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है हिंदी हमारी पहचान

सत्येन्द्र कुमार सिंह ‘सहज’
बलिया (उत्तरप्रदेश)

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है हिंदी हमारी शान
है हिंदी हमारी पहचान
हैं हिंदी में, दिनकर,
मैथिली शरण और रसखान
है हिंदी के पट्ट पर, पंत,
प्रसाद, निराला का निशान
है हिंदी के पट्ट पर, कबीर,
तुलसी, महादेवी का निशान
है हिंदी में सुभद्रा कुमारी चौहान
हैं हिंदी में ‘सहज’ के मधुमय गान
हिंदी से करेंगे हम नव निर्माण
है हिंदी से हिंदुस्तान का सम्मान
है हिंदी जन जन की भाषा
है हिंदी हमारे मन की भाषा
है हिंदी हमारे नील गगन की भाषा
हैं हमारी सारी भाषाएं पल्लवित पुष्प,
हजारों पुष्पों से बनी यह माला है
है हिंदी हमारे भारत मां का मुकुट
हिंदी ने हम सबको संभाला है
है हिंदी हमारी विशाल समंदर
समाती सारी नदियां इसके अंदर
बोलूंगा हिंदी, लिखूंगा हिंदी
सीखूंगा हिंदी,सिखाऊंगा हिंदी
है हिंदी हमारे अंदर
है हिंदी हमारी अवनी और अंबर।

परिचय :-  सत्येन्द्र कुमार सिंह ‘सहज’
निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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