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तांत्रिक चौराहा

डॉ. मुकेश ‘असीमित’
गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
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“ज़रा बचकर चलो… कितनी बार कहा है, चौराहे के बीच से मत जाया करो!” यह वाक्य मेरे कानों में हर सुबह वैसे ही पड़ता है, जैसे अलार्म बस फर्क इतना है कि अलार्म बंद किया जा सकता है, श्रीमती जी को नहीं। मॉर्निंग वॉक पर आगे-आगे मैं और पीछे-पीछे चौकन्नी निगाहों से मेरी चाल पर नज़र रखती हुई श्रीमती जी मानो मैं किसी आतंकी संदिग्ध गतिविधि से घिरा हुआ हूँ। हमारी वॉकिंग रोड के बीचोंबीच एक चौराहा है। नगर पालिका ने उसका कोई नाम नहीं रखा, इसलिए हमने रख दिया “तांत्रिक चौराहा”। शहर के तमाम भूत-प्रेत, बाधाएँ, टोटके, यंत्र-तंत्र और अतृप्त आत्माएँ यहीं आकर लोकतांत्रिक ढंग से डंप की जाती हैं। जैसे रेलवे कॉलोनी को जनता ने अनधिकृत रूप से मॉर्निंग वॉक ट्रैक बना लिया, वैसे ही इस चौराहे को तांत्रिकों ने अधिकृत कर्मस्थल घोषित कर दिया। वैसे भी लगता है, इसे बनाते समय किसी खड़ूस योजना निर्माता को दिव्य संकेत मिल गया होगा। रात में न ट्रैफिक, न विरोध, न मोहल्ले की आँखें बस खुला आसमान और गूढ़ अंधकार। टोटका करने वालों के लिए दुरात्माओं के निस्तारण का इससे बेहतर रिटायरमेंट प्लान क्या होगा?
बुधवार और रविवार की सुबह तो यह चौराहा किसी रहस्यमय प्रदर्शनी जैसा लगता है आधे भरे मिट्टी के घड़े, लाल-पीले सिंदूर में लथपथ कपड़े, आटे की गोलियाँ, ऐसे फूल जिनसे डर लगता है, नाग की तरह कुंडली मारी माला और नारियल जिन पर ऐसे मांडने बने होते हैं मानो अभी चीख पड़ेंगे। यह सब देखकर लगता है कि शहर की आधी बीमारियाँ यहीं इलाज के लिए लाई जाती हैं। हमारे यहाँ बीमारी सिर्फ बीमारी नहीं होती वह किसी न किसी की नज़र, प्रेत या अतृप्त आत्मा का नतीजा होती है। दवा तभी असर करेगी, जब पहले आत्मा को नोटिस पीरियड देकर निकाला जाए। इसके लिए बाकायदा उद्योग खड़े हो चुके हैं भभूत, अनुष्ठान, सवामणी, ताबीज़… और अंत में, अगर कुछ न चले, तो डॉक्टर। झाड़-फूँक दिन में भी हो जाती है, लेकिन टोन-टोटका रात का खेल है। आत्मा को घर से निकालकर चौराहे पर छोड़ा जाता है ताकि वह इंतज़ार करे कि कोई राहगीर आए, ठोकर खाए और आत्मा उससे चिपक जाए। “आ बैल, मुझे मार” का आध्यात्मिक संस्करण। कई बार तांत्रिक रंगे हाथों पकड़े भी गए हैं, इसलिए अब यह सब बेहद गोपनीय ढंग से होता है। कुछ अघोरी श्मशान में क्रियाएँ करते पकड़े गए और जनता ने उनकी जीते-जी कपाल क्रिया कर दी।
एक दिन हम यूँ ही मस्ती में वॉक पर निकले। कानों में ईयरफोन मतलब ध्वनि-विस्तारक यंत्र लगे थे। अचानक मेरा पैर एक छोटे से मिट्टी के घड़े से टकराया और वह लुढ़कता हुआ दूर जा गिरा। पीछे-पीछे आ रही श्रीमती जी सन्न रह गईं। उस क्षण उन्हें लगा, बिन बुलाये मेहमान की तरह दुरात्मा प्रवेश कर चुकी है। इसके बाद से उनकी नज़र में मैं बदल गया। मेरे हँसने, बोलने, खाने, चलने सबमें उन्हें कुछ और ही दिखने लगा। निष्कर्ष साफ था मेरे भीतर किसी और आत्मा ने प्रवेश कर लिया है। यूँ तो यह संवाद मैं सालों से सुन रहा हूँ कि “अब तुम पहले जैसे नहीं रहे”, जबकि सच यह है कि इस परिवर्तन में उनका योगदान ऐतिहासिक है। फिर भी दोष मुझ पर। स्थिति यहाँ तक पहुँची कि उनकी नज़र में मैं पूरी तरह एक्सचेंज हो चुका था। असली पति शायद चौराहे पर छूट गया और घड़े से कोई और घर आ गया।
नतीजा ताबीज़, झाड़-फूँक, टोटकों की बौछार और सघन निगरानी। एक दिन “होल बॉडी निरीक्षण” के लिए एक पहुँचा हुआ तांत्रिक बुलाया गया। जब उसने प्रमाण-पत्र जारी किया कि “हाँ, यही मूल पति है”, तब जाकर श्रीमती जी के भीतर बैठा भूत बाहर निकला। लेकिन अब हाल यह है कि उस चौराहे से गुजरते समय मैं बॉर्डर के सिपाही जैसा सतर्क रहता हूँ। पीछे से कमांडर की आवाज़ आती रहती है “बीच से मत जाना!” मन में हर बार यही डर कहीं कोई आत्मा फिर न चिपक जाए। दोस्तों को भी चेतावनी दे दी है … “भाई, संभल के चलना… ये तांत्रिक चौराहा है!”

परिचय :-  डॉ. मुकेश ‘असीमित’
निवासी : गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
व्यवसाय : अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
लेखन रुचि : कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं
प्रकाशन : शीघ्र ही प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से), काव्य कुम्भ (साझा संकलन) नीलम पब्लिकेशन, काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन) लायंस पब्लिकेशन।
प्रकाशनाधीन : व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन)  किताबगंज   प्रकाशन,  गिरने में क्या हर्ज है -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह) भावना प्रकाशन। देश विदेश के जाने माने दैनिकी, साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित 
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

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