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पहला अधिकार

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रचयिता : कुमुद दुबे

ड्राईंग रुम में फोन की घंटी बजी, बेटी सिया ने झट से फोन उठाया, आशीष का फोन था।
सिया ने आवाज लगाई मम्मा  ….मामा का फोन है। अमिता रसोई में थी, फटाफट हाथ धोये और  सिया से रिसिवर लेकर सीधे बोलना शुरु कर दिया भैया कल आ रहे हो ना? आशीष बोला हाँ आ रहा हूँ ! पर, यह बताने के लिये फोन लगाया कि मुझे आते-आते शाम हो जायेगी तुम लोग मेरा खाने पर इन्तजार मत करना। मैं रमा दीदी से राखी बंधवाकर आऊँगा। तुझे तो पता ही है, रमा दीदी खाना खाये बगैर आने नहीं देगी।  क्षणिक  चुप्पी के बाद “ओके भैया” कहते हुये अमिता ने रिसिवर रखा और रसोई में जाने लगी। पीछे-पीछे सिया आयी और प्रश्न करने लगी; मम्मा, मामा कल आ रहे हैं ना? अमिता ने हामी भरी। सिया बोली- वाह.., फिर तो कल मामा की पसंद की खीर जरूर बनेगी। अमिता बोली- खीर तो तेरे लिये भी बना दूँगी, पर भैया रमा दीदी से राखी बंधवाकर और वहीं खाना खा कर शाम तक आयेंगे।
सिया ने फिर प्रश्न किया मम्मा आप रियल सिस्टर हो फिर मामा हर साल रमा मासी से पहले राखी क्यों बंधवाते हैं?
अमिता बोली बेटा तेरे मामा मुझसे आठ साल बड़े हैं। जब वो एक वर्ष के थे तब से रमा दीदी राखी बांधती आ रही है तो पहला अधिकार उनका हुआ ना..।
लेखिका परिचय :- कुमुद के.सी.दुबे
जन्म- ९ अगस्त १९५८ – जबलपुर
शिक्षा- स्नातक
सम्प्रति एवं परिचय- वाणिज्यिककर विभाग से ३१ अगस्त २०१८ को स्वैच्छिक सेवानिवृत। विभिन्न सामाजिक पत्र पत्रिकाओं में लेख, कविता एवं लघुकथा का प्रकाशन। कहानी लेखन मे भी रुची।
इन्दौर से प्रकाशित श्री श्रीगौड नवचेतना संवाद पत्रिका में पाकशास्त्र (रेसिपी) के स्थायी कालम की लेखिका।
विदेश प्रवास- अमेरिका, इंग्लैण्ड एवं फ्रांस (सन् २०१० से अभी तक)।

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