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करूँ अनंत साधना
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करूँ अनंत साधना

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** करूँ अनंत साधना, पवित्र संग भावना। करूँ सदैव प्रार्थना, बिना सहेज कामना। तुम्हीं धरा तुम्हीं हवा, विशाल आसमान हो। तुम्हीं यहाँ तुम्हीं वहाँ, समस्त तू जहान हो।। सदैव ग्रन्थ वाचते, सुवेद मंत्र धारते। सुशांत चित्त को रखूँ , सुधर्म को सकारते। सुकर्म नित्य ही करूँ, बचा रखा चरित्र है। न दानवी विचार है, हिया सदा पवित्र है।। कुपंथ छोड़ मैं चला, विशुद्ध ही सुकर्म है। विचार शुद्ध श्रेष्ठ है, असत्यता न धर्म है। करूँ सदा उपासना, करूँ असाध्य साधना। जपूँ दयालु राम को, पवित्र संग भावना।। प्रतीति ईश में रखूँ, प्रभुत्व स्वाभिमान में। भजूँ सदा अनंत को, रखूँ सदैव ध्यान में। अदृश्य शक्ति है यहाँ, रखे सदा प्रभाव को। करे कृपा कृपालु ही, हरे सभी अभाव को।। कृपा असीम ईश की, यदाकदा मुझे मिले। गरीब भाग्य जो...
दिव्य शक्ति तांडव
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दिव्य शक्ति तांडव

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** सत सृष्टि तांडव रचयिता, सत्यं स्वरूपं, शिव शक्तिं, कल्याणं कारणं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नाट्यराजं, महाशक्ति, पार्वती कल्याणी, शुभंकारी, महाकाली, शक्ति तांडव नमो नमः॥१॥ ज्ञानं स्वरूपा, शक्ति रूपा, प्रेमं, शांति, अमृतं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नृत्यं स्वरूपा, नृत्यं रूपा, नृत्यं, नृत्यं, नृत्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥२॥ दिव्यं स्वरूपा, दिव्यं रूपा, दिव्यं, दिव्यं, दिव्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥३॥ ॐ नमः शिवायै च शिवायै च नमो नमः। परिचय :- बाल कृष्ण मिश्रा निवासी : रोहिणी, (दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सु...
शिव-शक्ति श्रृंगार
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शिव-शक्ति श्रृंगार

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** विराजमान भाल चंद्र, गंग धार मस्तकम्, प्रिये सुअंग गौरि वाम, शोभते सुहस्तकम्। सुगंध पुष्प माल कण्ठ, मुण्ड माल राजते, अनंत प्रेम रूप देखि, कामदेव लाजिते ॥१॥ ललाट नेत्र दग्ध काम, भस्म अंग लेपनम्, उमा विलोकि मुग्ध भाव, अर्पते सुजीवनम्। मृदंग ताल डमरूअं, निनाद व्योम गुंजते, सुरेश देव दानवा, सप्रेम पाद पूजते ॥२॥ सुवर्ण वर्ण शैलजा, कपूर गौर शंकरम्, विचित्र सौम्य रूप धार, मोहते चराचरम्। सुहाग भाग माँग बीच, सेंदुरं सुसोभितं, प्रसन्न चित्त देखि भक्त, होत मोद मोहितं ॥३॥ नगाधिराज पुत्रिका समक्ष देव देवताम्, अनन्त कोटि सृष्टिदां नमामि शक्ति रूपिणीम्। जटा कलाप मध्य बाल, चंद्रिका चकाचुपं, निहारि गौरि रूप सौम्य, भूलि जात आपुपं ॥४॥ झुलात प्रेम-दोलना हिमालयं सुशृंग में, अनंत रंग घोरि-घोरि भीजतें सुअंग में। न वर्ण्यते मु...
है शारदे तार दो।
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है शारदे तार दो।

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** है विनय, आपसे, शारदे तार दो। द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।। ज्ञान हो, ध्यान हो, वेद की साधना। हम करें, नित्य ही, मातु आराधना।। तेज हो, सूर्य सा, कर कृपा हैं शरण। नंदिता, पूजिता, हैं गिरे हम चरण।। मीत हो, जीत का, आप उपहार दो। द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।। राह हम, जो चलें, सत्य का पाथ हो। द्वेष मन, में न हो, श्रेष्ठ का साथ हो।। हो हृदय, भी विमल, मातु भयहारिणी। मंत्र हो, प्रेम का, हो जगततारिणी।। कंठ पे, नाम हो, माँ अमिय धार दो। द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।। यह धरा, देश की, मातु है पावनी। ताज हो, सिर सदा, शांति की आसनी।। हम सदा, हों सफल, पूर्ण हर काम हो। ओम ही, ओम हो, माँ अमर नाम हो।। पाप का, नाश हो, हाथ तलवार दो। द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।। पाठ हम, तो पढ़े, म...
श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति
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श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्...
माँ पार्वती शक्ति तांडव स्तुति
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माँ पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** प्रचंड शक्ति रूपिणीं, नमामि देवी अंबिकाम्। जगत् जननीं जगन्मयीं, नमामि दिव्य चंद्रिकाम्॥ नृत्यति शिव सान्निध्ये, शक्ति तांडव कारिणी। दुष्ट दलन हारिणी, भक्त कष्ट निवारिणी॥ कनत कनक कंकणम्, झणत झणत नूपुरम्। रणत रणत डमरूम्, भरत सकल अम्बरम्॥ जटा मुकुट शोभितां, अर्ध चन्द्र धारिणीम्। त्रिशूल खड्ग धारिणीं, असुर गर्व हारिणीम्॥ महागौरी महाकाली, महालक्ष्मी स्वरूपिणी। सृष्टि स्थिति विनाशनी, मोक्ष मार्ग दर्शिनी॥ बाल कृष्ण मिश्रा मति, शक्ति चरणे अर्पिता। पातु मां जगदम्बिका, भक्ति भाव वर्धिता॥ परिचय :- बाल कृष्ण मिश्रा निवासी : रोहिणी, (दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विच...
प्रभु कृपा
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प्रभु कृपा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** श्रेष्ठ योनी में भेजा है प्रभु ने तुझे, नाम सुमिरन से सार्थक बनाते चलो। जग के कार्यों के संग, नाम जपते रहो, प्रभु की किरपा का नित लाभ पाते चलो। श्रेष्ठ योनी में ... है मनुजतन तुझे मुक्ति हेतू मिला, जो भी दे शीश धर, कर न कोई गिला। राम का नाम जप, मुक्ति साधन सरल, बस इसे तुम सदा गुनगुनाते चलो। श्रेष्ठ योनी में ... सृष्टि के सृजनकर्ता का बालक है तू, उसने सृष्टि रची, उसका पालक है वो। श्रेष्ठ अवसर मिला, मुक्ति पाने के मित, पग इसी मार्ग पर, नित बढ़ाते चलो। श्रेष्ठ योनी में ... भक्त हनुमानजी राम जप में रमे, करके सेवा बने, रामजी के सगे। तुझको भी मुक्ति पानी इसी जन्म,तो नाम में डूब सबको डुबाते चलो। श्रेष्ठ योनी में ... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित क...
माँ शारदा वंदन
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माँ शारदा वंदन

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हे शारदे करुणामयी माँ, भक्त को पहचान दो। श्वेतांबरा ममतामयी माँ, श्रीप्रदा हो ध्यान दो।। गूँजे मधुर वाणी जगत में, वल्लकी बजती रहे। कामायनी माँ चंद्रिका सुर, रागिनी सजती रहे।। वागीश्वरी है याचना भी, भक्त का उद्धार हो। विद्या मिले आनंद आए, प्रेम की रसधार हो।। आभार शुभदा है शरण लो, बुद्धि का वरदान दो। उल्लास दो नव आस दो प्रिय, ज्ञान की गंगा बहे। चिंतन मनन हो भारती का, लेखनी चलती रहे।। मैं छंद दोहे गीत लिख दूँ, नव सृजन भंडार हो। आकाश अनुपम गद्य का हो, प्रार्थना स्वीकार हो।। भवतारिणी तम दूर हो सब, नित नवल सम्मान हो। तुम प्रेरणा संवाहिका हो, चेतना संसार की। वासंतिका हो ज्ञान की माँ, पद्य के शृंगार की।। साहित्य में नवचेतना हो, कामना कल्याण भी। संजीवनी हिंदी सुजाता, श्रेष्ठ हो मम प्राण भी।। आलोक प्...
शिव-शक्ति संकल्प
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शिव-शक्ति संकल्प

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** शिवालयों से शंखनाद हुआ, गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन, शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन, और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव, काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें, संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो, जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता, काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग ...
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश
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सदाशिव शंकर महेश्वर महेश

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय- जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र- अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्- निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी...
चन्द्रमौलेश्वर मनमहेश
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चन्द्रमौलेश्वर मनमहेश

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चन्द्रमौलेश्वर मनमहेश, शिव ताडवं करते महेश। उमा महेश वन करते विहार, घटा टोप बादल अपार, सप्तधान शिव स्वरूप अनाज, सुन्दर मुख होल्कर महान, शेषनाग शिव मस्तक धारे, गले भुजगं अति शोभित साजे, महाकाल विकराल काल शिव, रजत पालकी बैठै मौलेश्वर, दर्शन कर भक्त हुये निहाल, जयकारा गूँजे महाकाल। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४" से सम्मानित ४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना रूचि : कविता...
बांके बिहारी
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बांके बिहारी

डॉ. राम रतन श्रीवास बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ******************** किंचित चिंतन चीते मन में प्रभु, राही को त्राहि हुए सब ग्रामा। भय क्लेश सबे दुनिया अरु, जन-जन आश तुम्ही हो श्यामा।। सीस शिखी उर-बाहु प्रलंब, कमल नैन, बंकिम दृग भौंहें। कर मुरली लकुटी धरी लाठी, ग्वाल बाल गौ सुन्दर सोंहैं।। मायापति के माया को न जाने, खरारी नित नव नाच नचावें। आन बसों "राधे" मन मंदिर, ग्वालिन यमुना तट बाट जोरावें।। राह खरो वहशी दरिंदा एक, गोपिन व्याकुल हुए परमात्मा। कहत "राधे" बांके बिहारी को नाम, त्राण मिटाओ वसुधा विश्वात्मा।। परिचय :-  डॉ. राम रतन श्रीवास निवासी : बिलासपुर (छत्तीसगढ़) साहित्य क्षेत्र : कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यिक मंच छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष सम्मान : कोरबा मितान सम्मान २०२१ (समाजिक चेतना एवं सद्भाव के क्षेत्र में) शिक्षा : हिन्दी साहित्य (स्नातकोत्तर) अतिरिक्त : रेल प...
गणेश-वंदना
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गणेश-वंदना

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हे! विघ्नविनाशक, बुद्धिप्रदायक, नीति-ज्ञान बरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। कदम-कदम पर अनाचार है, झूठों की है महफिल। आज चरम पर पापकर्म है, बढ़े निराशा प्रतिफल।। एकदंत हे ! कपिल-गजानन, अग्नि-ज्वाल बरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। मोह, लोभ में मानव भटका, भ्रम के गड्ढे गहरे। लोभी, कपटी, दम्भी हंसते हैं विवेक पर पहरे।। रिद्धि-सिद्दि तुम संग में लेकर, नवल सृजन सरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। जीवन तो अब बोझ हो गया, तुम वरदान बनाओ। नारी की होती उपेक्षा, आकर मान बढ़ाओ।। मंगलदायी, हे ! शुभकारी, अमिय आज बरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। भटक रहा मानव राहों में, गहन तिमिर का आलम। आया है पतझड़ जोरों पर, पीड़ा का है मौसम।। प्रथम पूज...
शिव की उपासना
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शिव की उपासना

अनन्तराम चौबे "अनन्त" जबलपुर (म.प्र.) ******************** शिव उपासना करूं वंदना शिव की भक्ति है आराधना। शिव शंकर भोले भंडारी से मन से करूं हमेशा प्रार्थना। शिव की भक्तिं करूं वंदना मां पार्वती हैं दुर्गा शक्ति। शिव पार्वती दोनों की है पूरे ब्रह्मांड की अद्भुत शक्ति। शिव शंकर भोले भंडारी लीला सबसे उनकी न्यारी। जगत पिता सारे जगत के महिमा भी उनकी न्यारी है। सिर की जटाओं में चंद्र विराजे गले में काले नाग की माला। शरीर में भस्म लपेटे रहते पहनते हैं बस वो मृगछाला। हाथ में त्रिशूल लटकता डमरू रूद्राक्ष की साथ में माला। बंद नेत्र तीसरा माथे पर हैं। जय जय जय शंकर भोला। पार्वती संग कैलाश विराजे शिव शंकर भोले भंडारी। शिव वंदना करूं मैं उनकी नंदी भोले जी की सवारी। कार्तिक और गणेश पुत्र हैं पुत्री उनकी अशोक सुन्दरी है। शिव और पार्वती की लीला सारे जगत से...
सवारी महाकाल की
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सवारी महाकाल की

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चली सवारी ठाठ से, महाराजा महाकाल, २१ तोपों की देते सलामी पुलिस बैंड के साथ। कहार पालकी ले चले, देखो उनके भाग्य, शिव धाम के बने अधिकारी, बाबा जिनके साथ। भोले की भक्ति में, मस्त हुए सब संत, भूत पिशाच मस्त हुए, दानव दैत्य ले संग। राजा राजसी वेष में, ठाट बाट के साथ, अगवानी करते चले, भाला त्रिशूल ले हाथ। राम सीता है बने, देखो नर और नार, दशानन भारी है बना शंकर भक्त महान। भक्त चले हैं झूमते, नाचे गाये मस्त, भक्ति में देखो डूबे, झाझ करताल ले संग। द्वारकाधीश से है मिले महाकाल महाराज, पहने माला बिल पत्र, तुलसी दल महाराज। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय सा...
धरा पर पग धरें…
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धरा पर पग धरें…

सौ. निशा बुधे झा "निशामन" जयपुर (राजस्थान) ******************** शम्भू तू, शिवशक्ति तू, धरा-व्योम की भक्ति तू। ॐ से उठे स्वर तेरा, चतुर्थ में समृति तू। ॥१॥ त्रिनेत्र में नाव जले, डमरू की ये ऊंची आवाज। संस्कृति का आधार तू, कालान्तक, शुभ भाव। ॥२॥ गंगाजल डूबे तुम, भस्म भाल पर छाय। डांस जब करे नटराज तू, एकजुट हो जाओ सब लोक घनेरे। ॥३॥ सर्प हार, कर त्रिशूल धरे, चंद्रभाल मन शांति परम। शिवरात्रि की वह रजनी, तेरे नाम से जगे सवेरे। ॥४॥ निर्गुण, फिर सगुण लगे, वैराग्य भी, अनुराग जगे। भक्ति-पथ के दीपक तू, जीवन में जो आलोक जगे। ॥५॥ परिचय :- सौ. निशा बुधे झा "निशामन" पति : श्री अमन झा पिता : श्री मधुकर दी बुधे जन्म स्थान : इंदौर जन्म तिथि : १३ मार्च १९७७ निवासी : जयपुर (राजस्थान) शिक्षा : बी. ए. इंदौर/बी. जे. मास कम्यूनिकेशन, भोपाल व्यवसाय : एनला...
पालकी बैठे महाकाल
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पालकी बैठे महाकाल

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** जटा मुकुट सिर गंग की धार, अंग भुजंग भस्मी है माथ, गले मुंड की माल। भस्मी रम्मैया बेठे नाथ, महाकाल कालों के काल, रजत पालकी बैठे महाकाल। बड़ी-बड़ी अखियां राजाधिराज, चली पालकी प्रजा के द्वार, कंचन थाल कपूर की बाती, भांग धतूरा भोग की थाल, गले मोगरा हार। चली पालकी द्वारिका के नाथ हरिहर मिलन द्वारिका के द्वार, बेलपत्र पहने गोपाल तुलसीदल महाकाल। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४" स...
विकराल काल महाकाल
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विकराल काल महाकाल

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** गंगधार अति विशाल, विकराल काल महाकाल, हिमाच्छादित पर्वत विशाल, कैलाश में है उनका वास, ॐ नाद ॐ ब्रह्म ॐकार धुन स्वर, देव दानव यक्ष किन्नर पुकारते महाकाल, महादेव-महादेव गुंजे है स्वर अपार, वही तो है महाकाल-महाकाल-महाकाल। भृकुटी है तनी विशाल, रौद्र रूप चन्द्रभाल, त्रिनेत्र है विकराल, दिगंबर वेश, मुण्डमाल, शेषनाग है विशाल, भस्म अंग त्रिशूल हाथ, वही तो है महाकाल महाकाल-महाकाल परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरो...
माँ मंगल करतीं हैं
भजन, स्तुति

माँ मंगल करतीं हैं

अंजनी कुमार चतुर्वेदी "श्रीकांत" निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ******************** आदिशक्ति अति रूप मनोहर, माँ कूष्मांडा ने पाया। दिवस चतुर्थ परम पावन है, जन-जन मन हरसाया। अष्टभुजा माँ पूजी जाती, नवदुर्गा चौथे दिन। पापी दुष्टी और निशाचर, संघारे माँ अनगिन। शेर सवारी करती हैं माँ, सबके दुख हरतीं हैं। अपने भक्तों के जीवन में, माँ मंगल करतीं हैं। है स्वरूप तेजोमय माँ का, बल आरोग्य प्रदाता। अष्टभुजी माँ का स्वरूप यह, सारे जग को भाता। रोग शोक भय कष्ट मिटाती, धन संपन्न बनाती। माँ के चरणों में नत होकर, दुनिया खैर मनाती। काजल चूड़ी बिंदी पायल, माँ को सभी चढ़ाएं। कंघी दर्पण देकर माँ को, सुख सौभाग्य बढ़ाएं। मालपुआ अति प्रिय माता को, हलवा भी चढ़ता है। माता की सेवा से सब का, जन धन भी बढ़ता है। आदि शक्ति कूष्मांडा माता, सृष्टि की निर्माता। जो आता है शरण तुम्हारी, ...
राम युग
भजन, स्तुति

राम युग

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** राम ही श्वास है राम ही आस है, राम ही तो है जीवन का, सार ही बस राम हे। जन्म से मृत्यु तक, जीवन के आदर्श राम, राम के चरित्र से जीवन महान है। बडो का आदेश राम, गुरू का सम्मान राम, छोटो पे दुलार राम, स्नेह ही तो राम है। निषाद के तो भाव राम, केवट के तो प्रेम राम, शबरी के आस मै बस राम ही तो श्वास है। निर्बल के बल राम, निर्धन के धन राम, शत्रु पे विजय राम, अजातशत्रु राम है। सुन्दर सुशील राम, कमलनयन देखो राम। जानकी की जान तो बस राम ही बस राम। सूर्य का सा तेज राम, किरण मै प्रकाश राम, विजय पताका देखो, सनातन के राम है। जन्मभूमि की जीत राम, अयोध्या के राजा राम, जय श्री राम के नारो मै, बस राम-राम आवाज है। संतो की तपस्या राम, भक्तो की भक्ति राम, मोदी योगी के तो साहस, दृढ़ संकल्प राम है। पर...
राम शरण में चल रे मनवा
भजन, स्तुति

राम शरण में चल रे मनवा

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** राम शरण में चल रे मनवा, जीवन सफल बनायें। राम शरण में सभी मंगल, मन को मत भटकाये। राम शरण में... राम शिवम् है राम सत्य है, सब देवता उनमें समाये। राम की स्तुति करने पर, संग सारे देवता पूजे। राम नाम है सब हितकारी, परम सुख बोध कराम्। महादेव भी बैठे समाधि, राम में ध्यान स्थान। राम शरण में… राम नाम अमृत की शोभा, भाग्य बिना नहीं मिलेगा। बारम्बार जन्म ले जीव, फिर धरा पर आये। राम ही दाता राम विधाता, जिसके मन ये समाये। राम की महिमा गाने वाले, घर-घर पूजे जाये। राम शरणम्… राम सनातन सच्चिदानंद, मार्ग सुगम दिखलायें। राम राज्य की परिकल्पना से, मन हर्षित हो जाये। राम कृपा उस पर हो जाये, जो भजन राम के गाये। चरण वन्दना करो भव सागर तर जाये। राम शरण में … परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म द...
धरा भी तू ही गगन भी तू
स्तुति

धरा भी तू ही गगन भी तू

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* धरा भी तू ही गगन भी तू मरुस्थल तू मधुवन भी तू सागर भी तू है ज्वार भी तू पार भी तू ही अपार भी तू आदि भी तू अंत भी तू... शक्तिमाम्....शक्तिमाम्. मान्य भी तू अमान्य भी सरल कठिन सामान्य भी अनुराग भी तू विराग भी काल तू ही विकराल भी अंत भी तू ही अनन्त भी शक्तिमाम्....शक्तिमाम्. सुधा भी तू है गरल भी तू अतीत अद्य तू कल भी तू सृजन ही तू विनाश भी तू आस भी तू विश्वास भी तू दिग भी तू दिगन्त भी.... शक्तिमाम्....शक्तिमाम्. सृजन भी तू सृष्टि भी तू अगोचर है तू दृष्टि भी तू विषपायी तू भुजंग भी तू हिमाद्री है तू अनंग भी तू गहन निशा तू प्रात भी तू स्नेह है तू है संघात भी तू पतझर भी तू बसंत भी.... शक्तिमाम्....शक्तिमाम्. परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : २० ...
अमृत बरसाओ त्रिभुवन
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अमृत बरसाओ त्रिभुवन

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बीत गई है अब सहर आ गया अंतिम प्रहर मचा है चहुँ ओर कहर नीलकंठ पधारो अब करो पान प्रभु ये ज़हर आतंक की फैली लहर धरा भी गई अब दहल ये पसर रहा है खलल अखिलेश्वर पधारो अब शांति की करो पहल बुद्धिप्रदाता तेरे गणपति रिद्धि सिद्धि हो प्राप्ति शुभ लाभ वैभव सम्पति देवाधिदेव पधारो अब हर क्षेत्र में हो क्षतिपूर्ति सरहदों पे मच रहा शोर दुश्मनों का बढ़ रहा जोर टूट गई रिश्तों की डोर हे परमेश्वर पधारो अब लाओ इक नई भोर पर्वतों के ध्वस्त आवरण नदी ताल झेले प्रदूषण त्रस्त हरीतिमा पर्यावरण शिव शंम्भू पधारो अब अमृत बरसाओ त्रिभुवन परिचय : सरला मेहता निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी ...
विष्णु, शंकर सनातन में
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विष्णु, शंकर सनातन में

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** ऋग्वेद के अथर्वशीर्ष ने, पद्म पुराण, वाल्मीकि रामायण में आदित्यहृदयस्तोत्र ने सूर्य को विष्णु माना विष्णु का अर्थ ‘सर्वव्यापी‘ सूर्य है सर्वव्यापी ऊर्जा संपूर्ण ब्रह्मांड की रवि रश्मि है दात्री उससे प्रस्फुटित होती प्रकृति प्राणवायु की दाता प्रकृति। प्रकृति के मूल में सूर्य रूप में विष्णु विराजे कण-कण पर रवि की माया सहस्त्रनाम विष्णु ने पाया स्वयंभू विष्णु देते सबको आकार लेते स्वयं मनुज रूप में अवतार करने पृथ्वी और सज्जन का उद्धार।। शंकर शमन के कारक मूल स्थान उनका पर्वत, हिम का अंचल है सुखदायक जल का स्रोत, वहीं से गंगा शीतलता औ शांतिप्रदायक हिमगिरि कोशंकर माना गिरि और जल है कल्याणक इसीलिये शंकर को शिव माना सूर्य देव को विष्णु जाना।। एक‌ परमशक्ति का यही वितान ताप व शीतलता के‌ घट विष्णु और शंकर...
महादेवा
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महादेवा

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी स्तुति) काल के महाकाल कहावय शिव शंकर महादेवा भक्तनमन के भाग जागे जेन करे तोर सेवा ।। अंग म राख, भभूत चुपरे बईला म करें सवारी भूत,प्रेत अउ मरी मसान जम्मों तोर संगवारी।I दानी नइ हे तोर असन कस हे सम्भू त्रिपुरारी कतका तोर जस ल गावँव महिमा हे बड़भारी!! गंगा हर तोर जटा म साधे, कहाय तँय जटाधारी बघुवा के तँय खाल पहिरे जय हो डमरूधारी !! गणेश अउ, कार्तिक लाल कहावय पार्वती सुवारी तोर पउँरी म माथ नवावँय जम्मो नर अउ, नारी !! असुर मन कतकोंन छलिस तोला सिधवा जान हलाहल के पान करइय्या नीलकंठ भगवान !! परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप...