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रवि किरण

मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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कोहरे की धुंध मे
अलसाई रवि किरण
खोज रही धरा पर
टिकने के लिए ठौर
तभी, हां, तभी
उसकी चमक से
ओस बून्द दुर्वाकुंर
पर चमक उठी
ओस बून्द बोली
आओ सखी
हम साथ,
साथ खेले।
दुर्वाकुर कुछ
कहता उसके पूर्व
ओस बून्द लुढक
गई धरा पर
और, हा, रविकिरण ने
अपना ठौर पा लिया
घना कोहरा, और घना हो
रवि को ढंक रहा था।
तभी, मकर राशि मे
रवि के प्रवेश पर
कोहरे ने करवट ली
वह रवि का ताप
सहन करने का
साहस नही कर पाया
जगत मे जीवन
अस्त-व्यस्त था
रवि के प्रकाश ने सर्वस्व को
जीवन दान देकर
अपना कर्तव्य जन कल्याण
के लिए पूर्ण किया

परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०२३” से सम्मानित हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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