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भारतीयों की शान हैं हिंदी

प्रिया पाण्डेय
हूघली (पश्चिम बंगाल)

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विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना

भारत का सार हैं हिंदी,
हिमालय की मस्तक
पर विराजमान हैं हिंदी,
कण-कण में बसते हैं जिसके,
हम भारतीयों की शान हैं हिंदी,
लड़ी, खड़ी और
जग में नाम किया,
उस भाषा का नाम हैं हिंदी,
मीरा के पद में,
कबीर के दोहे में,
प्रेमचंद की कहानियों
में छुपी हैं हिंदी,
जशंकर प्रसाद के
“आंसू”बन बही हिंदी,
तो नागार्जुन की
“अकाल और उसके
बाद की व्यथा सुनाती हिंदी,”
शोषित हुई पर खड़ी रही,
अंग्रेजी ने कितना दबाया,
पर उड़ती रही आसमानों में,
तुलसीदास का
रामचरित मानस हैं हिंदी।

परिचय :- प्रिया पाण्डेय
जन्मतिथि- २२/१०/१९९९
शिक्षा- बी.ए तृतीय वर्ष (राजनीती शास्त्र )
स्थान- ९२, चरकतल्ला, पोस्ट -माखला, जिला- हूघली (पश्चिम बंगाल )
कार्य- शिक्षिका
साहित्य प्रमाण- जज़्बात दिल की आवाज से ३प्रमाण पत्र, साहित्य रत्न की तरफ से प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय कवियत्री की तरफ से प्रमाण पत्र, कई मंच पर मेरी कविताएं प्रकाशित है,
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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