
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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दीये की टिमटिमाती लौ
पवन से पुछती है
क्या तुम मुझे बुझाने आई हो।
पवन बोली अरे नहीं
तुम, तुम तो अंघकार को
चिरने की शक्ति रखती हो
और जब अग्नीदेव तुम्हारे साथ है
तुम्हे कौन बुझा सकता है।
तुम भटके पथिक को पथ दिखाते हो
तुम धन्य हो कि तूम्हारी उपस्थिती
ईश्वर के समक्ष अनिवार्य है।
मै, मै तुम्है कभी नही बुझा सकती
मै दसो दिशाओं मे भ्रमण करती हूँ
दिग दिगन्त मे विचरण करती हूँ
जन जीवन के लिए
सासों के स्पन्दन के लिए
परन्तु, परन्तु क्या पवन
लौ पुछती है दीये की,
पवन बोली, मै कितना साथ दूँ मानव का
देख रहे हो न जिन वक्षो के सहारे बहती हूँ
स्वार्थी मानव वृक्ष ही काट रहे है
मै कैसे बहुगी वृक्ष न होगे तो
तुम्ही बताओ नन्हे दीये
कैसे समझा उन स्वार्थी मानव को की
तुम्हारा जीवन जल, पवन, माटी से बना है।
हे दिप क्या तुम मेरा सन्देश
मानव तक पहुंचाओगे
उनसे कहना वृक्षो को मत काटो
वृक्षो से तुम्हारी सांसो की ङोर बंधी है।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०२३” से सम्मानित हैं।
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