
इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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धीरे-धीरे हँसना प्रिये,
मेरा मुझसे ही कहना प्रिये।
सोणी-सोणी है मेरी नार,
सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।।
तुझको मेरे पास रहना है,
सच्चा साथ निभाना है।
धीर धारण करके रहना है,
मुझे महकाते रहना है।
मुझसे ही है तेरा श्रृंगार,
मेरे बिना श्रृंगार है बेकार।
धीरे-धीरे हँसना प्रिये,
मेरा मुझसे ही कहना प्रिये।
सोणी-सोणी है मेरी नार,
सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।।
रातें काली-काली होती हैं,
फिर भी सुंदर सुबह होती हैं।
रातों में मीठी-मीठी बातें होती हैं,
मगर अधूरी रह जाती हैं।
मेरी परछाई बनना प्रिये,
मरने से पहले साथ रहना प्रिये।
इस जीवन में मेरी हो प्रिये,
फिर कहना मेरा ये ही है प्यार।
सबको सच्च कहना,
इसको ही कहते है सच्चा दिलदार।
धीरे-धीरे हँसना प्रिये,
मेरा मुझसे ही कहना प्रिये।
सोणी-सोणी है मेरी नार,
सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।।
मर्यादाएं क्या होती हैं
और कैसे तोड़ी जाती हैं।
तोड़ी हुई मर्यादांए,
फिर से कैसे निभाई जाती हैं।
सबको बतलाना प्रिये
मर्यादाओं में ही है संस्कार।
अपनों के सँग अपने
होते हैं, तब है सुंदर संसार।
धीरे-धीरे हँसना प्रिये,
मेरा मुझसे ही कहना प्रिये।
सोणी-सोणी है मेरी नार,
सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।।
इस कलयुग से बचना है,
सपने में भी नहीं है अपना।
तेरा नाम तुझसे ही करना है,
अब कोई नहीं है बहाना।
तेरी रक्षा तू ही करना,
अपने हाथों में ले लेना तलवार।
तेरा साँई तुझमें में ही है,
तेरा साँई है तेरा भरतार प्रिये।
धीरे-धीरे हँसना प्रिये,
मेरा मुझसे ही कहना प्रिये।
सोणी-सोणी है मेरी नार,
सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।।
परिचय :- इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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