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Tag: डॉ. विजय गुप्ता “मुन्ना”

खामोशी पढ़ लेता है
कविता

खामोशी पढ़ लेता है

डॉ. विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** चादर से बाहर पैर जाहिर चलन अब खास हो गया, मगर सटीक ज्ञानवान बोली मितभाषी गढ़ लेता है। शिखर पहुंचने के निज तरीकों में सभी होते माहिर, बचपन से पचपन सफर तक प्रियभाषी बढ़ लेता है। चुनौती संघर्ष मेहनत औजार से सुंदर बुत बना लिए, बेहतर मनुज बनने खुद में ही नक्काशी मढ़ लेता है। कथन श्रवण दर्शन सतत रवायत बने बैठे सबूतों के, नेपथ्य इंसा गुमान देखिये जो खामोशी पढ़ लेता है। होशोहवास में अच्छे बुरे काम का अंजाम है जिंदगी, अनमोल किरदार वो जब छाई बेहोशी लड़ लेता है। कामयाबी का पद पदक पदवी देखता है सारा जहां, बेहद सुखद मंजर जब महज शाबासी चढ़ लेता है। चुनाव में हर चेहरा मोहरा भी खास अहमियत रखे, बदमाशी ऐयाशी फितरत संग प्रत्याशी लड़ लेता है। परिचय :- डॉ. विजय कुमार गुप्ता "मुन्ना" जन्म : १२ मई १९५६ निवासी : दुर्ग छत्...
कमाल हो जाएगा (घनाक्षरी)
धनाक्षरी

कमाल हो जाएगा (घनाक्षरी)

डॉ. विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** यदि याद पाठ शाला, पाला किए बुजुर्ग से, अवसर चूको नहीं, वक्त चला जाएगा। जवाब हर बात या, भूल की अवहेलना, तर्क अज्ञान वश तो, विद्वता ना पाएगा। घर परिवार देश, समाज क्रम घटित, जानी अनजानी कभी, रोक कैसे पाएगा। समझकर संवाद को, सभा समूह विवाद, मुंह अपना खोलिये, वाह ही करायेगा। युग जो बदल गया, मौन भाषा भूल गया, बोले बिना चैन गया, आदत बनाएगा। नजर तो घुमाइये, शहर से गांव तक, मुख्य शीर्ष बैठकें तो, सुनना सिखाएगा। विवाद के महारथी, बिना सुने बन गए, झूठ ज्ञान गढ़ गए, तो जीत क्या पाएगा। वक्ता पहचान यही, तथ्य बोध कला सही, प्रभाव सामने सही, नाम ही कमाएगा। पड़ोस परिवार में, बोलकर भाषा कटु, खड़े स्वाभिमान लिए, टपक ही जायेगा। छपना है अच्छा बुरा, छपास बना आसरा, बिखरा जो यही रोग, राह क्या दिखाएगा। चूकना नहीं...
हिंदी का गुरुत्व सम्मान
कविता

हिंदी का गुरुत्व सम्मान

डॉ. विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना। मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना। रस्साकसी के खेल जैसे राज्य भाषा हिंदी फसी पड़ी है। संस्कारित संस्कृत से उदित हिंदी भाषा महिमा बड़ी है। तुलसी भारतेंदु रचित संसार में हिंदी कोहिनूर जड़ी है। राष्ट्र आन बान शान जन गण मन वंदे मातरम गा लेना। हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना। मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना। कुरीति दोहन शोषण की रचनाएं सर चढ़कर जो बोली। साहित्य कला कौशल से अन्याय जगत की डगर डोली। देश प्रेम के गीतों नारों ने गुलामी पटकथा गठान खोली। नवोदित सृजन लेखन में हिंदी संकल्प शक्ति जड़ लेना। हिंदी पर अभिमान हमको हिंदी शान में गोष्ठी कर लेना। मगर हिंदी दिवस मनाने जरूरी पहल अनूठी कर लेना। हिंदी दिवस शुद्ध हिंदी प्रेम ...