Monday, March 2राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

महिला उत्थान कार्यक्रम

डॉ. मुकेश ‘असीमित’
गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
********************

यहाँ एक ठरकी महाशय की महागाथा प्रस्तुत है, जिनकी ठरक किसी मनचले तूफान की तरह है कब, कहाँ, किसे उड़ा ले जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। वैसे तो ये सरकारी नौकरी में हैं, लेकिन इन्हें लगता है कि समाज के इस आधे तबके के प्रति भी इनका दायित्व बनता है- जैसे भी, जहां भी, जितना भी बन पड़े… महिला उत्थान करना अनिवार्य है! तो ये खुद को “महिला सशक्तिकरण” का स्वयंभू मसीहा मान बैठे हैं। इनका दर्शन बड़ा स्पष्ट है जितनी अधिक महिलाओं का “उत्थान” करेंगे, उतनी ही अधिक इनकी आत्मा को तृप्ति मिलेगी। यूँ तो शादी-शुदा हैं, लेकिन सिर्फ घर की मुर्गी का ही उत्थान करें इस वहम से कोसों दूर हैं।
इनका ध्येय वाक्य है- शादी-वादी सब ढकोसला है, असली मकसद तो महिलाओं के उद्धार में जीवन अर्पित करना है! महिला दिवस नज़दीक आते ही इन्होंने इस बार नया रिकॉर्ड बनाने का संकल्प ले लिया कम से कम आठ-दस महिलाओं का एक साथ स्तरीय उत्थान तो करना ही है! सो, दफ्तर की महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा। “आपका करियर, आपका भविष्य, आपकी सुरक्षा- सबकी चिंता है हमें” इस भावुकता में लपेटकर ऑफर दिए जाने लगे। मगर समस्या यह थी कि दफ्तर सरकारी था, और यह “उत्थान” बहुत पर्सनल टाइप का था, सो इसके लिए अलग से एक फ्लैट किराए पर लेना पड़ा। फ्लैट को पूरी सुविधाओं से लैस किया गया- खाने-पीने का इंतज़ाम, मूवी, मनोरंजन, प्रसाधन सामग्री तक! पूरी व्यवस्था बस इसलिए कि महिलाएँ महसूस कर सकें कि इनकी शक्ति के आगे ये सज्जन नतमस्तक हैं।
मगर जाने क्यों, किसी महिला ने इनके ‘उत्थान अभियान’ में भागीदारी नहीं दिखाई! अब भाईसाहब घोर आशावादी थे। यही आशा थी की महिलाओं ने हाँ नहीं की तो ना भी तो नहीं की..! पिछली पोस्टिंग में भी कई बार हाथ-पैर तुड़वा चुके थे, मगर कभी हिम्मत नहीं हारी। वहाँ भी “उत्थान” का ऑफर धड़ल्ले से दिया था- ऐसा नहीं कि वहाँ हर अभियान में सफल हुए… कई बार फेल भी हुए… लेकिन फेल होने का पता अभियान के क्रियान्वयन के चंद पलों से लेकर चंद घंटों के अंदर ही चल जाता था- जब महिला के परिजन आकर इनकी ठरक की ईमारत को इनके कार्यालय में ही ध्वस्त कर देते थे। परंतु इनका जज़्बा अडिग था “कर्मण्येवाधिकारस्ते!” ठरक को जितना मर्ज़ी कुचला जाए, कितना भी दबाया जाए… ये फिर उसका जीर्णोद्धार कर लेते… ये फिर किसी फिल्मी विलेन की तरह उठ खड़ी होती! इधर, महिला दिवस के एक दिन पहले अचानक सारा समीकरण बदल गया। दफ्तर की सभी संभावित लाभार्थी महिलाएँ एकजुट होकर इन्हें घेर लिया। बेचारे अभी स्थिति समझ ही रहे थे, कि महिलाओं ने इनके शरीर के हर छिद्र से ठरक निकालने का पुण्य कार्य शुरू कर दिया कुछ प्राकृतिक छिद्रों से, तो कुछ अप्राकृतिक छिद्र बनाकर!
नज़ारा देखकर पुरुष सहकर्मी भी दुविधा में थे- कुछ इसे सीख और चेतावनी की तरह देख रहे थे… कुछ के अंदर थोड़ी बहुत ठरक पुष्पित-पल्लवित हो रही थी, जो वहीं कुचली जा रही थी… कुछ मदद का ऑफर दे रहे थे-
“दो-चार हाथ हम भी लगा लें, अगर आप इजाजत दें… बहती गंगा में हाथ धोने का इससे बढ़िया मौका क्या मिलेगा?” मगर महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया- “आप लोग दूर रहिए! आप तो सिर्फ इस “महिला उत्थान” अभियान का वीडियो बनाइए और सोशल मीडिया पर डालिए! कोई सुझाव दे रहा था कि इन्हें पुलिस के हवाले किया जाए, तो किसी ने कहा कि इनकी पत्नी को सौंप देना चाहिए, ताकि थोड़ा बहुत उत्थान वह भी करवा सके।
कहानी समाप्त।
मगर इस बार महिला दिवस ऐसा मनाया गया कि अगर हर जगह ऐसे ही मनाया जाए, तो सच मानिए- यही होगा असली ‘महिला दिवस’!

परिचय :-  डॉ. मुकेश ‘असीमित’
निवासी : गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
व्यवसाय : अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
लेखन रुचि : कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं
प्रकाशन : शीघ्र ही प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से), काव्य कुम्भ (साझा संकलन) नीलम पब्लिकेशन, काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन) लायंस पब्लिकेशन।
प्रकाशनाधीन : व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन)  किताबगंज   प्रकाशन,  गिरने में क्या हर्ज है -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह) भावना प्रकाशन। देश विदेश के जाने माने दैनिकी, साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित 
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ
प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें 
hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *