
डॉ. भवानी प्रधान
रायपुर (छत्तीसगढ़)
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भारत भूमि त्यौहारों का देश
विविधताओं का है समावेश
प्रकृति संरक्षण का देता सन्देश
वट मूल के नीचे बैठे महेश
प्रकृति के सृजन का प्रतीक
छाया लेते आते जाते पथिक
जेठ मास अमावस तिथि
मानते सब वट सावित्री
सुहागिने रखती व्रत उपवास
पति आरोग्यता का आश
वट जैसी घनी प्रेम हो
अटल सौभाग्य मेरा हो
वट वृक्ष कराता धार्मिकता
वैज्ञानिकता, अनश्वर का शोध
कराता दीर्घायु, अमरत्व बोध
दुनियां में वट वृक्ष अकेला
दीर्घायु और अलबेला
कल्पांत प्रलय काल में
खड़ा मुस्कुराता अकेला
यह त्रिमूर्ति का प्रतीक
ब्रम्हा, विष्णु और शिव
वसुंधरा हमारी माता है
नदी, ताल तलैया वस्त्र आभूषण
वृक्ष वनस्पतियाँ जीवन दायिनी
उसकी घनी शीतल छांव में
आते जाते पथिक सुस्ताते
स्वच्छ वायु थके को डेरा
इसकी डाली चिड़ियों का बसेरा
जाने कितने युगों से बड़ा
हरा-भरा शांत खड़ा
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परिचय :- डॉ. भवानी प्रधान
जन्म : २४ फरवरी महासमुंद (छ.ग.)
पिता : श्री गौतम भोई
माता : श्रीमती बिलासिनी भोई
पति : श्री शेषदेव प्रधान
निवासी : रायपुर (छत्तीसगढ़)
शिक्षा : एम. ए. राजनीति शास्त्र, एम. ए. हिंदी, साहित्य, बी. एड., डी. सी. ए., डिप्लोमा, इन इंग्लिश, पीएच. डी.
प्रकाशन विवरण : विभिन्न राष्ट्रीय शोध -पत्रिकाओं में एवं पुस्तकों में शोध-पत्रों का प्रकाशन, विजन आज – कल मासिक पत्रिका में, प्रबंध सम्पादक, लोक राग साहित्यिक वेब पोर्टल, देवभूमि साहित्यिक वेब पोर्टल, स्वैक्षिक दुनियां साहित्यिक वेब पोर्टल, दक्षिण समाचार -प्रतीक्षा साहित्यिक पत्रिका में समसामयिक विषयों पर आलेखों का प्रकाशन
सम्प्रति : शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव में अतिथि व्याख्याता (हिंदी )
अन्य : तपस्या सामाजिक सेवा संस्थान में सक्रिय भूमिका, विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं में भागीदारी
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