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Tag: नरेंद्र सिंह

लोहा ले लो शत्रु से …
दोहा

लोहा ले लो शत्रु से …

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** (भ्रमर दोहे) लोहा ले लो शत्रु से, जागो मेरे मीत। होगी तेरी जीत ही, त्यागो सारे भीत। त्यागो जिद्दी चाल को, मानो मेरी बात। छोड़ो सारी दुष्टता, देती जो आघात।। खाना खाओ शुद्ध ही, जो हो शाकाहार। हत्या जीवों की रुके, छोड़ो अत्याचार।। जीना सीखो शान से, गंदा धंधा छोड़। बेईमानी त्याग दो, नेकी से हो होड़।। आओ मेरे पास तू, सीखो प्रज्ञा गूढ़। दूँगा ऐसा ज्ञान मैं, मानो रे हे मूढ़।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक (पी.एन.बी.) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 र...
अतरी की वादियाँ
कविता

अतरी की वादियाँ

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** आकर देखिए जरूर यहाँ , मोहक अत्री की वादियाँ। लें खुशबू सोंधी मिट्टी की, अवलोकन करें ये घाटियाँ।। यहीं तपोवन की पुण्यभूमि , गर्म कुंड झरना पहाड़ियाँ। प्रकृति अति सुहानी लगती है , छोटी झुरमुट लताएँ-झाड़ियाँ।। जेठियन घाटी लगे अद्भुत, यहाँ दृश्य मनोरम झाँकियाँ। आकर देखें गहलौर घाटी, दशरथ की जुनूनी कहानियाँ।। शान यहाँ किसानों की है, खेतों की टेढ़ी-मेढ़ी आरियाँ। आकर निहारें अद्भुत छटा को छोटी-बड़ी यहाँ की क्यारियाँ।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक (पी.एन.बी.) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स...
राम वनगमन (आल्हा/वीर छंद)
छंद

राम वनगमन (आल्हा/वीर छंद)

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** (आल्हा/वीर छंद) राम संग भी लक्ष्मण सीता, वन में जाने को तैयार। कौशल में सब लगे विलखने, छाती मुक्का दे-दे मार।। कैसे अब तो राज चलेगा, बुरा नगर का होगा हाल। यही सोचकर जनता प्यारी, रो-रो कर हो रही निढाल।। उधर महल में राजा दशरथ, हाय राम कर रहे पुकार। अंतिम साँसे गिन-गिन राजा, भोग रहे थे कष्ट अपार।। जीव-जंन्तु भी चौंक रहे थे, झेल रहे सदमे की मार। कोहराम सर्वत्र मचा था, सबके नयन बहाये धार।। इक कैकेई का मुखमंडल, चमक रहा था मानो खास। कुल कलंकिनी चहक रही थी, मानो उसके उर उल्लास ।। मना रही थी जल्दी वह तो, राम चले जाए वनवास। राज तिलक हो शीघ्र भरत का, कोई बाधा रहे न पास।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक (प...
बिसुआ
चौपाई, छंद

बिसुआ

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** आज पर्व है सत्तूयानी। इसे पवित तिथि कहते ज्ञानी।। आज जगे जो रवि से आगे। किस्मत तुरंत उसकी जागे।। नमन करो पहले धरनी का। लेना असीस पितु-जननी का।। नित्य क्रिया से निवृत्त होकर। करो स्नान सारे तन धोकर।। तब जपना प्रभु को हे प्राणी। मंत्र पढ़ो निकले मृदु वाणी।। दान-पुण्य करना सब भाई। जीवन की ये असली कमाई।। फिर सत्तू का भोग लगाना। बिसुआ का ये पर्व मनाना।। घी-शक्कर संग दूध सानो। आम टिकोला को शुभ मानो।। बिसुआ जो भी लोग मनाता। पाप-पुंज जो हो कट जाता।। ग्रह गोचर उसके मिट जाते। आज मनुज जो सत्तू खाते।। लगन आज से उत्तम जानो। शादी का शुभ मुहूर्त मानो।। लगी गूँजने अब शहनाई। अशुभ मास की हुई विदाई।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिव...
करूँ अनंत साधना
स्तुति

करूँ अनंत साधना

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** करूँ अनंत साधना, पवित्र संग भावना। करूँ सदैव प्रार्थना, बिना सहेज कामना। तुम्हीं धरा तुम्हीं हवा, विशाल आसमान हो। तुम्हीं यहाँ तुम्हीं वहाँ, समस्त तू जहान हो।। सदैव ग्रन्थ वाचते, सुवेद मंत्र धारते। सुशांत चित्त को रखूँ , सुधर्म को सकारते। सुकर्म नित्य ही करूँ, बचा रखा चरित्र है। न दानवी विचार है, हिया सदा पवित्र है।। कुपंथ छोड़ मैं चला, विशुद्ध ही सुकर्म है। विचार शुद्ध श्रेष्ठ है, असत्यता न धर्म है। करूँ सदा उपासना, करूँ असाध्य साधना। जपूँ दयालु राम को, पवित्र संग भावना।। प्रतीति ईश में रखूँ, प्रभुत्व स्वाभिमान में। भजूँ सदा अनंत को, रखूँ सदैव ध्यान में। अदृश्य शक्ति है यहाँ, रखे सदा प्रभाव को। करे कृपा कृपालु ही, हरे सभी अभाव को।। कृपा असीम ईश की, यदाकदा मुझे मिले। गरीब भाग्य जो...