सागर गहरा कितना क्या है
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार म.प्र.
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सागर गहरा कितना क्या है।
मछुआरों ने ही समझा है।
तेज हवा, लहरों से लड़ना,
पतवारों की जीवटता है।
गिर-उठकर चलना कश्ती ने,
तूफानों से ही सीखा है।
भाप बने या बर्फ वही जल,
जाकर सागर में गिरना है।
सूरज - अग्नि से बनकर भी,
धरती का जल से रिश्ता है।
मंथन के दौरान जो चाहा,
सब कुछ सागर से निकला है।
परिचय :- नवीन माथुर पंचोली
निवास : अमझेरा धार म.प्र.
सम्प्रति : शिक्षक
प्रकाशन : देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित।
सम्मान : साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।
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