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पैसा

शशि चन्दन “निर्झर”
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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पैसा चाहिए, चाहिए पैसा,
जीने को भी चाहिए पैसा।

रोटी माँगे, माँगे रोटी,
रोटी के संग माँगे पैसा।

घर बनवाए, बनवाए घर,
घर सजाने को चाहिए पैसा।

सपने देखे, देखे सपने,
सपनों को भी चाहिए पैसा।

रिश्ते अपने, अपने रिश्ते,
रिश्तों को कब चाहिए पैसा?

बहुत ज़रूरी है पैसा मगर,
हर चीज़ से ज़्यादा नहीं पैसा।

परिचय :- इंदौर (मध्य प्रदेश) की निवासी अपने शब्दों की निर्झर बरखा करने वाली शशि चन्दन एक ग्रहणी का दायित्व निभाते हुए अपने अनछुए अनसुलझे एहसासों को अपनी लेखनी के माध्यम से स्याह रंग कोरे कागज़ पर उतारतीं हैं, जो उन्हें खुशियों के आसमानी रंग देते हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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