अनुराग बघेल
लोरमी, मुंगेली (छत्तीसगढ़)
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ज्ञान की धारा, बुद्धि का तारा, वीणा वाली शारदे,
अविद्या दूर करो, ज्योतिर्मय कर दो माँ शारदे।
बुद्धि का दीप जलाओ माँ, मन का अंधकार दूर करो,
जो मौन खड़ा है द्वार पर, उसे ज्ञान से प्रचुर करो।
चाँदनी सी शीतल देवी, पुस्तक-धारिणी कल्याणी,
स्वर की देवी, सुर की जननी, दे-दो हमको वाणी।
सृष्टि के कण-कण में गूँजे, तेरी ही वीणा की झंकार,
करुणा की निरंतर धार बहे, पावन हो यह सारा संसार।
लेखनी को वर दो माँ, शब्द-शब्द हो जाए पावन,
तेरी कृपा से ही रच जाऊँ माँ, मैं एक नया सृजन।
तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, करूँ वंदना बारंबार,
मेरे कंठ में वास करो माँ, यही विनती, यही पुकार।
परिचय :- अनुराग बघेल
पता : ग्राम बिजराकापा खुर्द, तहसील लोरमी, जिला मुंगेली ((छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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