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ऐसी हवा चले की बदल जाये जमाना

विजय वर्धन
भागलपुर (बिहार)

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हर लब पे सदा गूंजे खुशियों का तराना
हो राम भरत जैसा अगर भाइयों में प्यार
मिट जाएगी जहाँ चाहत का बहाना
लक्षमन के जैसी सेवा और भरत के जैसा त्याग
घर घर में पैठ जायेगा खुशियों का खजाना
विभीषण की तरह मित्र और रिछ जैसा दोस्त
फिर कहाँ रह पायेगा रावण का ठिकाना
हनुमान की तरह सेवक गर हों सभी जगह
सब भूल जायेंगे किसी सीता को चुराना
हो जायेगा संसार में फिर व्याप्त रामराज्य
खुशियों का राग गूंजेगा वंशी से सुहाना

परिचय :-  विजय वर्धन
पिता जी : स्व. हरिनंदन प्रसाद
माता जी : स्व. सरोजिनी देवी
निवासी : लहेरी टोला भागलपुर (बिहार)
शिक्षा : एम.एससी.बी.एड.
सम्प्रति : एस. बी. आई. से अवकाश प्राप्त
प्रकाशन : मेरा भारत कहाँ खो गया (कविता संग्रह), विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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