Monday, January 12राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

टन टन टन

नील मणि
मवाना रोड (मेरठ)
********************

गुप्ता जी रोज़ की तरह आज भी अख़बार में घुसे थे, गुप्ता जी की आदत थी जब तक घड़ी ९:०० न बजाए, अखबार से चिपके ही रहते थे। आज भी घड़ी ने जैसे ही नौ बार पुकारा, गुप्ता जी झट तौलिया उठा, लपड़ धपड़ बाथरूम की ओर लपके।
धड़ाम!!!
अचानक आंगन से ज़ोरदार आवाज आई।
रीना, जो किचिन में नाश्ता और टिफिन की जुगलबंदी में लगी थी, घबराकर दौड़ी। बाहर आकर जो नज़ारा देखा तो हँसी रोकना मुश्किल हो गया।
आंगन में गुप्ता जी बड़े शाही अंदाज़ में फ़िसले पड़े थे। उनका भारी-भरकम शरीर, टेढ़ा-मेढ़ा होकर जमीन पर ऐसा पसरा था मानो किसी मूर्तिकार का बड़ा सा अनगढ़ अधूरा शिल्प।
रीना ने होंठ दबाकर हँसी छुपाई, फिर गंभीर आवाज़ में बोली – “क्या ढूँढ रहे हो गुप्ता जी? धरती के अंदर छिपा खज़ाना या बाथरूम का शॉर्टकट?”
खिसियाते गुप्ता जी अब कराहते हुए बोले – “अरे रीना… ये फर्श बड़ा धोखेबाज़ है, ऊपर से चिकना और अंदर से कठोर!” रीना अब हँसी रोक न सकी। पूरा आँगन ठहाकों से गूंज उठा।

परिचय :- नील मणि
निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ)
घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *