एक दुखियारी की कहानी को ला रहा हूँ....शीर...


















