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ज़िंदगी चार दिन की

निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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अरकान- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
वज़्न- २१२ २१२ २१२ २१२

मौत सच है रहेंगे सदा हम नहीं।
जीने का भी यहाॅं पे मज़ा कम नहीं।।

ज़िंदगी चार दिन की जियो शान से।
बाटो खुशियाॉं जहॉं में मगर ग़म नहीं।।

ज़ुल्म सहते रहे उनके हॅंसते हुए।
रोए ऐसे की ऑंखें हुई नम नहीं।।

ज़ेहनी कमजोर जो लड़ते फिरते हैं वो।
गुस्से में कांपते जिनके कुछ दम नहीं।।

जंग बल से नहीं तुम लड़ो अक़्ल से।
नज़रें दुश्मन पे हों ये मगर ख़म नहीं।।

चढ़ने के बाद जल्दी न उतरे मिरी।
फूल महवे की पीता कभी रम नहीं।।

लोग क्यूॅं डर रहे देख मुझको निज़ाम।
ठर्रा बोतल में है ये कोई बम नहीं।।

परिचय :- निज़ाम फतेहपुरी
निवासी : मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भारत
शपथ : मेरी कविताएँ और गजल पूर्णतः मौलिक, स्वरचित हैं।


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