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भारतीयों की शान हैं हिंदी
कविता

भारतीयों की शान हैं हिंदी

प्रिया पाण्डेय हूघली (पश्चिम बंगाल) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना भारत का सार हैं हिंदी, हिमालय की मस्तक पर विराजमान हैं हिंदी, कण-कण में बसते हैं जिसके, हम भारतीयों की शान हैं हिंदी, लड़ी, खड़ी और जग में नाम किया, उस भाषा का नाम हैं हिंदी, मीरा के पद में, कबीर के दोहे में, प्रेमचंद की कहानियों में छुपी हैं हिंदी, जशंकर प्रसाद के "आंसू"बन बही हिंदी, तो नागार्जुन की "अकाल और उसके बाद की व्यथा सुनाती हिंदी," शोषित हुई पर खड़ी रही, अंग्रेजी ने कितना दबाया, पर उड़ती रही आसमानों में, तुलसीदास का रामचरित मानस हैं हिंदी। परिचय :- प्रिया पाण्डेय जन्मतिथि- २२/१०/१९९९ शिक्षा- बी.ए तृतीय वर्ष (राजनीती शास्त्र ) स्थान- ९२, चरकतल्ला, पोस्ट -माखला, जिला- हूघली (पश्चिम बंगाल ) कार्य- शिक्षिका साहित्य...
बाल विवाह
कविता

बाल विवाह

प्रिया पाण्डेय हूघली (पश्चिम बंगाल) ******************** मैंने देखा है कम उम्र की, शादी-शुदा लड़कियों को, सपने सारे टूटे, झूठी मुस्कुराहट की लदी तस्वीरें, अपनों से खुद को छुपाती हुई.... ससुराल मे हर किसी की ख्वाहिश पूरी करती सबका पूरा ध्यान रखती, रिश्तो के डोर मे फंसी, जिम्मेदारीयों के बोझ तले दबी हुई.... थोपे गये समाज के गलत फैसलों से, बंधनो के बेड़ियों से बाहर निकलकर, कुछ पल अपने लिए, जीना चाहती है.... अपनी ख्वाईशो को किसी का साथ पाकर पूरा करना चाहती है, किसी अपने से लिपटकर जी भर कर रोना चाहती है, चाहती है वो अपने दबे सपनो को फिर से पूरा करना, एक सच्चा दोस्त जो प्रेमी से कम ना हो, हर तकलीफ और दर्द मे उसका साझेदार हो, मुश्किलों मे उसका सहारा बने और, अकेलेपन मे उसकी होंठो की मुस्कान, फिर.... लांछन का डर, समाज की बेड़िया, उसके बढ़ते हुए कदम, और उसके हर सपने को रोक ...