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सेतु का काम करती हिन्दी

डाॅ. कृष्णा जोशी
इन्दौर (मध्यप्रदेश)

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आज हम बड़े ही रोचक विषय पर बात करेंगे जी हाँ हिन्दी न केवल भाषा वरन भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक हैं। हम सभी जानते है हिन्दी के जनक और जननी कौन है? जी भारतेन्दु हरिशचंद्र जी का नाम तो सुना ही होगा वो न केवल हिन्दी के जनक कहलाते बल्कि दुनिया में आधुनिक साहित्य के जनक कहलाते हैं। वहीं जननी संस्कृत जी पर हिन्दी आज भी सबसे सरल, प्रिय, विकसित भाषा है जिसे राज भाषा का दर्जा प्राप्त है, वैश्विक स्तर पर हिन्दी ने अपनी पहचान यूँ ही नहीं बनाई, आज ना केवल भारत में अन्य देश में भी हिन्दी भाषा प्रचलित है। यह तो हम हिन्दी के विकास और पहचान कैसे बनाई उसको जाने पर हिन्दी का योगदान देश के विकास में और देश को समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाता रहा, हिन्दी संघ की भाषा है जो हमें जोड़े रखती हैं। यह वो मज़बूत कड़ी है जो हमें जड़ों से जोड़ती है, हमें एकता के सूत्र में बाँधे रखती हैं।विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य हिन्दी भाषा करती हैं। हिन्दी अपने आप में गौरवशाली है इसका इतिहास हज़ारों साल पुराना है ना केवल राजभाषा बल्कि एक नई दिशा देने का कार्य करती है। हिंदी के प्रति जागरूकता विदेशों में भी दिखाई दे रही है यह साधारण बात नहीं है हमारे इतिहास में गौरव की बात जन-जन की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिन्दी इतनी समृद्ध भाषा है कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना ली। सामाजिक एकता बढ़ाती है हिन्दी। तो अत: यही कहूँगी कि सेतु का कार्य करती है मधुर, प्रिय भाषा हिन्दी।

परिचय :- डाॅ. कृष्णा जोशी
निवासी : इन्दौर (मध्यप्रदेश)
रुचि : साहित्यिक, सामाजिक सांस्कृतिक, गतिविधियों में। हिन्द रक्षक एवं अन्य मंचों में सहभागिता।
शिक्षा : एम एस सी, (वनस्पति शास्त्र), आई.आई.यू से मानद उपाधि प्राप्त।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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