अंजनीसुत कुलदेव हमारे
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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कुलदेव हमारे अंजनीसुत, संकट हरने वाले,
भक्ति-दीप से सजे थाल में प्रेम-सुमन हम ढाले।
घी-गुड़, चूरमा, लड्डू लेकर भावों का श्रृंगार,
अर्पित करते चरणों में हम, मिटे सकल संताप अपार।
भोग नहीं बस अन्न मात्र, यह श्रद्धा का उजियारा,
हर कण में बसता विश्वास, हर कण में है सहारा।
रुई-सी कोमल भावना से सजी हुई हर थाली,
जैसे मन की सरल प्रार्थना पहुँचे उनकी ड्योढ़ी प्यारी।
बजरंगबली के चरणों में जब अर्पित हो अन्न,
तब मिट जाते दुःख सभी, हो जाता जीवन धन्य।
सिंदूर सजा, चोला दमके, गूंजे जय-जयकार,
भोग के संग झूम उठे मन, हो जाए मंगलाचार।
कुलदेव की कृपा से ही तो घर में सुख का वास,
उनकी छाया में कटता है जीवन का हर त्रास।
एक लड्डू में छिपा हुआ आशीषों का सागर,
जो ग्रहण करे श्रद्धा से, हो जाए भव से पार।
हे पवनसुत, स्वीकार करो यह प्र...

