
माधवी तारे
लंदन
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सब देवी देवताओं के आग्रह और नम्र निवेदन पर ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण करने की जिम्मेदारी अपने पर ली। परंतु भागवत कह कर जैसे श्री व्यास मुनि को कार्य की सार्थकता नहीं लग रही थी। मन में लगता रहा कि इसमें कुछ कमी रह गई है। बाद में जब सुकदेव मुनि ने नैमिषारण्य में परीक्षित राजा जो भागवत कथा सुनाना शुरू किया तब उन्हें अपने कृतित्व की सार्थकता लगने लगी। ऐसी ही स्थिति ब्रह्मा की सृष्टि निर्माण करने के बाद हुई होगी, जब तक सरस्वती की वीणा की झंकार प्रकृति में नहीं गूंजी और पक्षियों का कलरव और नदी की कलकल उन्हें नहीं सुनाई दी, तब तक ब्रह्माजी को आनंद की प्राप्ति नहीं हुई। झरनों से बहते, कलकल करती नदियों के संगीत से पूरी प्रकृति रममाण हुई। मनुष्य और प्रकृति के तालमेल की शुरुआत हुई। अनेक वर्ष यह तालमेल बढ़िया चल रहा था लेकिन लालच ने जब मनुष्य की बुद्धि को छुआ तो उसे दुर्बुद्धि बनने में देर नहीं लगी और धीरे-धीरे इंसान ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया. इस तथ्य की प्रचिती मुझे उत्तर-वाहिनी नर्मदा की परिक्रमा करते हुए हुई। नर्मदा शुरू से पूर्व-पश्चिम बहने वाली नदी है। शायद उसे भी मनुष्य स्वार्थी और सृष्टि को दांव पर लगाते ही जाने की आदत पसंद नहीं आई, मां है, पुण्यसलिला है, अपने बच्चों पर ही कैसे गुस्सा उतारती, तो उसने रास्ता ही बदल लिया और उत्तर-वाहिनी हो गई।
लेकिन जैसा कि कहते हैं कि अच्छे व्यक्ति, अच्छी चीज़ें कभी अपना चरित्र नहीं बदलती. इसलिये कहा जाता है कि –
नर्मदे मंगले रेवे, अशुभ नाशिनी
गुनाह क्षमा करे सबका दया रखो मनमोहिनी
आज परिस्थिति इस सीमा तक पहुंच चुकी है विनाश होना अवश्यंभावी है। अभी असंतुलन हाथ के बाहर जाते दिखाई दे रहे हैं और मन आशंका से काँप रहा है कि हमारे बच्चे और उनके बच्चे कैसी धरती देखेंगे। हाथ में मिले कुबेर के खजाने को इंसान ने नष्ट कर दिया है और अपने ही आँखों से अपना विनाश देखने को मजबूर है। लेकिन मां रेवा अभी भी पापनाशिनी और मुक्तिदायिनी नदी है, मध्यप्रदेश के बड़े इलाके की जीवनदायिनी है, कहीं ऐसा न हो कि हमसे कुपित हो वह सरस्वती नदी की तरह हमेशा के लिये गुम हो जाए।
परिचय :- माधवी तारे
वर्तमान निवास : लंदन
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
अध्यक्ष : अंतर्राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (लन्दन शाखा)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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