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हिंदी आत्मा में बस्ती

सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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हिंदी आत्मा में बस्ती है,
संस्कारों की उजली हस्ती है।
माँ की लोरी, पिता का विश्वास,
मिट्टी की सोंधी खुशबू-सी पास
हर धड़कन में इसकी मस्ती है।

यह भाषा केवल शब्द नहीं,
यह भावों की निर्मल सरिता है।
आँसू बनकर भी चुपके बहती,
मुस्कान बन ओठों पर ठहरती
हिंदी जीवन की स्वर गीत है।

तुलसी की चौपाइयों में धर्म,
मीरा के पदों में प्रेम पुकारे।
रसखान की भक्ति में डूबी हुई,
कबीर की वाणी में सत्य जली
हिंदी युग-युग तक पथ रहे भली।

यह खेतों की हरियाली बोले,
यह श्रमिक के पसीने की गंध।
यह पर्वों की थाली सजाए,
यह त्याग, तपस्या का संदेश
जन-जन की आशा की है कंध।

जब तक आत्मा में प्राण बसे,
हिंदी का दीप जलता रहेगा।
समय बदले, दुनिया बदले,
पर संस्कृति का यह अमिट स्वर
हृदय-हृदय में पलता रहेगा।

परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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