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नदी का समर्पण

अनिता राजेश गुप्ता
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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मैं बहती नदिया सी चंचल,
तुम सागर से गंभीर प्रिये,
मैं इठलाती कल-कल छल-छल करती,
उमड़-घुमड़ कर आती तुम्हारे पास,
मेरा लक्ष्य है सागर से मिलन,
लेकिन नहीं भूली हूं मैं,
पथ के ग्रामों और शहरों को,
खेतों और खलिहानों को,
इन सबको अपने जल से सींचती,
जन-जन की मैं प्यास बुझाती,
पहुंचती हूं अपने लक्ष्य तक,
जहां सागर से मिलकर मुझे,
एकाकार होना है,
जहां न “मैं” हूं न “तुम” हो,
बल्कि अब “मैं” व “तुम”
दोनों मिलकर “हम” हैं।

परिचय :- अनिता राजेश गुप्ता
निवासी – इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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