Tuesday, April 14राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

करूँ अनंत साधना

नरेंद्र सिंह
मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार)

********************

करूँ अनंत साधना, पवित्र संग भावना।
करूँ सदैव प्रार्थना, बिना सहेज कामना।
तुम्हीं धरा तुम्हीं हवा, विशाल आसमान हो।
तुम्हीं यहाँ तुम्हीं वहाँ, समस्त तू जहान हो।।

सदैव ग्रन्थ वाचते, सुवेद मंत्र धारते।
सुशांत चित्त को रखूँ , सुधर्म को सकारते।
सुकर्म नित्य ही करूँ, बचा रखा चरित्र है।
न दानवी विचार है, हिया सदा पवित्र है।।

कुपंथ छोड़ मैं चला, विशुद्ध ही सुकर्म है।
विचार शुद्ध श्रेष्ठ है, असत्यता न धर्म है।
करूँ सदा उपासना, करूँ असाध्य साधना।
जपूँ दयालु राम को, पवित्र संग भावना।।

प्रतीति ईश में रखूँ, प्रभुत्व स्वाभिमान में।
भजूँ सदा अनंत को, रखूँ सदैव ध्यान में।
अदृश्य शक्ति है यहाँ, रखे सदा प्रभाव को।
करे कृपा कृपालु ही, हरे सभी अभाव को।।

कृपा असीम ईश की, यदाकदा मुझे मिले।
गरीब भाग्य जो अभी, प्रसून तो कभी खिले।
रहूँ प्रसन्न भक्त मैं, यही असीस दीजिए।
हुआ कभी कसूर तो, तुरंत माफ कीजिए।।

कृपा प्रसाद दें मुझे, करूँ न कष्ट सामना।
रखें सहेज गात को, यही अनंत कामना।
करें विकास बुद्धि का, रुके न नित्य साधना।
हरें समस्त दुष्टता, मिटे असत्य भावना।।

न तामसी विचार हो, न शत्रुता न द्वेष हो।
रहे न बैर भाव भी, नहीं दुराव शेष हो।
मिटे समग्र दोष भी, कराल का स्वभाव भी।
नहीं रहे घमंड भी, न अन्य छाव ताव भी।।

परिचय :-  नरेंद्र सिंह
निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *