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पितरों का श्राद्ध

ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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आश्विन का मास
पूर्वजों को करते
तनमन से याद,

करते श्रद्धा से
पितरों का तर्पण
करते उनका श्राद्ध,

पूर्वजो के प्रति
परिवारजन में
जगाते श्रद्धा
पितृपक्ष पर
रहता मन मे श्राद्ध
करने का विचार,

पूर्वजो की श्रद्धा में
श्रद्धापूर्वक करते
पितृपक्ष की सेवा में
श्रद्धा से श्राद्ध,

भोजन से पूर्व
तनमन से तर्पण
गौओ, कोए को
करते पहले अर्पण
देते पहले ग्रास,

पितृपक्ष पूर्वजो का
एक सुंदर पर्व
पूर्वजो की याद में
पन्द्रह दिन तक
परिवारजन निभाते
अनुभव में करते गर्व,

पूर्वजो के बिना
अधूरा है जीवन
पहचान है पूर्वज
उनकी ही देन है
उनके ही वंशज
यही है अपना जीवन,

पूर्वजो के प्रति
करते है श्राद्ध
समझते रहे है कर्तव्य
प्रतिवर्ष करे श्रद्धा से
पितरों का श्राद्ध,

पितरों को मुक्ति शांति मिले
हम परिवारजनों को
उनके आशीर्वाद से
सदैव जीने की सुख शान्ति
सदैव मिले,

याद करके पूर्वजो को
वंशज है उनके कहते रहे
नई पीढ़ी में
पितृपक्ष की महत्ता को
प्रतिवर्ष श्रद्धा भाव से
करने की तिथि को
याद रखकर
नियमधर्म से करने को
हम करने की कहते रहे,

परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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