
कीर्ति मेहता “कोमल”
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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तमस घनेरा हो रहा, श्याम थाम लो हाथ।
दास अकेला हो गया, रहना हर पल साथ।।नहीं अकेला राह में, चलता रह दिन-रात।
कृष्ण सदा ही साथ हैं, सुन ले अब तू तात।।पीड़ा मन की बोलती, अश्रु बहे दिन-रैन।
श्याम अकेला कर गए, नहीं हिया में चैन।।आया तू संसार में, निपट अकेला तात।
जाना है सब त्याग के, सुनना इतनी बात।।मीत अकेला रह गया, हुई अकेली रात।
अश्रु नैन में भर गए, तभी हुई बरसात।।कभी अकेला सा लगे, सुनना मन की बात।
कहीं दबी तुममें रही, लक्ष्यहीन सौगात।।कभी अकेला मत करो, खुद को जानो आप।
कुछ क्षण भीतर झाँक लो, काटो हर संताप।।स्व मूल्यांकन तो करो, नहीं अकेले आप।
पा लोगे तुम जीत को, करो साधना जाप।।
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बीए संस्कृत, एम ए हिंदी साहित्य
लेखन विधा : गद्य और पद्य की सभी विधाओं में समान रूप से लेखन
रचना प्रकाशन : साहित्यिक पत्रिकाओं में, कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, ग़ज़ल आदि का प्रकाशन, आकाशवाणी से प्रसारण।
प्राप्त सम्मान : अभिव्यक्ति विचार मंच नागदा से अभियक्ति गौरव सम्मान तथा शब्दप्रवाह उज्जैन द्वारा प्राप्त
लेखनी का उद्देश्य : जानकारी से ज्ञान प्राप्त करना।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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