
प्रभात कुमार “प्रभात”
हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
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माँ तेरी ममता का,
कैसे करूँ बखान।
तेरे चरणों में बसा,
मेरा सकल जहान।।
जन्म दिया तूने मुझे,
जीवन दिया महान।।
अपने सपनों से रचा,
मेरा उज्ज्वल मान।।
मेरे हित हर श्वास में,
तेरा रहा अनुराग।
अपने सुख सब त्यागकर,
रखा सदा ही ध्यान।।
भोर हुई या रात हो,
थकना तुझको नाय।
मेरे उज्ज्वल भविष्य हेतु,
दीप हृदय में जलाय।।
शिक्षा मेरी हेतु तू,
करती रही पुकार।
ईश्वर से माँगा सदा,
जीवन में उजियार।।
मेरी छोटी भूल पर,
डाँटा भी कई बार।
किन्तु डाँट के बीच भी,
बरसा माँ का प्यार।।
मेरी पीड़ा देखकर,
रोता तेरा मन।
मेरे दुःख की आँच से,
द्रवित हुआ जीवन।।
चाह न थी वैभव की,
न ऊँचा सम्मान।
मैं जीवन में बढ़ सकूँ,
बस यह तेरा अरमान।।
जब तक तेरे शीश पर,
आशीषों का हाथ।
जीवन-पथ आसान था,
मिला सदा विश्वास।।
आज नहीं तू साथ माँ,
सूना सारा धाम।
तेरी स्मृतियाँ बन गईं,
जीवन का विश्राम।।
रोम-रोम में आज भी,
तेरा स्नेह समाय।
तेरे शुभ आशीष ने,
संकट सभी मिटाय।।
आँखें मेरी नम हुईं,
स्मृतियाँ हुईं प्रबल।
तेरे बिन जीवन लगे,
सूना और विफल।।
तू ही मेरी शक्ति थी,
तू ही मेरा मान।
तेरे चरणों में रहा,
मेरा सकल ज्ञान।।
वह कोई दूजी नहीं,
जीवन की थी थाती।
मेरी हर धड़कन बसी,
केवल मेरी माँ थी।।
परिचय :- प्रभात कुमार “प्रभात”
निवासी : हापुड़, (उत्तर प्रदेश) भारत
शिक्षा : एम.काम., एम.ए. राजनीति शास्त्र बी.एड.
सम्प्रति : वाणिज्य प्रवक्ता टैगोर शिक्षा सदन इंटर कालेज हापुड़
विशेष रुचि : कविता, गीत व लघुकथा (सृजन) लेखन, समय-समय पर समाचारपत्र एवं पत्रिकाओं में रचनाओं का निरंतर प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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