धरा भी तू ही गगन भी तू
शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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धरा भी तू ही गगन भी तू
मरुस्थल तू मधुवन भी तू
सागर भी तू है ज्वार भी तू
पार भी तू ही अपार भी तू
आदि भी तू अंत भी तू...
शक्तिमाम्....शक्तिमाम्.
मान्य भी तू अमान्य भी
सरल कठिन सामान्य भी
अनुराग भी तू विराग भी
काल तू ही विकराल भी
अंत भी तू ही अनन्त भी
शक्तिमाम्....शक्तिमाम्.
सुधा भी तू है गरल भी तू
अतीत अद्य तू कल भी तू
सृजन ही तू विनाश भी तू
आस भी तू विश्वास भी तू
दिग भी तू दिगन्त भी....
शक्तिमाम्....शक्तिमाम्.
सृजन भी तू सृष्टि भी तू
अगोचर है तू दृष्टि भी तू
विषपायी तू भुजंग भी तू
हिमाद्री है तू अनंग भी तू
गहन निशा तू प्रात भी तू
स्नेह है तू है संघात भी तू
पतझर भी तू बसंत भी....
शक्तिमाम्....शक्तिमाम्.
परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० ...
















