
मनोरमा पंत
महू जिला इंदौर म.प्र.
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कलेक्टर बेटा आफिस से लौटा तो देखा, माँ जमीन पर पालथी मारे, इतमीनान से प्लेट में चाय डालकर सुड़क सुड़क की आवाज के साथ पी रही थी।
आसपास नौकरों का मजमा जमा है और सबके हाथ में चाय की प्याली है। माँ का चेहरा खुशी से दमक रहा है। गुस्से से उसका चेहरा लाल हो गया, उसे देख सारे नौकर नौ दो ग्यारह हो गये। माँ से पूछा- “जमीन पर क्यों बैठी हो जवाब मिला- नहीं आसन पर बैठे हैं। बेटे ने फिर प्रश्न उछाला और ये प्लेट में चाय क्यों डालकर पीती हो माँ बोली जिंदगी गुजर गई बस्सी (चीनी की प्लेट) में ही चाय डालकर पी, कोप (कप) में बहुत गरम रहती है।और यह सुड़क-सुड़क की आवाज ? माँ खुशी से किलकती हुई बोली-” तू भी एक दिन बस्सी में चाय डालकर पी, सुड़क-सुड़क की आवाज से ही चाय पीने की तृप्ति होती है। बचपन में तू भी ऐसे ही चाय पीता था। भूल गया?”
बड़ी मनुहार के बाद माँ को लेकर आये कलेक्टर बेटे ने कुछ सोचा और आवाज लगाई- रामदीन ! चाय लाओ, कप के साथ प्लेट भी लाना और माँ के पास नीचे बैठ प्लेट में चाय डालकर सुड़क-सुड़क की आवाज सहित चाय पीने लगा।
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सेवानिवृत : शिक्षिका, केन्द्रीय विद्यालय भोपाल
निवासी : महू जिला इंदौर
सदस्या : लेखिका संघ भोपाल
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