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घाम पियास

प्रीतम कुमार साहू ‘गुरुजी’
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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लकलक-लकलक घाम करत हे।
घाम पियास म मनखे मरत हे।
काटें काबर रुख-राई ल संगी,
ताते-तात आज हवा चलत हे।।

बर पिपर के छईयाँ नँदागे।
बिन छईयाँ के चिरई उडा़गे।
आगी अँगरा कस भुइयाँ लागे,
भोंमरा जरई म गोड़ भुँजागे।।

नदियाँ, नरवा, अउ तरिया अटागे।
जंगल झाड़ी, रुख राई कटागे।
घाम पियास म सबला बचइया,
हरियर धरती घाम म सुखागे …।।

परिचय :- प्रीतम कुमार साहू, गुरुजी (शिक्षक)
निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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