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पद्य

कविता

जीत का परचम फहराना है

अनुराग बघेल लोरमी, मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** मंजिल चढूँ तो चढूँ कैसे?, मन में यह सवाल है। रास्ता कठिन है लेकिन, हौसला बेमिसाल है।। कदम-कदम पर काँटे बिखरे, रुकना कब स्वीकार है? राह अंधेरी, दूर किनारा, मुझमें हिम्मत अपार है।। चट्टानें भी झुक जाएँगी, जब हिम्मत की हुंकार होगी। तूफ़ान भी रास्ता बदलेगा, जब हौसलों की बौछार होगी।। माना कि यह चढ़ाई दुर्गम, साँसें भी अब फूल रहे हैं। रुक गए जो, वो मिट गए, चले जो, वो अंबर छू रहे हैं।। जितने छाले पैरों में होंगे मेरे, उतनी सुंदर जीत होगी। काली रात के ढलते ही फिर, भोर की नई शुरुआत होगी।। मेरे पैरों के छाले गवाह हैं, मैं थककर हारने वाला नहीं। मंजिल के शिखर को छुए बिना, मैं पीछे हटने वाला नहीं।। तपती भूमि, धधकती ज्वाला, राहों में मेरे अंगारे हैं। लेकिन टूटने न दूँगा सपने, जो आँखों ने सँवारे हैं।। ...
स्मित मच्छार को नमन
कविता

स्मित मच्छार को नमन

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** भारतीय पॉयलट ने सारे, यात्रियों की है जान बछाया। पूरा देश नमन करता है, उसने देश का मान बढ़ाया। हनुमत से प्रार्थना यही है, उसपर निज कृपा बरसा दो। घायल उसको किया दुष्ट ने, तुम उसको संजीवनी पिलादो। ऐसे वीर चोट खाकर भी, औरों की रक्षा करते है। नश्वर तन सबका छूटता है, ऐसे नाम अमर रहते है। परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को खोलकर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98...
संवैधानिक हुंकार
कविता

संवैधानिक हुंकार

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** संवैधानिक चाबुक को पीठ पर उनके इस तरह से फिराओ, तड़ित बिजली से कम झटका न लगे ऐसा महसूस कराओ, आये दिन करते रहते हैं बरसाती मेंढकों की तरह टर्र टर्र सूख जाए उनके आस का दरिया त्वरित उनको भान कराओ, यह देश नहीं किसी की बपौती है, हर वंचित के हक की यहां चुनौती है, जो दबाना चाहते हैं सदियों की आवाज़ को, अब बदलना होगा उस दकियानूसी समाज को, आरक्षण कोई भीख नहीं, हमारा अधिकार है, समानता की नींव पर टिका यह संसार है, जो ताक में बैठे हैं समता का गला घोंटने को, जो आतुर हैं बाबासाहेब के सपनों को रौंदने को, उन्हें बता दो कि अब युग बदल चुका है, चेतना का शंखनाद चारों ओर बज चुका है, अब चुप बैठना गुमराह होने जैसा होगा, हक के लिए न लड़ना गुनाह होने जैसा होगा, उठो और अपनी कलम को हथियार बनाओ, संविधान ...
ईश्वर की ही खोज है : किन्नर
कविता

ईश्वर की ही खोज है : किन्नर

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** स्त्री और पुरुष अल्हड़ता और पौरुष उभय पक्ष का अपभ्रंश सांसारिक नियमों से प्रताड़ित पक्ष है : ये किन्नर आवेग में आक्रोश करुणा में क्रोध मातृत्व और पितृत्व से मर्माहत संतानोत्पत्ति से असक्षम शिशु प्रेम को लालायित निसंतान इंसान होते हैं किन्नर उत्पीड़न आहत नारी मन सा हतोत्साहित असहाय पुरुष सा दिशाहीन, परिणाम रहित उन्मादित मन सा इश्रुहीन बिलखते दीन मन सा तन भी भूखा, भूखे मन सा भीषण भावों के उतार चढाव में शीत युद्ध मर्यादा से लड़ता नज़र नज़र से तिरोहित अपनी लक्ष्मण रेखा में सिमटे रहते ये किन्नर स्पंदन रहित संवेदना का मारा विधी की कृपाहीन कृपा का मारा ममता से दूर माँ का नयनतारा कब वीर्यवान पिता ने स्वीकारा किस्मत कोसता का रब का मारा ईश्वर की ही खोज है ये बेचारा स्वयं मन को समझाता स...
कारवाई
कविता

कारवाई

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** कदम दर कदम बढती गई सोचा मन्जिल पास ही होगी पर, यह मेरा भृम था । दूर, बहुत दूर कुछ आकृति दिखाई दी मेरे कदम आगे बढने के बजाय पिछे जाने लगे शायद उन्हे, किसी आधार की प्रतिक्षा थी। कुछ पदचिन्ह दिखाई दिए देखा दूर तक, कोई नही था। अकेले सफर कठिन होता है मित्रो कारवा, के साथ चलकर जिन्दगी बदल सकते है। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौ...
माँ ब्रह्मचारिणी
कविता

माँ ब्रह्मचारिणी

सुषमा शुक्ला इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** नवदुर्गा का द्वितीय स्वरूप तप, त्याग और साधना की दिव्य प्रतिमूर्ति, माँ ब्रह्मचारिणी का रूप महान, अडिग निष्ठा, असीम धैर्य से प्रकाशित, माँ देतीं भक्ति का अनुपम ज्ञान। श्वेत वस्त्र में शोभित माता, मुखमंडल पर तेज अपार, हाथों में जपमाला और कमंडल, भक्तों पर करतीं कृपा अपार। कठिन तपस्या, दृढ़ संकल्प से, जग को राह दिखाती हैं, सत्य, संयम और निष्ठा की ज्योति, अंतर्मन में जगाती हैं। जिनके चरणों में शीश नवाकर, मिट जाते मन के संताप, माँ की महिमा का स्मरण कर, जीवन में भरते पुण्य प्रताप। हे माँ! देना ऐसी शक्ति, हर संकट में धैर्य बनाएँ, आपकी कृपा से श्रद्धा के दीप, जीवन-पथ पर जगमगाएँ। परिचय :- सुषमा शुक्ला जन्म : २५ अप्रैल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्...
मेरी मां और मैं
भजन

मेरी मां और मैं

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मैया छूट जाए संसार, मगर तेरा साथ नहीं छूटे। मैं तो मांगूं यही दिन रात, हो मैया तेरा प्यार नहीं रुके।।टेक।। बचपन बीता, यौवन आया, प्रीतम के संग घर बसा लिया। मैया सिर पे रहे, तेरा हाथ, भवानी तेरा संग नहीं छूटे। मैं तो मांगूं यही दिन रात, हो मैया तेरा प्यार नहीं रूठे। बाबुल छोड़े, माता छोड़ी, मैंने छोड़ा बाबुल का कंगना मैया ना बिसरी तेरी याद, और तेरा हाथ नहीं छूटे। मैं तो मांगूं यही दिन रात, हो मैया तेरा प्यार नहीं रुके। जीवन के सफर में सब ही मिले, पापी भी मिले, धर्मी भी मिले। दुष्टों ने किया क्या हाल, हो मैया मेरा प्यार तुझे ढूंढे। मैं तो मांगूं यही दिन रात, हो मैया प्यार नहीं रुठे। कर्तव्यों की अग्नि, यूं जली, भावों की आहूती, ले ली। मुझे बना दिया रे महाकाल, हो मैया तेरी शरण नहीं छूटे...
ओ भारत के वीर जवानों
कविता

ओ भारत के वीर जवानों

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** ओ भारत के वीर जवानों ये देश तुम्हारे साथ है अब विश्व तुम्हारे साथ है ओ भारत के वीर जवानों ये देश तुम्हारे हाथ है तुमपर हमको नाज है तुम भारत की लाज हो तुम भारत की लाज हो।। तुमसे उन्नत खड़ा है हिमगिरि प्रेरित हैं गंगा की लहरी तुम भारत की तस्वीर मनोहर भारत के‌ हो वीर धरोहर तुम भारत के रक्षक प्रहरी तुम भारत के रक्षक प्रहरी।। तुम्ही बने हो देश की धड़कन तुम भारत के मान के रक्षक देश के हो सम्मान के रक्षक सशक्त भारत की आत्मा संस्कृति के तुम संरक्षक संस्कृति के तुम संरक्षक।। तुम्ही प्रताप की तलवार तुम्ही शिवा की हो ललकार रानी लक्ष्मी की संतान तात्या टोपे का अभिमान आदर्श तुम्हारा मर्यादा गीता के तुम ज्ञान हो भारत के वीर जवान हो भारत के वीर जवान हो।। नोट- मैंने स्वयं पूर्व प्रधानमंत्री श्री रा...
मधु मिलन राग
गीत

मधु मिलन राग

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** क्यों कलंकित लोग करते, हैं सदा अनुराग को। गा न पाती कोकिला है, मधु मिलन के राग को।। काँपती है हर कली भी, अब भ्रमर गुंजार से। तोड़ बंधन प्रीत के सब, झाँकते क्यों द्वार से।। कौमुदी कब तक बचेगी, दानवों के वार से। दग्ध हिय प्रतिबिम्ब तेरा, ताकता है बाग को। सुप्त फेरे प्रीत के हैं, हारती है दामिनी। ठग गया है काम तन को, है बिलखती कामिनी।। राह प्रियतम नित निहारे, प्रेम आकुल भामिनी, पूछती है केश वेणी। तन लगे इस दाग को रो रहा है देख अम्बर, टूटते विश्वास को। छल गया है चाँद छलिया, फिर मिलन की आस को।। दे रहे आवाज आँसू, जा रहे मधुमास को। नित गरल के घूँट पी कर, देखते बस झाग को।। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित...
खो रहे हैं
कविता

खो रहे हैं

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** हम एक ऐसी दुनिया मे खो गए हैं जहां मृत्यू से कोई भय नहीं है। बचपन मे खोए जवानी में खोए ऐसे खोए की मनुष्य बनना भूल गए। एक दिन यूँ ही खोए हुए हम ने एक सूखी काली पड़ी टहनी को तोड़ा उसकी पानी के प्यास की फुसफुसाहट को होठों से लगाया लगा बारिश कहीं खो गई इन फूल-पौधों को सिसकता छोड़कर। यूँ ही एकदिन हमने सजने संवरने के समान को छुआ, जीवों की उधडती चमड़ी की पीड़ा भरी चीख को महसूस किया, इस सजावट में कितने जानवरों के शरीर कट कर बलिदान हुए होंगे, इन्सानियत भी खो गई पशु-पक्षियों पर अत्याचार करते-करते। एक दिन मंदिर में ईश्वर की मूर्ति को निहारते खो गए, उनकी आंखों की नमी को महसूस किया खुद की आंखों के गीलेपन से, मानो मूर्ति बोल रही हो, तुम मेरे ही बनाए मनुष्य हो, जिसने प्रेम खो दिया, ...
आदमी का चेहरा
कविता

आदमी का चेहरा

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना करनाल (हरियाणा) ******************** आदमी का चेहरा आदमी के कई चेहरे होते हैं। एक चेहरा जो वह दुनिया को दिखाता है, एक जो अपने लोगों के सामने रखता है, और एक जिसे वह खुद से भी छिपाकर रखता है। वह मुस्कुराता है जब भीतर कुछ टूट रहा होता है, वह हाल पूछता है जब उसे सामने वाले से कुछ काम होता है। कभी-कभी उसकी चुप्पी उसके शब्दों से ज्यादा सच बोलती है। आदमी को पहचानना उसके चेहरे से आसान नहीं, उसके व्यवहार को समय के साथ देखना पड़ता है। क्योंकि चेहरा एक पल में बदल सकता है, लेकिन आदतें बहुत कुछ बता देती हैं। परिचय :-  सुरेन्द्र कल्याण बुटाना जन्म : २१ जून १९९५ निवासी : ग्राम बुटाना, जिला जिला करनाल (हरियाणा) प्रकाशित कृतियां : हिंदी कहानी पुस्तक "प्रतिज्ञा दोस्ताना (गज़ब दोस्ताना)", हरियाणवी क...
दान के दानव
कविता

दान के दानव

सूर्यपाल नामदेव "चंचल" जयपुर (राजस्थान) ******************** कच्ची उम्र की लाडो जब डोली में बैठी थी, बाबुल की आँखों में आँसू की लकीरें ऐंठी थीं। बोझ नहीं थी बेटी, फिर भी तोल दिया बाज़ार में, दहेज तुला पर रिश्ते का सौदा झूठे व्यवहार में।। माँ ने चूड़ी बेची, बापू के खेत गिरवी रखे गए, भाई की पढ़ाई छूटी, बहन के सपने बेचे गए। लक्ष्मी कहकर जो लाए, लक्ष्मी ही चाहे व्यापार में, बाराती नहीं, सौदागर ठहरे दहलीज़ और द्वार में।। वो जो कल तक गुड़िया से खेला करती आँगन में, आज ससुराल में जला करती दहेज के दामन में। ताने सुनती, गालियाँ सहती पल पल छुपी हुई आंचल में , कम लाई है सुनकर, बंधी रही रिश्तों की सांकल में।। स्टोव फट जाते रोज यहां चीखों की आवाज में, चीखें ही दब जाती है परिवार की झूठी लाज में। धाराएं लिखी बहुत हैं कानूनों की किताब में, चिताएं ही घर में जल जाती, न...
पैसा
कविता

पैसा

शशि चन्दन "निर्झर" इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** पैसा चाहिए, चाहिए पैसा, जीने को भी चाहिए पैसा। रोटी माँगे, माँगे रोटी, रोटी के संग माँगे पैसा। घर बनवाए, बनवाए घर, घर सजाने को चाहिए पैसा। सपने देखे, देखे सपने, सपनों को भी चाहिए पैसा। रिश्ते अपने, अपने रिश्ते, रिश्तों को कब चाहिए पैसा? बहुत ज़रूरी है पैसा मगर, हर चीज़ से ज़्यादा नहीं पैसा। परिचय :- इंदौर (मध्य प्रदेश) की निवासी अपने शब्दों की निर्झर बरखा करने वाली शशि चन्दन एक ग्रहणी का दायित्व निभाते हुए अपने अनछुए अनसुलझे एहसासों को अपनी लेखनी के माध्यम से स्याह रंग कोरे कागज़ पर उतारतीं हैं, जो उन्हें खुशियों के आसमानी रंग देते हैं। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को खोलकर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख...
जय मां शारदे
कविता

जय मां शारदे

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** जय मां शारदे! जय मां शारदे! करता मैं आपका आह्वान होइए मेरे कलम पर विराजमान हैं हम मां! तेरी संतान मां! अपने चरणों में दे दो स्थान करता मैं तेरा अर्चन मां! ला दो परिवर्तन मां! दमका दो मेरा जीवन मां! ले लो मेरा रक्तकण मां! झंकृत कर दो मेरे हृदय के तार मां! ज्ञान का कर दो मेरे हृदय में संचार मां! करो स्वीकार मेरा बलिदान मां! तरस रहा तेरे कृपा हेतु हिंदुस्तान मां! भर दो ज्ञान सागर से अपने प्यार के सागर से मेरी रिक्त गगरी मेरी रिक्त नगरी मां! काट दो अज्ञानता के बंधन सारे मां! दे दो दर्शन, खड़ा मैं तेरे द्वारे। परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर...
रात्रि की हनुमतकृपा
भजन

रात्रि की हनुमतकृपा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** राम नाम है पावन गंगा, डुबकी नित्य लगाओ। राम नाम पतवार पकड़ कर, भव सागर तर जाओ। जिसने राम नाम को पकड़ा, उसने ली अंगड़ाई, शबरी, गीध, अजामिल , सबने इससे मुक्ति पाई। प्रेम राम सेवा में लगकर, हनुमतदास कहाओ। राम नाम है... राम नाम में डूबे हनुमत, मां का पता लगाए। राम नाम सांसो में बसाकर, राम भक्त कहलाये। हनुमत पद चिह्नों पर चलकर, हनुमत ही बन जाओ। राम नाम है... राम नाम मदिरालय आकर, डुबकी नित्य लगाओ। इतने जम पियो अमृत के, दीवाने हो जाओ। राम नाम है ... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को खोलकर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच...
अभी उड़ान बाकी है
कविता

अभी उड़ान बाकी है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जितना रोकना था रोक चुके, जितना टोकना था टोक चुके, अभी बनाना पहचान बाकी है, बिटिया की लंबी उड़ान बाकी है। देवी, देवता, आस्था, संस्कार, थामे हुए थी आपकी संसार, मान्यता, धागा, डोरी, पाखंड, करते रहे हो उन्हें खंड-खंड, कितनी उड़ेगी देखना एक दिन पाने को पूरा आसमान बाकी है। झाड़ू-पोछा, बर्तन, चूल्हा-चौका, हर स्तर पर टोका न दे मौका, देहरी से किंचित क्या निकला कदम, कुत्ते चुप रहे हर बार तूने भौका, टूटेगी जिस दिन तेरा उच्चता भाव, गिरेगा भरभराकर तमतमाता ताव, दुनिया के हर ग्रंथों का होगा चीरफाड़ होना स्त्री का पूरा आख्यान बाकी है। जब तक न दोगे पूर्ण रूप से तवज्जो उनके नजरिये से संपूर्ण समाधान बाकी है। जितना रोकना था रोक चुके, जितना टोकना था टोक चुके, अभी बनाना पहचान बाकी है, बिटिया की लंबी उड़ान बाकी है। ...
नारद मोह
दोहा

नारद मोह

हंसराज गुप्ता जयपुर (राजस्थान) ******************** *दोहा* नारद के मन में जगा, गर्व जनित अज्ञान। माया रची श्रीनाथ ने, हरने को अभिमान।। मदन मथि मद मत्त मुनि, मानी मन महारा। सिव की सीख बिसारि कै, बढ़े बैकुंठ बिराज।। *सवैया* भक्त, भयंकर-भाव भरे मन, भगवन को निज भेद सुनावैं। काम कठिन करि कामुक कौतुक, किंचित कलेस न कोउ करावैं। मन ही मन मुसकाय मुरारी, मूरख मुनि को मान मिटावैं। मारग माँय महामाया से, मोहमयी नगरी महकावैं।। *दोहा* शीलनिधि की बाला सुंदर, बिस्वमोहिनी नाम। रेख निरखि रमणी रतन, मुनि मन उपजा काम।। *सवैया (पहला भाग)* देखत रूपहि नारद मोहित, सुंदर मोहक छवि अति न्यारी। रमणी रमण, रूप रस राते, नैनानंदिनी नारि निहारी। धाम धरापति धाय धरे पग, देहु दयामय मोहि मुरारी। मांगत रूपहि श्रीहरि सों मुनि, देव-छवि रवि सों अति भारी।। *सवैया (दूसरा भाग)* जैसो जगत्पति ...
स्वदेश प्यार
कविता

स्वदेश प्यार

सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज' बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** कहां है स्वदेश प्यार? कहां है मानव प्यार? कहां हैं अमर क्रांतिकारी? कहां है मानव सेवा की क्यारी? कहां की धरती जग में न्यारी? कहां की धरती जग में प्यारी? कहां हैं पावन सीता सी नारी? कहां है धर्म ज्ञान की पिटारी? कहां है वीरों की फुलवारी? कहां वेद की ऋचाएं नित गूंजती हैं? कहां दुनिया पेड़ पौधों को पूजती है? कहां गो पालन एक बड़ा व्रत है? कहां हो रहा विकास अनवरत है? कहां हैं शिवा, प्रताप और छत्रसाल? किसका हृदय है समंदर सा विशाल? किसके हृदय में आता विश्व प्रेम का उछाल? कहां हैं हमारे धर्म पाल? कहां है उन्नत भाल? कहां है बल अपरंपार? कहां गूंजता सदा मंत्रोच्चार? कहां गूंजता शक्ति का जय-जयकार? कहां अटल संकल्प संबल है? कहां वेद, पुराण का बल है? कहां गूंजते गीता के अमर स...
राखी का त्यौहार
कविता

राखी का त्यौहार

गगन खरे क्षितिज कोदरिया मंहू (मध्य प्रदेश) ******************** राखी खुशियाँ और भाई बहन का मिठास भरा त्योहार होता है, प्रेम प्यार की मिसाल होता है। पवित्र रिश्ता भारत की पहचान है। जीवन रेखा बहन गगन दो परिवारों की। परिचय :- गगन खरे क्षितिज निवासी : कोदरिया मंहू इन्दौर मध्य प्रदेश उम्र : ६६वर्ष शिक्षा : हायर सेकंडरी मध्य प्रदेश आर्ट से सम्प्रति : नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण भोपाल मध्यप्रदेश सेवानिवृत्त २०१४ साहित्य में कदम : २०१४ से भारतीय साहित्य परिषद मंहू, मध्य प्रदेश लेखक संघ मंहू इकाई, महफ़िल ए साहित्य कोदरिया मंहू, आर्चना साहित्य संस्थान मंहू, राष्ट्रीय संखी साहित्य परिवार, छत्तीसगढ़ सखी साहित्य परिवार, म. प्र. संखी साहित्य परिवार, राष्ट्रिय हिंदी रक्षक मंच आदि समूह से समय पर जुड़े है। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेर...
बेटी
कविता

बेटी

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** एक माँ का दिल ही बता सकता है की बेटी के जन्म की खुशी और बेटी दिवस का महत्व क्या है। बेटी उनके लिये- एक विश्वास है एक संबल है एक साहस है, बेटी हर पल का एहसास है बेटी माँ बाप की परछाई है, बेटी पिता का आत्मविश्वास है मनोबल है, बेटी चिन्ता को चिन्तन मे परिवर्तन का नाम है, बेटी कठिन डगर मे एक पथ है पथिक है बेटी-बेटी ही है, बेटी दिखावा नही दृढ़ संकल्प है, बेटी माँ बाप के लिये समर्पित ईश्वर का एक उपहार है। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय ...
आग जब फैलती है
कविता

आग जब फैलती है

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आग जब फैलती है तो सब कुछ स्वाहा कर ही देती है। यदि समय पर बुझाया ना गया तो फिर कुछ ‌नहीं बचता है। मैं जिस आग को फैलते देख रही हूं, उसकी बात करती हूं। लव-जिहाद, समाज में है। संस्कृति को मिटाने का जिहाद। परिवार नियोजन नाम का जिहाद। नशीली वस्तुओं का जिहाद हर शहर, हर गांव में, शराब की बढ़ती दुकानों का जिहाद। शारीरिक शोषण का जिहाद। धर्म स्थलों को भ्रष्ट करने का जिहाद। धर्म परिवर्तन करवाने का जिहाद। शिक्षा प्रणाली में समाया हुआ गलत इतिहास का जिहाद। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते जाने का जिहाद। रोजगार और अर्थ प्रणाली का जिहाद। और भी कई धीमे-धीमे जहर वाले जिहाद चल रहे हैं। हमारी नाक के नीचे, हम चारों ओर से जिहाद की आग से घिरते जा रहे हैं। यह हादसे भी उसी का, एक रुप हैं। ईश्वर का कोप‌ ...
अनजान मन्जिल
कविता

अनजान मन्जिल

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** जिन्दगी ढलान सी ढलती जा रही है लुढकती जा रही है धीरे-धीरे अंन्जानी मन्जिल की ओर ऐसी मन्जिल की ओर जिसका न मुझे पता है न जलती जिन्दगी को। बस चलती है, कुछ देश कुछ अनदेखा कर कहीं मन मसोसकर कही प्यासी, उदास, उद्विग्न, निराश जिन्दगी चल रही है सिर्फ ढलान के लिए हां, सिर्फ ढलान के लिए... परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा ...
सच्चा भारत
कविता

सच्चा भारत

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** दलित, पिछड़े और सवर्ण हम सबको पास बुलाते हैं, हैं सभी नागरिक इस देश के, सबको गले लगाते हैं, इंसानियत ही धर्म है अपना, पीड़ा महसूसना मर्म है अपना, ईद, दीवाली और क्रिसमस मिलकर हम मनाते हैं, कर देते हैं सबको ताकीद, हक़ और अधिकार से सब हों वाकिफ़, छल-कपट कर लोगों को हरिजन नहीं बनाते हैं, तोड़ कुरीति की जंजीरें, हम नया दौर अब लाएंगे, जात-पात के ठेकेदारों को आईना रोज दिखलाएंगे, संविधान की शपथ उठाकर, हर आंचल को खुशहाल करें, मजहब से ऊपर उठकर हम, इंसान गले से लगाएंगे, नफरत की जो आंधी उठी, उसे मोहब्बत से मोड़ेंगे, टूटे हुए जो दिल हैं उनको, भाईचारे से जोड़ेंगे, अनेकता में एकता ही, इस पावन धरा की शक्ति है, तिरंगे की इस शान की खातिर, खुद का सर्वस्व निचोड़ेंगे। परिचय :-  राजेन्द्र ल...
स्पर्श एक अद्भुत शक्ति
कविता

स्पर्श एक अद्भुत शक्ति

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** स्पर्श में है एक अदृश्य और एक अजीब शक्ति यह मन के बाहरी व भीतरी सतह की महाशक्ति।। स्पर्श की अनुभूति ओतप्रोत स्वतः अनुभव होती, यह तापमान, शीतलता की भाषा, स्पर्श से कहती।। शरीर में क्रिया खुद पे खुद स्पर्श से अहसास कराती, मौसम के अनुकूल मन शरीर में स्पर्श से स्वयं कराती।। कहींकंपन का, कहीं धड़कन का, कही हिलनेडुलने की, कहीं आनंद का कहीं उदासीनता मन को स्पर्श है करती।। वातावरण का रुख कितना, स्वच्छ है या दुगन्धमय वातावरण के जरिये यह मुक्त कंठ में मौन कहती।। स्पर्श में अद्भुतशक्ति सारी, होती खुशबू स्पर्श में प्यारी स्पर्श की क्या करे बराबरी, स्पर्श बताता हल्का या भारी।। खट्टा मीठा खारा जीभ में स्पर्श से खुलासा होता सारा ज्ञान अज्ञान की गुणकारी बातें, स्पर्श करती मन मे सारी।। कभी किसी के कड़वे बोल कड़वी बा...
कमाल हो जाएगा (घनाक्षरी)
धनाक्षरी

कमाल हो जाएगा (घनाक्षरी)

डॉ. विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** यदि याद पाठ शाला, पाला किए बुजुर्ग से, अवसर चूको नहीं, वक्त चला जाएगा। जवाब हर बात या, भूल की अवहेलना, तर्क अज्ञान वश तो, विद्वता ना पाएगा। घर परिवार देश, समाज क्रम घटित, जानी अनजानी कभी, रोक कैसे पाएगा। समझकर संवाद को, सभा समूह विवाद, मुंह अपना खोलिये, वाह ही करायेगा। युग जो बदल गया, मौन भाषा भूल गया, बोले बिना चैन गया, आदत बनाएगा। नजर तो घुमाइये, शहर से गांव तक, मुख्य शीर्ष बैठकें तो, सुनना सिखाएगा। विवाद के महारथी, बिना सुने बन गए, झूठ ज्ञान गढ़ गए, तो जीत क्या पाएगा। वक्ता पहचान यही, तथ्य बोध कला सही, प्रभाव सामने सही, नाम ही कमाएगा। पड़ोस परिवार में, बोलकर भाषा कटु, खड़े स्वाभिमान लिए, टपक ही जायेगा। छपना है अच्छा बुरा, छपास बना आसरा, बिखरा जो यही रोग, राह क्या दिखाएगा। चूकना नहीं...