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हिंदी का गुरुत्व सम्मान

डॉ. विजय गुप्ता “मुन्ना”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना।
मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना।

रस्साकसी के खेल जैसे राज्य भाषा हिंदी फसी पड़ी है।
संस्कारित संस्कृत से उदित हिंदी भाषा महिमा बड़ी है।
तुलसी भारतेंदु रचित संसार में हिंदी कोहिनूर जड़ी है।
राष्ट्र आन बान शान जन गण मन वंदे मातरम गा लेना।
हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना।
मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना।

कुरीति दोहन शोषण की रचनाएं सर चढ़कर जो बोली।
साहित्य कला कौशल से अन्याय जगत की डगर डोली।
देश प्रेम के गीतों नारों ने गुलामी पटकथा गठान खोली।
नवोदित सृजन लेखन में हिंदी संकल्प शक्ति जड़ लेना।
हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना।
मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना।

हिंदी दिवस शुद्ध हिंदी प्रेम की सोचो कठिन परीक्षा है।
एक दिन का हिंदी अनुराग मात्र क्या उचित समीक्षा है।
राज्य भाषा हिंदी अब जेन जी छात्रों को देती दीक्षा है।
संस्कार गर्व अलंकृत हिंदी का गुरुत्व सम्मान रख लेना।
हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना।
मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना।

अब छोटी बड़ी हर घटना छात्रों की पहुंच से दूर नहीं हैं।
क से कमल ज्ञ से ज्ञान की यात्रा सहज संभाव्य सही है।
लेखन में भाव अर्थ संवाद कला शैली का खाता बही है।
पर्यायवाची विलोम शब्द मुहावरे सागर मोती चुन लेना।
हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना।
मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना।

नव पीढ़ी में गद्य पद्य लेखन शौक जागरण करना होगा।
वरिष्ठ कवियों लेखक को शाला में अलख जगाना होगा।
हिंदी भाषा मर्म धर्म से कला कौशल स्पर्धा सजना होगा।
औपचारिक भाषा कदम त्याग राष्ट्रीय हक से भज लेना।
हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना।
मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना।

परिचय :- डॉ. विजय कुमार गुप्ता “मुन्ना”
जन्म : १२ मई १९५६
निवासी : दुर्ग छत्तीसगढ़

उद्योगपति : १९७८ से विजय इंडस्ट्रीज दुर्ग
साहित्य रुचि : १९९७ से काव्य लेखन, तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल जी द्वारा प्रशंसा पत्र
काव्य संग्रह प्रकाशन : १ करवट लेता समय २०१६ में, २ वक़्त दरकता है २०१८
राष्ट्रीय प्रशिक्षक : (व्यक्तित्व विकास) अंतराष्ट्रीय जेसीस १९९६ से
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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