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रिटामटमेंट
लघुकथा

रिटामटमेंट

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ********************  रामशरण जी कालेज में प्रोफेसर थे। स्वभाव के मस्त-मौला थे। अपने काम से मतलब रखते थे, अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा जागरूक रहते थे, इसलिए छात्रों में भी वे लोकप्रिय थे। समय बीतता गया, आखिर उनके रिटामटमेंट का समय भी आ गया। रिटायरमेन्ट के बाद उन्होंने एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया, जिसमें उनके प्रोफेसर साथी, कालेज का स्टॉफ, पूर्व छात्रों तथा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों सभी को आमंत्रित किया। पार्टी आराम से चल रही थी। अचानक उनकी पत्नी शीला चक्कर खा कर गिर पड़ी। रंग में भंग पड़ गया गया। शीला जी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच करके कहा, "ये अब जिन्दा नहीं हैं।" खुशी का माहौल दु:ख में बदल गया। देखिए, प्रकृति का खेल-रामशरण जी कालेज से रिटायर हो गए और उनकी पत्नी इस दुनिया से रिटायर हो गयी। असली रिटामटमेंट किसका था, म...
माँ की ममता
कविता

माँ की ममता

प्रभात कुमार "प्रभात" हापुड़ (उत्तर प्रदेश) ******************** माँ तेरी ममता का, कैसे करूँ बखान। तेरे चरणों में बसा, मेरा सकल जहान।। जन्म दिया तूने मुझे, जीवन दिया महान।। अपने सपनों से रचा, मेरा उज्ज्वल मान।। मेरे हित हर श्वास में, तेरा रहा अनुराग। अपने सुख सब त्यागकर, रखा सदा ही ध्यान।। भोर हुई या रात हो, थकना तुझको नाय। मेरे उज्ज्वल भविष्य हेतु, दीप हृदय में जलाय।। शिक्षा मेरी हेतु तू, करती रही पुकार। ईश्वर से माँगा सदा, जीवन में उजियार।। मेरी छोटी भूल पर, डाँटा भी कई बार। किन्तु डाँट के बीच भी, बरसा माँ का प्यार।। मेरी पीड़ा देखकर, रोता तेरा मन। मेरे दुःख की आँच से, द्रवित हुआ जीवन।। चाह न थी वैभव की, न ऊँचा सम्मान। मैं जीवन में बढ़ सकूँ, बस यह तेरा अरमान।। जब तक तेरे शीश पर, आशीषों का हाथ। जीवन-पथ आसान था, मिला सदा विश्वास।। आज ...
जीवन का पड़ाव
कविता

जीवन का पड़ाव

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** जीवन के इन पन्नों पे लिखते हैं हम दासता? खुशी के पल लिखूं या ग़मों की दास्ताँ। बचपन के दिन थे नहीं बोझ नहीं ग़म कोई, हंसते-खेलते बीत गया नहीं बोझ था जीवन में। आगे बड़े किशोर अवस्था दबिश रहती अंकुश अपार नये जीवन की शुरुआत? "वयस्क की गिनती की शुरुआत" एक-एक कर आता जाता है दुनिया का झमेला, कुछ पल सुकून के ढूंढते है हम पर वक्त निकल जाता था। कभी शुभ यात्रा कर लेते थे मन में आता थोड़ा सुकून अच्छे लोग, अच्छे विचार, नया उत्साह, नई प्रभात। खूब मौज में बीते कुछ दिन पल, पर फिर आए वही डंडा-गुल्ली खड़े थे स्वागत में गमों को देने वाले? पूरा जीवन निकल गया सुख-दुख की परछाई में। यह कोई एक मन की बात नहीं यह सैकड़ो दिलों की कहानी है, थोड़ी कम थोड़ी ज्यादा यही जीवन की कहानी है। दुख तो हर पल खड़ा ...
ज़िन्दगी
कविता

ज़िन्दगी

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** ज़िन्दगी के किसी कोने में धुआ भरा है जो कभी बाहर निकल कर घुटन, घबराहट में बदलकर मेरी छोटी ज़िन्दगी के कुछ दिन और कम कर जाता है और और मैं घुटकर रह जाती हूं मन मसोस कर चुप रहकर सब सहती हूं क्यों कि मैं जानती हूं कि जिंदगी का कोई कोना धुआं उगल सकता है मै फिर घुट जाउंगी। फिर भी जीवन जीती हूं इस जिंदगी को भोगने के लिए अपने भोग पुरे करने के लिए। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्...
बेटियां
कविता

बेटियां

आयुषी दाधीच भीलवाड़ा (राजस्थान) ******************** माँ का प्रश्न तो पिता का उत्तर होती हैं बेटियां, माँ की चाल तो पिता की उड़ान होती हैं बेटियां, माँ का स्वार्थ तो पिता का संतोष होती हैं बेटियां, हां, यही तो होती हैं बेटियां। माँ की चिंता तो पिता का प्यार होती हैं बेटियां, माँ की दुलारी तो पिता की परी होती हैं बेटियां, माँ की ममता तो पिता का अपनापन होती हैं बेटियां, हां, यही तो होती हैं बेटियां। माँ की सीख तो पिता की दिशा होती हैं बेटियां, माँ की गोद तो पिता की दुनिया होती हैं बेटियां, माँ की आस तो पिता का विश्वास होती हैं बेटियां, हां, यही तो होती हैं बेटियां। माँ की परछाई तो पिता का गर्व होती हैं बेटियां, माँ की हमदर्द तो पिता की दवा होती हैं बेटियां, माँ की अश्रुधारा तो पिता की धड़कन होती हैं बेटियां, हां, यही तो होती हैं बेटियां। परिचय :-  आयुषी दाधीच शि...
माता
कविता

माता

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** सुख देती बच्चों को माता। जग की देखो वही विधाता।। माँ ही जानो होती अम्बे। करे कृपा माता जगदम्बे।। स्वर्ग मिले चरणों में उसके। कर सेवा बच्चों जी भर के।। माता सीता माँ अनुसुइया मां जशुदा है माँ कौशल्या। आशीषों की है फुलवारी। बच्चों की करती रखवारी।। सद्गुण हमको मातु सिखाती। बच्चों को वह अमृत पिलाती।। मात हृदय को तुम न दुखाओ। बच्चों उसका साथ निभाओ।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन। प्रकाशित ...
मेरी पसंद
कविता

मेरी पसंद

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** माता दुर्गा की पूजा की श्री राम ने, वह तट पसंद है, माता सीता ने वनवास काटा, वह पंचवटी पसंद है। हनुमाना ने लंका की उजाड़ी, वह वाटिका पसंद है, राम-सीते का मिलन हुआ, वह वाटिका पसंद है। लव-कुश का जन्मोत्सव हुआ, वह आश्रम पसंद है, रामकृष्ण परमहंस ने ज्ञान दिया, वह आश्रम पसंद है। मीरा की भक्ति से पावन हुई, वह धरती पसंद है, कृष्ण ने गोपियों संग लीला की, वह धरती पसंद है। तुलसी ने रामचरित रची, वह गंगा तट पसंद है, श्रीराम ने जलसमाधि ली, वह सरयू घाट पसंद है। कपिश्वर लाए संजीवनी, वह पाषाण पसंद है, कृष्ण ने रक्षा हेतु उठाया, वह गोवर्धन पाषाण पसंद है। जिस रज पर जीवन संभव, वह धरती पसंद है, जिस रज पर मैं चरण रखूँ, वह अपनी धरती पसंद है। परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" ...
श्रीमंत छत्रपति संभाजी महाराज- वह ज्वाला जिसे यातनाएँ भी बुझा न सकीं
आलेख

श्रीमंत छत्रपति संभाजी महाराज- वह ज्वाला जिसे यातनाएँ भी बुझा न सकीं

अमित राव पवार देवास (मध्य प्रदेश) ******************** भारतीय इतिहास का गगन अनेक वीरों की गाथाओं से आलोकित है, किंतु कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बनते, बल्कि राष्ट्र की आत्मा में सदैव जीवित रहते हैं। श्रीमंत छत्रपति संभाजी महाराज ऐसे ही एक अमर व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन साहस, स्वाभिमान, विद्वता और बलिदान का अद्वितीय संगम था। दुर्भाग्य से इतिहास के अनेक पन्नों में उनके व्यक्तित्व को उतनी व्यापकता नहीं मिली, जिसके वे वास्तविक अधिकारी थे। उनके जीवन को केवल युद्धों और बलिदान तक सीमित कर दिया गया, जबकि सत्य यह है कि संभाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना के प्रखर प्रहरी थे। आज जब समाज वैचारिक भ्रम, सांस्कृतिक विस्मृति और इतिहास की अधूरी व्याख्याओं से जूझ रहा है, तब संभाजी महाराज का जीवन हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र केवल तलवारों से नहीं...
जन सेवक- जनता
व्यंग्य

जन सेवक- जनता

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** हम जनता है, जन सेवक बनाना हमारा मौलिक अधिकार है ।जन सेवक बनने के लिए किसी को भी कोई विश्व विद्यालय की डिग्री की आवश्यकता नहीं है। जन सेवक बनने की शुरुआत अपने क्षेत्र मे छोटे-छोटे अपराधों जैसे कोई मारपीट या छेड़खानी आदि से शुरू कर सकते है। आप को कुछ माह की जेल भी हो सकती है लेकिन आपको कोई चिंता नहीं करनी चाहिये क्योंकि जेल मे रहकर वहाँ का अनुभव आप को आगे भी काम आयेगा। जेल मे रहने से आपकी पहचान पुलिस महकमे के साथ साथ बड़े अपराधियों से भी होगी जिससे आप को हौसला मिलेगा और आप आगे बढ़ेंगे। आप बड़े अपराध जेसे हप्ता वसूली शहर के बड़े लोगों को डराने, भू माफियाओं आदि के काम से आपका नाम अख़बारों मे व टीवी चैनलों के माध्यम से फेमस होगा। यदि आप लोगों की भावनाएं भड़का कर दंगा फसाद करवाते है तो इससे भी आप को कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि पुलिस आ...
लोहा ले लो शत्रु से …
दोहा

लोहा ले लो शत्रु से …

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** (भ्रमर दोहे) लोहा ले लो शत्रु से, जागो मेरे मीत। होगी तेरी जीत ही, त्यागो सारे भीत। त्यागो जिद्दी चाल को, मानो मेरी बात। छोड़ो सारी दुष्टता, देती जो आघात।। खाना खाओ शुद्ध ही, जो हो शाकाहार। हत्या जीवों की रुके, छोड़ो अत्याचार।। जीना सीखो शान से, गंदा धंधा छोड़। बेईमानी त्याग दो, नेकी से हो होड़।। आओ मेरे पास तू, सीखो प्रज्ञा गूढ़। दूँगा ऐसा ज्ञान मैं, मानो रे हे मूढ़।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक (पी.एन.बी.) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 र...
मेरी माँ ने ही मुझे कविता-प्रेम दिया
संस्मरण

मेरी माँ ने ही मुझे कविता-प्रेम दिया

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मैं मध्यप्रदेश के गुना जिले (अब अशोकनगर) की चन्देरी तहसील के गाँव प्राणपुर का रहने वाला हूँ। छोटा-सा गाँव है। तब तो बहुत ही छोटा था।उन दिनों गाँव में भौतिक तरक्की तो बिल्कुल नहीं थी, पर प्रेम व अपनापन बहुत था। लोग बहुत ही हिल-मिलकर रहते थे। मेरे पिताजी शासन की राजस्व सेवा में थे, और माताजी गृहिणी थीं। हालांकि माताजी मात्र आठवीं तक ही पढ़ी थीं, पर उनकी नोलेज ज़बरदस्त थी। रामायण, महाभारत, वेद-पुराणों सबका उन्हें गहरा ज्ञान था। मुझे वे पौराणिक गाथाएँ व प्रसंग सुनाती रहती थीँ। उन्हें भजन व कविताएं भी बहुत सारी याद थीं। माँ ख़ुद भी कविताओं को गढ़ लेती थीं, और तुक मिलाकर मुझे सुनाया करती थीं। जिससे मेरा सहज ही कविता के प्रति अनुराग हो गया। माँ के निर्देश पर मैं रोज़ाना शाम को रामायण भी पढ़ता था, जिससे मुझे धर्म के प्रति अनु...
क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है
छंद

क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है

डॉ. भावना सावलिया हरमडिया, राजकोट (गुजरात) ******************** (पीयूष वर्ष छ्न्द) २१२२ २१२२ २१२ पास जिसके माँ वही धनवान है। क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।। सृष्टि में माँ का सृजन अनमोल है। कष्ट हर लेता जननि का बोल है। सर्व सुख माँ के लिए संतान है। क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।। गोद में संसार भर का सुख मिला। स्नेह सिंचन से कली-सा मन खिला।। नित्य तन-मन से करें फिर सम्मान है। क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।। इस जगत की राह में सब शूल हैं। एक माँ की गोद में बस फ़ूल हैं। माँ खिलाती हाथ से पकवान है। क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।। शीश चरणों में झुकाया है जिसे। कष्ट जीवन में कहाँ फिर है इसे। तीर्थ का पावन वही गृह स्थान है। क्योंकि माँ साक्षात ही भगवान है।। सर्व सुख संपत्ति की माँ नाव है। ग्रीष्म की दोपहर में वह छाँव है। माँ हमेशा चाहती उत्थान है। क्योंक...
मां शब्द की अभिव्यक्ति
कविता

मां शब्द की अभिव्यक्ति

प्रतिभा दुबे "आशी" ग्वालियर (मध्य प्रदेश) ******************** मां शब्द की अभिव्यक्ति क्या करूं,1132 क्या लिखूं माँ पर कोई एक रचना! विधाता का श्रेष्ठ सृजन हमारे लिए, माँ के रूप में खुद आए हमारे लिए मां के दुलार बिन रह न पाया, हर जगह मौजूद मां का ही साया! कभी सोने न दिया भूखे पेट मुझे उठाकर नींद में, निवाला खिलाया।। मैं ईश्वर का नाम लूं न लूं दुआएं तेरी हमेशा लगती मुझे झोली में तेरी सदैव रहती मन्नतें, धागे बांधे न जाने कितने मेरे लिए।। लाख कोशिश कर लूं फिर भी, तेरा ऋण मैं उतार न पाऊंगी सलामत रहो बस मेरे लिए तुम तुम्हारी दुआओं से, यश पाऊंगी।। क्या लिखूं माँ तेरे लिए मैं शब्दों से तेरा ही दिया हुआ, ये जीवन हैं मेरा तुम्हारी स्वयं कि, मैं हूं एक रचना आज मां बनकर ही एहसास हुआ।। परिचय :-  श्रीमती प्रतिभा दुबे "आशी" (स्वतंत्र लेखिका) ...
जीवन की पहचान
कविता

जीवन की पहचान

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चित्र नही चरित्र बनाये, फोटो नही मुस्कान बढाये, द्वेष नही स्नेह बढाये, राग नही अनुराग बढाये। घृणा नही प्रेम बढाये, अपमान नही सम्मान बढाये, अकेला नही समूह बनाये, धोखा नही विश्वास बनाये। बेसहारो का सहारा बन जाये, बेरोजगारी नही रोजगार बढाये, माँ मातृभूमि, और जन्मभूमि का मान बढाये, जिसका खाये उसका गाऐ। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४" से सम्मानित ४. १५००+ कविताओं की रचना व भ...
सतरंगी दुनिया- २२
व्यंग्य

सतरंगी दुनिया- २२

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** *ज़िंदगी को ठंड और घमंड दोनों से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि दोनों ही परिस्थितियों में आदमी अकड़ जाता है।* हम लोग घर के दरवाजे पर शुभ-लाभ लिखते हैं। केवल शुभ-लाभ लिखने से कुछ नहीं होगा। शुभ विचार रखिए अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी, फिर लाभ ही लाभ होगा। भगवान ने हर इंसान को किसी वजह से बनाया है, इसलिए खुद को स्पेशल समझना शुरू कर दो। *वाणी और विचार ये दोनों प्रोडक्ट हमारी खुद की कम्पनी के हैं। इनकी क्वालिटी जितनी अच्छी रखेंगे, कीमत उतनी ही ज्यादा मिलेगी।* भिखारी भी कभी-कभी विशेष जवाब देकर सोचने को मजबूर कर देते हैं। एक व्यक्ति प्रतिदिन भिखारी को दस रुपए देता था। अचानक पिछले कुछ दिनों से उसने भिखारी को एक रूपया प्रतिदिन देना शुरू कर दिया। भिखारी ने कारण पूछा तो उस व्यक्ति ने बताया कि अब उसकी शादी हो गयी है। तब भिखारी न...
घाम पियास
कविता

घाम पियास

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** लकलक-लकलक घाम करत हे। घाम पियास म मनखे मरत हे। काटें काबर रुख-राई ल संगी, ताते-तात आज हवा चलत हे।। बर पिपर के छईयाँ नँदागे। बिन छईयाँ के चिरई उडा़गे। आगी अँगरा कस भुइयाँ लागे, भोंमरा जरई म गोड़ भुँजागे।। नदियाँ, नरवा, अउ तरिया अटागे। जंगल झाड़ी, रुख राई कटागे। घाम पियास म सबला बचइया, हरियर धरती घाम म सुखागे ...।। परिचय :- प्रीतम कुमार साहू, गुरुजी (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिं...
पिता की रौशनी
कविता

पिता की रौशनी

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** हाँ बेटा, मैं तुझे अंधेरे से बचाना चाहता हूँ, जीवन के कुछ मूल सूत्र समझाना चाहता हूँ। ये सही है, मेरा बार-बार टोकना तुझे शायद अच्छा नहीं लगता, मुझसे खुलकर बात करने का मन अक्सर ही कतराता, भटकता। मेरी डाँट, मेरे शब्द तुझे जैसे चाकू-छुरा लगते हैं, पर इन्हीं में छुपे भाव मेरे तेरे भविष्य के रक्षक बनते हैं। तू क्यों नहीं समझ पाता है इन बातों की गहराई को, बात पूरी सुने बिना ही छोड़ देता है सच्चाई को। जल्दबाज़ी छोड़, धैर्य का ताप सहना सीख, अपने पैरों पर चलना, खुद को गढ़ना सीख। हर एक फरमाइश के पीछे कितनी मेहनत झेल रहा कोई, अपनी ही ज़िंदगी, अपने ही तन से कितना खेल रहा कोई। वक़्त किसी के लिए नहीं ठहरता, ये सच्चाई याद रखना, जो पसीने से खेलते हैं उनके पाँव में छाले भी हार मानते ये बात ...
नेताजी कर्मदास की कैंची लीला
व्यंग्य

नेताजी कर्मदास की कैंची लीला

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** नेताजी कर्मदास बड़े कर्मयोगी हैं। कर्म और कर्मफल, दोनों में उनका अटूट विश्वास है। बस फर्क इतना है कि उनके कर्म का केंद्र न राष्ट्र है, न जनकल्याण, वे तो एक ही महान कर्म के लिए अवतरित हुए हैं, वो कर्म है ‘फीता काटना।‘ दिन में दो-चार फीते न कटें तो उनकी उंगलियाँ ऐसे फड़कती हैं जैसे बिना दाना देखे कबूतर बेचैन हो उठे। जेल हो या जिम, अस्पताल हो या शोरूम,बस मंच सजा हो, फीता तना हो और कैमरे तैयार हों, नेताजी अपने कर्म-प्रदर्शन के लिए तत्पर खड़े मिलेंगे। उनके अनुसार फीता काटना पतंग के पेंच लड़ाने से भी अधिक कौशलपूर्ण कार्य है। वे न सुई से, न तलवार से, सिर्फ कैंची से, एक दिन राजनीति की चाँदी काटने का सपना संजोए बैठे हैं। एक बार किसी कार्यक्रम में उन्हें भोंथरी कैंची थमा दी गई। फीता झटके से न कटा ...
ज़िंदगी चार दिन की
ग़ज़ल

ज़िंदगी चार दिन की

निज़ाम फतेहपुरी मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** अरकान- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन वज़्न- २१२ २१२ २१२ २१२ मौत सच है रहेंगे सदा हम नहीं। जीने का भी यहाॅं पे मज़ा कम नहीं।। ज़िंदगी चार दिन की जियो शान से। बाटो खुशियाॉं जहॉं में मगर ग़म नहीं।। ज़ुल्म सहते रहे उनके हॅंसते हुए। रोए ऐसे की ऑंखें हुई नम नहीं।। ज़ेहनी कमजोर जो लड़ते फिरते हैं वो। गुस्से में कांपते जिनके कुछ दम नहीं।। जंग बल से नहीं तुम लड़ो अक़्ल से। नज़रें दुश्मन पे हों ये मगर ख़म नहीं।। चढ़ने के बाद जल्दी न उतरे मिरी। फूल महवे की पीता कभी रम नहीं।। लोग क्यूॅं डर रहे देख मुझको निज़ाम। ठर्रा बोतल में है ये कोई बम नहीं।। परिचय :- निज़ाम फतेहपुरी निवासी : मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भारत शपथ : मेरी कविताएँ और गजल पूर्णतः मौलिक, स्वरचित हैं। क...
धीरे-धीरे हँसना प्रिये …
कविता

धीरे-धीरे हँसना प्रिये …

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** धीरे-धीरे हँसना प्रिये, मेरा मुझसे ही कहना प्रिये। सोणी-सोणी है मेरी नार, सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।। तुझको मेरे पास रहना है, सच्चा साथ निभाना है। धीर धारण करके रहना है, मुझे महकाते रहना है। मुझसे ही है तेरा श्रृंगार, मेरे बिना श्रृंगार है बेकार। धीरे-धीरे हँसना प्रिये, मेरा मुझसे ही कहना प्रिये। सोणी-सोणी है मेरी नार, सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।। रातें काली-काली होती हैं, फिर भी सुंदर सुबह होती हैं। रातों में मीठी-मीठी बातें होती हैं, मगर अधूरी रह जाती हैं। मेरी परछाई बनना प्रिये, मरने से पहले साथ रहना प्रिये। इस जीवन में मेरी हो प्रिये, फिर कहना मेरा ये ही है प्यार। सबको सच्च कहना, इसको ही कहते है सच्चा दिलदार। धीरे-धीरे हँसना प्रिये, मेरा मुझसे ही कहना प्रिये। स...
मां तो मां होती है
कविता

मां तो मां होती है

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** आंचल के छांव में, ममता के मोह में, मां तो सब सह जाती है। मां तो मां ही होती है।। स्नेह भाव, मम्मत्व से भरी। पुत्र प्रेम में सब भूल सारे कष्ट सहकर भी हंसकर जीती जाती है। बिटिया से करे हंसी ठिठोली, आंखों ही आंखों में सब कुछ समझाती। मां तो मां ही होती है।। पाल पोस कर किया बड़ा अब फिर भी सीने से लगाती है। सपने देखे बहुओं का, दामाद ढूंढे भविष्य के सपने बुने, घर को स्वर्ग बनाती है। घर संभाले, बच्चों की इच्छा पूरी करें, लाड़ लुटाए लड़के पर इतनी इतराती है। मां तो मां होती है।। सब कुछ सह कर भी जीवन नौछावर कर जाती है। ‌मिला न कोई अपना सा, अब तो मां की यादों में रहता हूं, सपनों में जीता हूं, अकेले में ही मां से बातें करता हूं ‌।‌ मां तो मां होती है।। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प...
रोम-रोम आनंदित करदे …
भजन

रोम-रोम आनंदित करदे …

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** रोम-रोम आनंदित करदे, जगत का पालन हारा। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। प्रेम रस की मूरत है वो, सब से है वो न्यारा। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। छवि निहारे जब जब, लगता है सब से दुलारा। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। मोर मुकुट पिताम्बर धारी, मोहन मुरली वाला। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। गिरि धारी वो कुंज बिहारी, नैनों का है तारा। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। रंग रसिया के रंग मे रमा है, बृज मंडल सारा। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। युगों मे अवतरित होता है, धर्म का ये रखवाला। वो श्री कृष्ण है प्यारा, वो श्री कृष्ण है प्यारा। भक्तों के कष्टों को हर, कर देता है उजियारा। वो श्री कृष्ण है प्य...
लिखता रहूंगा
कविता

लिखता रहूंगा

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जब से मैंने होश संभाला, मां-बाप ने विद्यालय में डाला, गुरुजनों और साथियों ने साथ निभाया, शब्दों को कैसे गढ़ना है- यह हुनर सिखाया। तभी से लिखता चला जा रहा हूँ, कभी अपनी उलझनें, कभी दिल के फ़साने, कभी प्रेरणा देने वालों से मुलाक़ातों के तराने। कभी प्रेम, कभी पीड़ा, कभी जीवन की टीस, तकनीक की दौड़ में भी ढूंढता रहा अपनी ही किसी चीज़। अपनों के रंग, उनके वार और प्रतिघात, भरोसेमंद हाथों से भी खाई दिल पर चोट की घात। भले ही मैं कवि या लेखक न दिखता हूँ, पर शब्दों के संग निरंतर चलता हूँ। परिवार को मुस्कान देने की कोशिश में लगा, कभी अपने ही खून से भी मिला धोखा जगा। जिसे सबसे अधिक विश्वसनीय माना, उसी से जीवन का सबसे गहरा घाव पाया, तभी तो खुद की पहचान का आईना भी कभी-कभी मुझे मेरी औका...
अतरी की वादियाँ
कविता

अतरी की वादियाँ

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** आकर देखिए जरूर यहाँ , मोहक अत्री की वादियाँ। लें खुशबू सोंधी मिट्टी की, अवलोकन करें ये घाटियाँ।। यहीं तपोवन की पुण्यभूमि , गर्म कुंड झरना पहाड़ियाँ। प्रकृति अति सुहानी लगती है , छोटी झुरमुट लताएँ-झाड़ियाँ।। जेठियन घाटी लगे अद्भुत, यहाँ दृश्य मनोरम झाँकियाँ। आकर देखें गहलौर घाटी, दशरथ की जुनूनी कहानियाँ।। शान यहाँ किसानों की है, खेतों की टेढ़ी-मेढ़ी आरियाँ। आकर निहारें अद्भुत छटा को छोटी-बड़ी यहाँ की क्यारियाँ।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक (पी.एन.बी.) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स...
यौवन
कविता

यौवन

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** दिन जवानी के आते जाते रहेंगे। मोहब्बत के गीत हम भी गाते रहेंगे। नाम लेकर खुदा तेरा हम उसे मनाते रहेंगे। अफसाने तो बहुत लिखे हैं हमने हर अफ़साने में तेरे नाम के साथ उसका नाम लिखते रहेंगे। लोग पूछेंगे जब भी दर्द की वजह हम भी सर्द हवाओं के साथ उसका नाम भी हम लिखते रहेंगे। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी...