
ओमप्रकाश सिंह
चंपारण (बिहार)
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अधिकांश युवा मानस की
पटल से उभर रही है आक्रोश की गुबार।
क्योकि आजकल की युवाओ को
सही पहचान बनाए रखने के लिए।
न तो कोई मार्गदर्शक हैं
न कोई मानदंड सिर्फ भौतिकता की दौड़।
उदंडता से पीड़ित सुकुमार सपने
को साथ बिन्दीया सी चमकती।
तुच्छ सफलताओ को
चूमने पुचकारने में व्यस्त।
खाशकर माध्य्म वर्गीय पिछड़े परिवार के
किशोर और युवा अपनी मनोवृत्तियों में।
छेड़ रखा है आक्रोश की धुंआ
जो गुबार बनता जा रहा है।
इस जीवन की निरस्त उत्कण्ड़ाओ को
एक आकलन की सूत्र लिए।
अपनी पहचान बनाए रखने की लिए
भ्र्ष्टाचार की गर्माहट में भइए भतीजावाद में।
जो नाजीवाद से छह गया है
इस आजाद हिंदुस्तान में।
अपने आपको चर्चित तस्वीरों में
उवभारने के लिए आक्रोशो को साथ लिए।
कानूनी अपराधों की संगीनों में
बेध रहा है अपने आपको।
अगर यह आक्रोश रोजगार की मरहम से
बन्द न हुआ तो शांति का नब्ज डुब जाएगा।
यह विकराल रूप सामने आएगा
.
परिचय :- ओमप्रकाश सिंह (शिक्षक मध्य विद्यालय रूपहारा)
ग्राम – गंगापीपर
जिला – पूर्वी चंपारण (बिहार)
सम्मान – हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान
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