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शिवशक्ति

शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

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शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।
शरण में तुम्हारे सभी जीवधारी।।
मिटा दो सभी कष्ट महका दो बगिया।
त्रिशूलं कराग्रे त्रयी तापहारी।।

महाकाल उज्जैन में तुम विराजे।
लिए हाथ डमरू गले सर्प साजे।
कहे सब सदा काल भी तुमसे हारे।
चढ़े अंग में भस्म तड़के तुम्हारे।
वरे वाम अंगे प्रिये गौर माता।
गुणातीत गणनाथ हे निर्विकारी।
शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।।

किया देव दानव जलधि का बिलोना।
तभी जहर का कुंभ निकला कहोना।
लगे देव दानव सभी फड़फड़ाने।
पिया था हलाहल सभी को बचाने।
नमन नीलकंठे जटा गंगधारी।
निराकार निर्गुण तपस्वी अकारी।
शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।।

बहुत कष्ट संसार में तेरे देखा।
तड़पते हृदय का कभी लेना लेखा।
रहे खुश हमेशा चुभें दिल में भाले।
दिखाऍं हृदय के बता किसको छाले।
करों पार भव से ये नैया हमारी।
विनय हम करें हे सुनो शिव अघारी।।
शमीशान शिव विश्वनिर्वाण कारी।।

परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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