
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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रिश्तों में संवाद का दीप जब धीमे-धीमे बुझ जाता है,
तब साथ रहते हुए भी मन का आँगन सूना रह जाता है।
अहंकार की ऊँची दीवारें दिलों के बीच खड़ी हो जाती हैं,
“मैं” की जिद में “हम” की डोर अक्सर टूट सी जाती है।
विश्वास की नींव हिलते ही घरौंदा बिखरने लगता है,
शंका का एक बीज भी जीवन को ज़हर करने लगता है।
समय की कमी और व्यस्तता रिश्तों को दूर कर देती है,
पास रहकर भी दूरी, जीवन को मजबूर कर देती है।
अपेक्षाओं का बोझ जब हद से ज्यादा बढ़ जाता है,
तब प्रेम का कोमल पौधा भी मुरझा सा जाता है।
धैर्य और सहनशीलता आज कम होती जा रही है,
छोटी-छोटी बातों पर भी डोर टूटती जा रही है।
(उपाय)
यदि संवाद का दीप फिर से दोनों मिलकर जलाएं,
तो बिखरे हुए रिश्ते भी मुस्कुराकर फिर जुड़ जाएं।
(उपाय)
अहंकार को त्याग कर यदि प्रेम को स्थान दिया जाए,
तो हर टूटा हुआ रिश्ता भी फिर से सम्मान पा जाए।
(उपाय)
विश्वास और धैर्य से रिश्तों को सींचते रहना चाहिए,
हर कठिन मोड़ पर साथी का हाथ थामे रहना चाहिए।
(उपाय)
तलाक अंत नहीं, यह एक चेतावनी का संकेत है,
प्रेम, समझ और समर्पण ही रिश्तों की सच्ची रीत है।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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