Sunday, June 28राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

जिनगी के रद्दा

खुमान सिंह भाट
रमतरा, बालोद, (छत्तीसगढ़)
********************

(छत्तीसगढ़ी – गीत)12

वो दिन बढ़ सुघ्घर हो जाथे,
दाई के भुवना म जोत जंवारा लहराथे,
चैत के महीना खुशहाली के नवा बिहान लाथे,
फेर नवा बछर के अंजोर बगराही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा बताही कोन?

महिना बैसाख के हमाथे।
अक्ति के भंवर लइका मन
पुतरी पुतरा के परवाथे,
ऐसो के लगिन म मोरो लग जातिस,
दाई अपन मन के बात बताते,
कैसे समझावव मैं तोला वो दाई,
बिना रोजगार मोला,
अपन बेटी के हाथ धराही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा दिखही कोन?

मुंधेरहा के घाम
मंझनिया कस जनाथे,
सुरुज नारायण तरवा म चढ़ जाथे,
जब महिना जेठ के आते,
जरत भोंभरा तीपत हे छानी,
बूंद-बूंद पानी बर तरसत परानी,
जल बिन सुन्ना हमर जिगानी,
फेर जल संरक्षण में
महत्तम ला बताही कोन ?
मोर जिनगी के रद्दा दिखही कोन?

पियासे भुंईया के जी जुड़ाथे
जब महीना आषाढ़ संग बरखा आते,
कोयली के बसेरा हे आमा के डार
बखरी म पाके चिरईजाम बड़े मिठाथे,
चेंच-भाजी संग म अदउरी के बरी हे,
गरजे बादर सावन के झड़ी हे
हुंम जग देके देवता ला मनाथे
किसान खेत म चीला चढ़ाथे
लइका मन गली म गेंड़ी खपाथे
घरों घर बइगा नीम डारा खोचाथे,
जुरमिल के गांव म हरेली मनाथे‌।
नांगर-कोप्पर, गैंती-रापा, कुदारी,
बैठगे गाड़ा के आरा -पाठा
वो बईला के जावर जोड़ी ल चलाही कोन
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

बेटी तीजा पहुना बनके आथे,
जब महिना भादो के हमाथे,
करु भात खा के महादेव ल मनाथे,
बइगा शीतला म पोरा जांता चढाथे,
गांव गली म गौरी के ललना आते
फेर…वो तीजा के फरहर ,
ठेठरी खुरमी ल बनाही कोन
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

मोर गांव के कुम्हार विधाता बन जाथे
हाथ लगते ओकर माटी म जीव पर जाते
आनी बानी के रंग ले अंगला सजाते
कुवांर म दाई नव दुर्गा ह आथे
जुरमिल भाव भक्ति के जोत जलाते,
फेर अब माता सेवा ल गाके सुनाही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

लिपाए तुलसी के चौरा,
चुक ले जनाथे,
अंगना म चौक पुरा के,
सुघ्घर नवा दिया जलाते।
महिना सुघ्घर कार्तिक के हमाथे,
लईका मन मुंदेरहा ले उठ,
कातिक नहाय ल जाते।
गांव के बईगा ईसर-गौरा-गौरी ल जगाते।
फेर …..एक पतरी रैनी बैनी अब गही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

देखते-देखत धान ह पोटरागे,
महिना सुघ्घर अघ्घन हमागे,
अंउटत हे खेत के पानी
जम्मो उरीद ओन्हारी बोवागे
रनावत करपा सुखावत हे बाली,
ये भारा के बोजहा ल उठाही कोन
ये माटी म जनम धरे हस लाल
ये माटी के करजा चुका ही कोन
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

पुष के महीने ऐसे हमाथे
सुर्री मारत हवा अउ कोहरा के धुंध
जाड़ थोरकीन ज्यादा जनाथे,
दाई के गोरसी बबा बीड़ी सुलगाथे,
आगोरत बैठे मुहाटी म डोकरी दाई
फेर….छेरीक छेरा के धुन ला अब गाही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

महानदी के जिहां धार बोहाथे
राजीम म पुन्नी के मेला भराथे
माघ के पावन महीना हमाथे
गांव गली म मड़ई सकलाथे
देवी देवता ल सुमर के बुलाथे
फेर वो भेलवा के झुलना अब झुलाही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन?

परसा के फुल म बजे खेत खार हे
फागुन के रंग पिचकारी के धार हे
बरा-सोंहारी डुबकी कढ़ी के साग
मनभावन नंगारा के धुन
फेर फागुन के गीत ल अब गुनगुनाही कोन?
मोर जिनगी के रद्दा ल दिखाही कोन…?

परिचय :- खुमान सिंह भाट
पिता : श्री पुनित राम भाट
निवासी : ग्राम- रमतरा, जिला- बालोद, (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *