
भारमल गर्ग “विलक्षण”
जालोर (राजस्थान)
********************
प्रिय महादेवी,
आज यह पत्र लिखते समय मेरा हृदय कमल की भाँति खिल उठा है, क्योंकि तुम्हारे प्रति मेरे भावों को शब्दों में बाँधने का यह अवसर मुझे दिव्य आनंद प्रदान कर रहा है। तुम्हारे सौंदर्य की छटा, तुम्हारे मधुर स्वभाव की मंदाकिनी, और तुम्हारी निर्मल मुस्कान की किरणें ये सभी मेरे जीवन के अंधकार को प्रकाशित कर देती हैं। तुम्हारे सान्निध्य में मुझे ऐसा प्रतीत होता है मानो समस्त सृष्टि ने अपने रहस्यमय आलिंगन में मुझे समेट लिया हो।
तुम्हारी आँखों में वह गहराई है जिसमें मैं अपने अस्तित्व का सार पाता हूँ। तुम्हारा एक क्षण भी मेरे लिए युगों के समान हो जाता है, और तुम्हारी अनुपस्थिति में प्रत्येक पल एक अंतहीन रात्रि-सा प्रतीत होता है। तुम्हारे बिना यह संसार फीका और नीरस है, परंतु तुम्हारे साथ प्रत्येक कण में मधुरता का संचार हो जाता है।
हे मेरी प्राणाधार! क्या तुम जानती हो कि तुम्हारे प्रेम ने मुझे कितना समृद्ध कर दिया है? तुम्हारे स्पर्श ने मेरे हृदय में वसुधा का वह उत्सव जगाया है जिसमें प्रेम की वर्षा निरंतर बनी रहती है। तुम मेरे लिए वह सुखद स्मृति हो जो मेरे स्वप्नों को सजीव कर देती है, और वह मधुर संगीत हो जो मेरे रोम-रोम में गूँज उठता है।
यदि मैं कभी तुमसे दूर हूँ, तो जान लो कि मेरी आत्मा तुम्हारे पास ही रहती है। तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम गंगा की धारा की भाँति निर्मल और अविरल है। मैं चाहता हूँ कि हमारा यह बंधन चिरकाल तक अटूट रहे, और हमारे प्रेम की यह गाथा सूर्य-चंद्रमा के समान अमर हो जाए।
तुम्हारे प्रेम के बिना मेरा जीवन वृक्ष पुष्पविहीन है। कृपया मुझे यह वरदान दो कि मैं सदैव तुम्हारे हृदय के समीप रह सकूँ।
परिचय :- भारमल गर्ग “विलक्षण”
निवासी : सांचौर जालोर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻
आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष पर प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच की इस लिंक को खोलें और लाइक करें 👉 hindi rakshak manch 👈… राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻



















