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मेरी पसंद

इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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माता दुर्गा की पूजा की श्री राम ने, वह तट पसंद है,
माता सीता ने वनवास काटा, वह पंचवटी पसंद है।

हनुमाना ने लंका की उजाड़ी, वह वाटिका पसंद है,
राम-सीते का मिलन हुआ, वह वाटिका पसंद है।

लव-कुश का जन्मोत्सव हुआ, वह आश्रम पसंद है,
रामकृष्ण परमहंस ने ज्ञान दिया, वह आश्रम पसंद है।

मीरा की भक्ति से पावन हुई, वह धरती पसंद है,
कृष्ण ने गोपियों संग लीला की, वह धरती पसंद है।

तुलसी ने रामचरित रची, वह गंगा तट पसंद है,
श्रीराम ने जलसमाधि ली, वह सरयू घाट पसंद है।

कपिश्वर लाए संजीवनी, वह पाषाण पसंद है,
कृष्ण ने रक्षा हेतु उठाया, वह गोवर्धन पाषाण पसंद है।

जिस रज पर जीवन संभव, वह धरती पसंद है,
जिस रज पर मैं चरण रखूँ, वह अपनी धरती पसंद है।

परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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