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छठ व्रत की महिमा

ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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सूर्यदेवता के चरणों में
सूर्यास्त की किरणों से
सूर्योदय की किरणों तक
सूर्यदेव की उपासना में व्यस्त
सूर्यदेव का करते है व्रत,
दीपोत्सव के छह दिन के बाद
आता यह, कहलाता छठपर्व

व्रतधारी हर नियम धर्म है रखते
जलकुंड नदी तालाब पोखरे
छठपर्व पर शुद्ध और पूजित होते
सूर्यदेवता के आगे नतमस्तक होते

नवाते ब्रतधारी जल में
खड़े हो अपने शीश
दण्डवत करके दऊरा
लेके गाते छठ के गीत
सूर्यदेव की करते सेवाभक्ति
जल में उतरते अर्ध्य देने को
तनमन में ब्रतधारी की शक्ति
भक्तिमय रूपरंग में व्रतधारी
सूर्यदेवता की करते सेवाभक्ति

फल फूल ठेकुआ करते अर्पित
स्नान ध्यान कर सूर्यदेवता का
जल में खड़े करते है प्रणाम
व्रतधारी छठपर्व पर करते ध्यान

सूर्यपूजा, व्रतधारी का अन्तर्मन
भक्तिभाव में लगता तन-मन

लौकी भात खीर आदि पूर्व खाते
छठ पर्व पर निखोट व्रत रखते
आस्था भक्ति में व्रतधारी जुटते
छठपर्व की सुबह शाम की बेला
भक्तिरस के विहंगम रस में भरते

व्रतधारी की तालाब पोखरों में
लगती है कतार प्यारी न्यारी
भक्ति विनती प्रार्थना
छठ व्रत में तनमन से करते है
छठव्रतधारी

इस व्रत की महिमा इतनी है भारी
हर प्रान्त में छठ व्रत पालन करता
अन्तर्मन से व्रतधारी

परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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