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हिन्दी का स्वर

भीमराव ‘जीवन’
बैतूल (मध्य प्रदेश)
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विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना

हिन्दी का स्वर कोकिल कोमल।
हो गुंजित जग में यह अविरल।।

बन जाये जनगण की भाषा,
रहे प्रवाहित ज्यों गंगाजल।।

हिन्दी का रसपान हृदय में।
भर देता साहस नव संबल।।

विस्तारित हो हिन्दी भू पर।
बढ़ा रही नित अपना आँचल।।

भारत भू पर ध्वज हिन्दी का।
फहरेगा युग-युग तक निश्छल।।

अखिल विश्व में हिन्दी का अब।
आने वाला है मंगल कल।।

‘जीवन’ के उर को अब भाया।
हिन्दी का शीतल स्वर चंचल।।

परिचय :- भीमराव ‘जीवन’
निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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